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धरती के लिए जैविक खेती अपनाएं : चौधरी
Sat, 07 Dec 2024 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 07 Dec 2024 01:10 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि महाविद्यालय कौल में विश्व मृदा दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. ओपी चौधरी ने कहा कि हमें धरती की लगातार बिगड़ती हुई सेहत को सुधारने के लिए प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि हम अपने स्वार्थों की खातिर अंधाधुंध रसायनिक खादों तथा दवाइयों का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारतीय खेती की पद्धति विश्वविख्यात रही है। उस समय रसायन मुक्त खेती की जाती थी। प्राचार्य ने कृषि वैज्ञानिकों तथा अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को अपने-अपने क्षेत्रों में मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए भरसक प्रयास करने को कहा।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. विशाल गोयल ने विश्व मृदा दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए खेती में रसायन का अधिक मात्रा में उपयोग किए जाने से भूमि के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार से रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य गिरता जा रहा है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में हो रही गिरावट उसी का परिणाम है, जो जीवन के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है।
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इस अवसर पर पोस्टर मेकिंग व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया और विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
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ढांड। चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि महाविद्यालय कौल में विश्व मृदा दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. ओपी चौधरी ने कहा कि हमें धरती की लगातार बिगड़ती हुई सेहत को सुधारने के लिए प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि हम अपने स्वार्थों की खातिर अंधाधुंध रसायनिक खादों तथा दवाइयों का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारतीय खेती की पद्धति विश्वविख्यात रही है। उस समय रसायन मुक्त खेती की जाती थी। प्राचार्य ने कृषि वैज्ञानिकों तथा अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को अपने-अपने क्षेत्रों में मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए भरसक प्रयास करने को कहा।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. विशाल गोयल ने विश्व मृदा दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए खेती में रसायन का अधिक मात्रा में उपयोग किए जाने से भूमि के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार से रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य गिरता जा रहा है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में हो रही गिरावट उसी का परिणाम है, जो जीवन के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है।
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इस अवसर पर पोस्टर मेकिंग व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया और विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।