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सामान्य बीमारियों को प्राइवेट अस्पतालों में नहीं मिल रहा आयुष्मान का सहारा
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आयुष्मान योजना में जिले में सामान्य बीमारियों का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज नहीं हो पा रहा है। केवल शाह व सिग्रस अस्पताल को छोड़कर पूरे जिले में किसी भी अस्पताल में बुखार, उल्टी, दस्त सहित अन्य बीमारियों का इलाज नहीं हैं। शाह व सिग्रस में भी चुन्निंदा स्थितियों में ही इन बीमारियों का इलाज है। सभी तरह की बीमारियों का इलाज यहां भी नहीं हैं। सामान्य बीमारियों के लिए लोगों को जिला अस्पताल में भटकना पड़ता है। जहां डॉक्टरों की कमी के कारण पहले से ही लोगों का इलाज कराने में दिक्कत हो रही है।
अमर उजाला द्वारा आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाले लाभ की पड़ताल की गई तो पता चला कि प्राइवेट अस्पतालों में केवल चुन्निंदा बीमारियों के ऑपरेशन के लिए ही योजना को जोड़ा गया है। बाकी बीमारियों के लिए यदि आयुष्मान योजना के लिए लाभ उठाना है तो उसके लिए सरकारी अस्पताल में जाना होगा।
बेहोश होने तक नहीं मिलेगा प्राइवेट अस्पताल में डेेंगू का इलाज : पड़ताल में पता चला कि आयुष्मान योजना के तहत डेंगू का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में उस स्थिति तक उपलब्ध नहीं है, जब तक की मरीज बेहोश ना हो जाए। यह भी केवल सिग्रस व शाह अस्पताल में है। यदि इसका इलाज करवाना है तो सरकारी अस्पताल में जाना होगा। जहां डॉक्टरों की संख्या काफी कम है और प्राइवेट में करवाना होगा तो इसके लिए भुगतान करना होगा। इसके अलावा यदि शरीर में कोई गांठ है तो इसका ऑपरेशन करवाने के लिए मरीज को केवल सरकारी अस्पताल में ही जाना होगा।
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प्रसव के दौरान नहीं कर सकते ऑपरेशन : यदि कोई गर्भवती महिला प्राइवेट अस्पताल में है। उसके प्रसव के दौरान ऑपरेशन से बच्चा पैदा नहीं हो सकता। आयुष्मान योजना के लिए केवल सरकारी अस्पताल को ही प्रसव के दौरान ऑपरेशन से बच्चा पैदा करने के लिए अधिकृत किया गया है। केवल आपात स्थिति में यह सुविधा प्राइवेट अस्पताल में उपलब्ध है। बवासीर के सभी तरह के ऑपरेशनों के लिए प्राइवेट अस्पतालों को अधिकृत नहीं किया गया है। हर्निया के सारे ऑपरेशन प्राइवेट अस्पतालों में इस योजना के तहत नहीं हो सकते।
जिले में इस योजना के तहत आंखों का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज नहीं हो सकता। यह सभी जानकारियां पेनल पर आए 5 अस्पतालों से मिली हैं। अलग-अलग अस्पताल में अलग-अलग तरह की समस्या पाई गई।
बड़े ऑपरेशनों में मिल रहा है फायदा : बड़े ऑपरेशनों में जरूर मरीजों को योजना का लाभ मिल रहा है। शाह अस्पताल, जयप्रकाश, गणपति, जयपुर व सिग्रस अस्पतालों में पथरी, घुटने बदलने सहित कई तरह के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। जिसके लिए सरकार द्वारा भुगतान किया जा रहा है।
योजना के नोडल अधिकारी डा. संदीप जैन ने कहा कि विभाग के नियमानुसार जो भी अस्पताल योजना की शर्तें पूरी करते हैं। उन्हें पैनल पर लिया गया है। इसके अलावा जो भी बीमारियां बचती हैं, उनका सरकारी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
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अमर उजाला द्वारा आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाले लाभ की पड़ताल की गई तो पता चला कि प्राइवेट अस्पतालों में केवल चुन्निंदा बीमारियों के ऑपरेशन के लिए ही योजना को जोड़ा गया है। बाकी बीमारियों के लिए यदि आयुष्मान योजना के लिए लाभ उठाना है तो उसके लिए सरकारी अस्पताल में जाना होगा।
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बेहोश होने तक नहीं मिलेगा प्राइवेट अस्पताल में डेेंगू का इलाज : पड़ताल में पता चला कि आयुष्मान योजना के तहत डेंगू का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में उस स्थिति तक उपलब्ध नहीं है, जब तक की मरीज बेहोश ना हो जाए। यह भी केवल सिग्रस व शाह अस्पताल में है। यदि इसका इलाज करवाना है तो सरकारी अस्पताल में जाना होगा। जहां डॉक्टरों की संख्या काफी कम है और प्राइवेट में करवाना होगा तो इसके लिए भुगतान करना होगा। इसके अलावा यदि शरीर में कोई गांठ है तो इसका ऑपरेशन करवाने के लिए मरीज को केवल सरकारी अस्पताल में ही जाना होगा।
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प्रसव के दौरान नहीं कर सकते ऑपरेशन : यदि कोई गर्भवती महिला प्राइवेट अस्पताल में है। उसके प्रसव के दौरान ऑपरेशन से बच्चा पैदा नहीं हो सकता। आयुष्मान योजना के लिए केवल सरकारी अस्पताल को ही प्रसव के दौरान ऑपरेशन से बच्चा पैदा करने के लिए अधिकृत किया गया है। केवल आपात स्थिति में यह सुविधा प्राइवेट अस्पताल में उपलब्ध है। बवासीर के सभी तरह के ऑपरेशनों के लिए प्राइवेट अस्पतालों को अधिकृत नहीं किया गया है। हर्निया के सारे ऑपरेशन प्राइवेट अस्पतालों में इस योजना के तहत नहीं हो सकते।
जिले में इस योजना के तहत आंखों का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज नहीं हो सकता। यह सभी जानकारियां पेनल पर आए 5 अस्पतालों से मिली हैं। अलग-अलग अस्पताल में अलग-अलग तरह की समस्या पाई गई।
बड़े ऑपरेशनों में मिल रहा है फायदा : बड़े ऑपरेशनों में जरूर मरीजों को योजना का लाभ मिल रहा है। शाह अस्पताल, जयप्रकाश, गणपति, जयपुर व सिग्रस अस्पतालों में पथरी, घुटने बदलने सहित कई तरह के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। जिसके लिए सरकार द्वारा भुगतान किया जा रहा है।
योजना के नोडल अधिकारी डा. संदीप जैन ने कहा कि विभाग के नियमानुसार जो भी अस्पताल योजना की शर्तें पूरी करते हैं। उन्हें पैनल पर लिया गया है। इसके अलावा जो भी बीमारियां बचती हैं, उनका सरकारी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।