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Kaithal News: 100 गज के प्लॉट का झांसा देकर 85 वर्षीय बुजुर्ग से धोखाधड़ी, भतीजे पर प्राथमिकी दर्ज
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कैथल। कलायत थाना पुलिस ने 100 गज के प्लॉट का झांसा देकर 85 वर्षीय बुजुर्ग से धोखाधड़ी करने के आरोप में भतीजे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस को दी शिकायत में कलायत के वार्ड नंबर-1 निवासी देशराज ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से लुधियाना में अपने छोटे बेटे विजेश शर्मा के साथ रह रहे हैं। 1 जनवरी 2024 को उनका भतीजा प्रवीण कुमार उनके पास आया और परिवार की बिना रास्ते वाली जमीन बेचकर उसके बदले कलायत में 100 गज का प्लॉट दिलाने का भरोसा दिया।
रिश्ते पर विश्वास कर उन्होंने प्रवीण की ओर से दिए गए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए जिसके आधार पर उनकी जमीन बेच दी गई।
इकरारनामा में मिली कई अनियमितताएं
शिकायत के अनुसार, 4 जनवरी 2024 को प्रवीण कुमार ने बड़सीकरी निवासी नरेश कुमार के साथ पांच लाख रुपये में 100 गज के प्लॉट का इकरारनामा तैयार कराया। इसमें दो लाख रुपये एडवांस चेक से दिए जाने और शेष तीन लाख रुपये रजिस्ट्री के समय देने का उल्लेख था। बाद में दस्तावेजों की जांच में पता चला कि इकरारनामा न तो नोटरी से सत्यापित था और न ही तहसील में पंजीकृत। उस पर क्रेता और विक्रेता के फोटो भी नहीं लगे थे। इसके बावजूद रिश्तेदारी के भरोसे उन्होंने आरोपी पर विश्वास बनाए रखा।
रजिस्ट्री टालता रहा आरोपी, आधार कार्ड भी निकला फर्जी
रजिस्ट्री की निर्धारित तिथि 10 मई 2024 से एक दिन पहले बेटे ने प्रवीण कुमार से संपर्क कर शेष तीन लाख रुपये तैयार होने की जानकारी दी। आरोप है कि प्रवीण ने रजिस्ट्री एक माह बाद कराने की बात कहकर टाल दी। बाद में भी वह भरोसा दिलाता रहा कि नरेश कुमार और गवाह सतबीर उसके परिचित हैं और रजिस्ट्री कराने की जिम्मेदारी उसकी है। कुछ समय बाद उसने फोन उठाना भी बंद कर दिया। जांच के दौरान नरेश कुमार का आधार कार्ड नंबर भी फर्जी पाया गया जिसके बाद पीड़ित को धोखाधड़ी का संदेह हुआ और पुलिस में शिकायत दी गई।
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पुलिस ने शुरू की जांच
डीएसपी रोहताश कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपी प्रवीण कुमार के खिलाफ मामले की जांच शुरू कर दी है।
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रिश्ते पर विश्वास कर उन्होंने प्रवीण की ओर से दिए गए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए जिसके आधार पर उनकी जमीन बेच दी गई।
इकरारनामा में मिली कई अनियमितताएं
शिकायत के अनुसार, 4 जनवरी 2024 को प्रवीण कुमार ने बड़सीकरी निवासी नरेश कुमार के साथ पांच लाख रुपये में 100 गज के प्लॉट का इकरारनामा तैयार कराया। इसमें दो लाख रुपये एडवांस चेक से दिए जाने और शेष तीन लाख रुपये रजिस्ट्री के समय देने का उल्लेख था। बाद में दस्तावेजों की जांच में पता चला कि इकरारनामा न तो नोटरी से सत्यापित था और न ही तहसील में पंजीकृत। उस पर क्रेता और विक्रेता के फोटो भी नहीं लगे थे। इसके बावजूद रिश्तेदारी के भरोसे उन्होंने आरोपी पर विश्वास बनाए रखा।
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रजिस्ट्री टालता रहा आरोपी, आधार कार्ड भी निकला फर्जी
रजिस्ट्री की निर्धारित तिथि 10 मई 2024 से एक दिन पहले बेटे ने प्रवीण कुमार से संपर्क कर शेष तीन लाख रुपये तैयार होने की जानकारी दी। आरोप है कि प्रवीण ने रजिस्ट्री एक माह बाद कराने की बात कहकर टाल दी। बाद में भी वह भरोसा दिलाता रहा कि नरेश कुमार और गवाह सतबीर उसके परिचित हैं और रजिस्ट्री कराने की जिम्मेदारी उसकी है। कुछ समय बाद उसने फोन उठाना भी बंद कर दिया। जांच के दौरान नरेश कुमार का आधार कार्ड नंबर भी फर्जी पाया गया जिसके बाद पीड़ित को धोखाधड़ी का संदेह हुआ और पुलिस में शिकायत दी गई।
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पुलिस ने शुरू की जांच
डीएसपी रोहताश कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपी प्रवीण कुमार के खिलाफ मामले की जांच शुरू कर दी है।