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Kaithal News: दिवाली में सजावटी सामान की भरमार, बंदनवार की ज्यादा मांग
Thu, 24 Oct 2024 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 24 Oct 2024 02:03 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिवाली के लिए बाजार में खूब रौनक देखने को मिल रही है। बाजार में तमाम दुकानें दिवाली के विभिन्न सामानों से अटी पड़ी हैं। इनमें बंदनवार की मांग सबसे ज्यादा दिख रही है।
दुकानों के अलावा बाजार में फड़ी व स्टाल लगे हुए हैं। बाजार में रंगोली रंग, फूल, बंदनवार, थ्री-डी फ्लोटिंग दीये, थ्रीडी पेपर रंगोली, पेपर निर्मित कंदील, शीशे की बोतल में लाइटिंग, झालर, पेपर दीया, वॉल हैंगिंग, तोरण, कांच के पात्र में दीये, कागज की लालटेन, फूल और दीया रंगोली, लिपन कला में सीडी सजावट, हाथ से पेंट दीये, हुला हूप झूमर सहित तमाम सजावटी सामान की बाढ़ आई हुई है। लोग इनकी खूब खरीदारी कर रहे हैं।
दिवाली पर बंदनवार का विशेष महत्व माना जाता है, चूंकि घर के मुख्य द्वार व कमरों के प्रवेश पर इसे लगाने से शुभता आती है। बंदनवार घर के द्वार पर लगने की प्रथा आदिकाल से चली आ रही है। उस समय आम व अशोका के पत्तों, फूलों व वनस्पतियों से घर का द्वार सजाया जाता है। आधुनिकता ने इसका डिजाइन बदल गया है।
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बाजार में विभिन्न आर्टिफिशियल व फाइबर पदार्थों से बने बंदनवार मिल रहे हैं। बाजार में करीब दो से ढाई दर्जन किस्म के बंदनवार उपलब्ध हैं। जो लोगों को आकर्षित कर रहे हैं और लोग इनकी खूब खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में कागज, फाइबर, कपड़ा, ऊन, प्लास्टिक इत्यादि से निर्मित बंदनवार मिल रहे हैं। जिनकी बहुत बड़ी रेंज व दर्जनों किस्में उपलब्ध हैं। इनके डिजाइन, गुणवत्ता, आकार, रंगों इत्यादि में काफी अंतर है। इसके अलावा धोए जा सकने वाले बंदनवार भी उपलब्ध हैं। विक्रेता राजकुमार, मनदीप, राहुल, शुभम, दीपक, सुमन ने बताया कि बाजार में दर्जनों किस्म के बंदनवार उपलब्ध हैं। वे सारा सामान दिल्ली के सदर बाजार से लाते हैं।
दुकानों के बाहर लटती बंदनवार ग्राहकों को खूब लुभा रही है। पिछले कुछ सालों में बंदनवार क्रेज भी बढ़ा है। पहले कागज की फोल्ड होने वाली बंदनवार घरों व दुकानों के दरवाजों पर लगाई जाती थी। इसके बाद झालर वाली बंदनवारों की रौनक बन गई है। अब ऐसे लगभग 20 बड़ी दुकानें व 50 अधिक छोटी बंदनवार की दुकानें है, जो ग्राहकों को खूब लुभा रही हैं। बाजार में घर की सजावट के लिए 15 से ज्यादा डिजाइनों में बंदनवार उपलब्ध है। यह 100 से लेकर दो हजार रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं।
दुकानदार अशोक खुरानियां ने बताया कि दिवाली पर बंदनवारों की मांग अधिक होती है। इससे घर में रौनक दिखाई देती है। इसमें मुख्य तौर पर कपास लैंस, फैंसी स्टोन व अन्य रंगों का इस्तेमाल कर बंदनवार को तैयार किया जाता है। बंदनवारों को घर की सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम व गृह प्रवेश के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
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कैथल। दिवाली के लिए बाजार में खूब रौनक देखने को मिल रही है। बाजार में तमाम दुकानें दिवाली के विभिन्न सामानों से अटी पड़ी हैं। इनमें बंदनवार की मांग सबसे ज्यादा दिख रही है।
दुकानों के अलावा बाजार में फड़ी व स्टाल लगे हुए हैं। बाजार में रंगोली रंग, फूल, बंदनवार, थ्री-डी फ्लोटिंग दीये, थ्रीडी पेपर रंगोली, पेपर निर्मित कंदील, शीशे की बोतल में लाइटिंग, झालर, पेपर दीया, वॉल हैंगिंग, तोरण, कांच के पात्र में दीये, कागज की लालटेन, फूल और दीया रंगोली, लिपन कला में सीडी सजावट, हाथ से पेंट दीये, हुला हूप झूमर सहित तमाम सजावटी सामान की बाढ़ आई हुई है। लोग इनकी खूब खरीदारी कर रहे हैं।
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दिवाली पर बंदनवार का विशेष महत्व माना जाता है, चूंकि घर के मुख्य द्वार व कमरों के प्रवेश पर इसे लगाने से शुभता आती है। बंदनवार घर के द्वार पर लगने की प्रथा आदिकाल से चली आ रही है। उस समय आम व अशोका के पत्तों, फूलों व वनस्पतियों से घर का द्वार सजाया जाता है। आधुनिकता ने इसका डिजाइन बदल गया है।
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बाजार में विभिन्न आर्टिफिशियल व फाइबर पदार्थों से बने बंदनवार मिल रहे हैं। बाजार में करीब दो से ढाई दर्जन किस्म के बंदनवार उपलब्ध हैं। जो लोगों को आकर्षित कर रहे हैं और लोग इनकी खूब खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में कागज, फाइबर, कपड़ा, ऊन, प्लास्टिक इत्यादि से निर्मित बंदनवार मिल रहे हैं। जिनकी बहुत बड़ी रेंज व दर्जनों किस्में उपलब्ध हैं। इनके डिजाइन, गुणवत्ता, आकार, रंगों इत्यादि में काफी अंतर है। इसके अलावा धोए जा सकने वाले बंदनवार भी उपलब्ध हैं। विक्रेता राजकुमार, मनदीप, राहुल, शुभम, दीपक, सुमन ने बताया कि बाजार में दर्जनों किस्म के बंदनवार उपलब्ध हैं। वे सारा सामान दिल्ली के सदर बाजार से लाते हैं।
दुकानों के बाहर लटती बंदनवार ग्राहकों को खूब लुभा रही है। पिछले कुछ सालों में बंदनवार क्रेज भी बढ़ा है। पहले कागज की फोल्ड होने वाली बंदनवार घरों व दुकानों के दरवाजों पर लगाई जाती थी। इसके बाद झालर वाली बंदनवारों की रौनक बन गई है। अब ऐसे लगभग 20 बड़ी दुकानें व 50 अधिक छोटी बंदनवार की दुकानें है, जो ग्राहकों को खूब लुभा रही हैं। बाजार में घर की सजावट के लिए 15 से ज्यादा डिजाइनों में बंदनवार उपलब्ध है। यह 100 से लेकर दो हजार रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं।
दुकानदार अशोक खुरानियां ने बताया कि दिवाली पर बंदनवारों की मांग अधिक होती है। इससे घर में रौनक दिखाई देती है। इसमें मुख्य तौर पर कपास लैंस, फैंसी स्टोन व अन्य रंगों का इस्तेमाल कर बंदनवार को तैयार किया जाता है। बंदनवारों को घर की सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम व गृह प्रवेश के लिए इस्तेमाल किया जाता है।