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मिड डे मील योजना को पंचायतों के अधीन करने के विरोध में वर्कर उतरी सड़को पर
Updated Fri, 30 Jun 2017 12:36 AM IST
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मिड डे मील योजना को पंचायतों के अधीन करने के विरोध में सड़क पर उतरीं वर्कर्स
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन ने समस्याओं को लेकर वीरवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान जिलेभर की मिड डे मिल वर्कर जवाहर पार्क में एकत्रित हुई। जहां से सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंची। वर्कर्स ने यहां डीसी को ज्ञापन दिया। प्रदर्शन की अध्यक्षता मिड डे मील वर्कर यूनियन की जिला प्रधान सरोज बाला ने की।
सरोज बाला ने कहा कि प्रदेश सरकार मिड डे मील योजना को पंचायतों के अधीन करने जा रही है। अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने 16 मई को संशोधन पारित किया है। संशोधन के तहत शहर ही नहीं, जिन गांव में सड़क सुविधा है, वहां केंद्रीय रसोई घर शुरू किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मिड डे मील वर्कर का विरोध करती हैं। यह संशोधन योजना के ठेकाकरण की दिशा में सरकार द्वारा उठाया गया कदम है। सरकार ने योजना को पंचायतों को देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो बहुत ही घातक है। सरकार ऐसा करके गरीब महिलाओं के छोटे से रोजगार पर लात मारने की तैयारी कर रही है। जिससे किसी भी रूप में सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि 2 जनवरी को सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया था कि मिड डे मील वर्कर के मानदेय में बढ़ोतरी की जाएगी, लेकिन सरकार ने उनके वेतन में बढ़ोतरी न करके वादा खिलाफी की है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मिड-डे मील योजना को पंचायतों को न देने, केंद्रीय रसोईघरों के बारे में 16 मई 2017 नोटिफिकेशन को रद करने, वर्कर के मानदेय में बढ़ोतरी करने, वर्कर के रोजगार को स्थाई करने, हटाई गई वर्करों को वापस काम पर लेने, सभी वर्करों को 18000 रुपये न्यूनतम वेतन देने, वर्कर को दो ड्रेस व वेतन सहित प्रसूति लाभ देने तथा स्वयं सहायता समूहों की अनिवार्यता बंद करने की मांग की। इस अवसर पर सीटू के राज्य सचिव एवं जिला अध्यक्ष सत्यवान, सचिव अशोक शर्मा, धूपसिंह, ऋतु शर्मा क्योडक़, कविता मुंदडी, सुदेश गुलियाना, राजो शिमला, सरोज भानपुरा, सुनीता पाई, हरभजन कोर पूंडरी, रीटा देवी व यूनियन की अन्य महिलाएं मौजूद रही।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन ने समस्याओं को लेकर वीरवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान जिलेभर की मिड डे मिल वर्कर जवाहर पार्क में एकत्रित हुई। जहां से सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंची। वर्कर्स ने यहां डीसी को ज्ञापन दिया। प्रदर्शन की अध्यक्षता मिड डे मील वर्कर यूनियन की जिला प्रधान सरोज बाला ने की।
सरोज बाला ने कहा कि प्रदेश सरकार मिड डे मील योजना को पंचायतों के अधीन करने जा रही है। अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने 16 मई को संशोधन पारित किया है। संशोधन के तहत शहर ही नहीं, जिन गांव में सड़क सुविधा है, वहां केंद्रीय रसोई घर शुरू किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मिड डे मील वर्कर का विरोध करती हैं। यह संशोधन योजना के ठेकाकरण की दिशा में सरकार द्वारा उठाया गया कदम है। सरकार ने योजना को पंचायतों को देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो बहुत ही घातक है। सरकार ऐसा करके गरीब महिलाओं के छोटे से रोजगार पर लात मारने की तैयारी कर रही है। जिससे किसी भी रूप में सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि 2 जनवरी को सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया था कि मिड डे मील वर्कर के मानदेय में बढ़ोतरी की जाएगी, लेकिन सरकार ने उनके वेतन में बढ़ोतरी न करके वादा खिलाफी की है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मिड-डे मील योजना को पंचायतों को न देने, केंद्रीय रसोईघरों के बारे में 16 मई 2017 नोटिफिकेशन को रद करने, वर्कर के मानदेय में बढ़ोतरी करने, वर्कर के रोजगार को स्थाई करने, हटाई गई वर्करों को वापस काम पर लेने, सभी वर्करों को 18000 रुपये न्यूनतम वेतन देने, वर्कर को दो ड्रेस व वेतन सहित प्रसूति लाभ देने तथा स्वयं सहायता समूहों की अनिवार्यता बंद करने की मांग की। इस अवसर पर सीटू के राज्य सचिव एवं जिला अध्यक्ष सत्यवान, सचिव अशोक शर्मा, धूपसिंह, ऋतु शर्मा क्योडक़, कविता मुंदडी, सुदेश गुलियाना, राजो शिमला, सरोज भानपुरा, सुनीता पाई, हरभजन कोर पूंडरी, रीटा देवी व यूनियन की अन्य महिलाएं मौजूद रही।
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