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Kaithal News: 100 वर्ष बाद फिर शुरू हुई कपिल मुनि तीर्थ की आरती
Sat, 29 Aug 2026 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 29 Aug 2026 12:50 AM IST
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संध्या आरती में मुख्य यजमान के तौर पर मौजूद पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री कपिल मुनि तीर्थ पर संध्या आरती का सिलसिला करीब 100 वर्ष बाद फिर शुरू होने से श्रद्धालुओं में उत्साह है। कपिल मुनि तीर्थ कमेटी के प्रयासों से शुरू हुई आरती में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और यजमान इस धार्मिक आयोजन से जुड़ रहे हैं।
शुक्रवार को पूर्व राज्य मंत्री कमलेश ढांडा ने कपिल मुनि तीर्थ पर आयोजित संध्या आरती में मुख्य यजमान के रूप में भाग लिया। इससे पहले उन्होंने तीर्थ कमेटी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय भगवान कपिल मुनि सांख्य दर्शन कथा में भी सहभागिता की। मंदिर के पुजारी संजय गौतम, अनिरुद्ध गौतम और वृंदावन से पहुंचे कथा व्यास सत्य नारायण ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती करवाई।
कमलेश ढांडा ने कहा कि करीब 100 वर्ष बाद आरती की परंपरा को दोबारा शुरू करना सनातन संस्कृति और धार्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इसी पावन धरा पर भगवान कपिल मुनि ने माता देवहूति को सांख्य दर्शन का ज्ञान दिया था। ऐसे में कपिल मुनि तीर्थ का आध्यात्मिक महत्व बेहद विशेष है।
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कलायत। श्री कपिल मुनि तीर्थ पर संध्या आरती का सिलसिला करीब 100 वर्ष बाद फिर शुरू होने से श्रद्धालुओं में उत्साह है। कपिल मुनि तीर्थ कमेटी के प्रयासों से शुरू हुई आरती में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और यजमान इस धार्मिक आयोजन से जुड़ रहे हैं।
शुक्रवार को पूर्व राज्य मंत्री कमलेश ढांडा ने कपिल मुनि तीर्थ पर आयोजित संध्या आरती में मुख्य यजमान के रूप में भाग लिया। इससे पहले उन्होंने तीर्थ कमेटी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय भगवान कपिल मुनि सांख्य दर्शन कथा में भी सहभागिता की। मंदिर के पुजारी संजय गौतम, अनिरुद्ध गौतम और वृंदावन से पहुंचे कथा व्यास सत्य नारायण ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती करवाई।
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कमलेश ढांडा ने कहा कि करीब 100 वर्ष बाद आरती की परंपरा को दोबारा शुरू करना सनातन संस्कृति और धार्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इसी पावन धरा पर भगवान कपिल मुनि ने माता देवहूति को सांख्य दर्शन का ज्ञान दिया था। ऐसे में कपिल मुनि तीर्थ का आध्यात्मिक महत्व बेहद विशेष है।
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