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ीसी ने लिया सिटी स्कवॉयर मामले में संज्ञान
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डीसी ने सिटी स्क्वायर मामले में लिया संज्ञान, अब एडीसी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
- नप हाउस द्वारा पारित किए गए काम रोको प्रस्ताव के बाद डीसी ने संबंधित पक्षों को किया तलब, 30 जनवरी को तत्कालीन अधिकारियों को भी बुलाया
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। करीब 35 करोड़ रुपये के सिटी स्क्वायर मामले में डीसी धर्मबीर सिंह ने संज्ञान लेते हुए सोमवार को संबंधित पक्षों के साथ बैठक की। उन्होंने जानकारी हासिल की कि नगर परिषद हाउस की बैठक में काम रोकने, एफआईआर दर्ज करवाने सहित कई तरह के प्रस्ताव किस कारण पारित हुए। कहां गड़बड़ी हुई है। डीसी ने अब इस मामले में 30 जनवरी को फिर से बैठक बुलाई है और संबंधित अधिकारियों को तलब किया है। तब तक एडीसी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर मामले की पूरी जांच करने के निर्देश जारी किए हैं। इस कमेटी में एडीसी के अलावा हुडा के एक्सईएन और समग्र शिक्षा विभाग के अकाउंटेंट को शामिल किया गया है।
विदित रहे कि नगर परिषद कैथल की हाउस की बैठक में 11 जनवरी को प्रस्ताव पारित किया गया था कि सिटी स्क्वायर मामले में अधिकारियों ने चूंकि करोड़ों रुपये की अदायगी में अपनी गलती मान ली है। इसलिए सिटी स्क्वायर प्रोजेक्ट का काम रोका जाए। दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही इस मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभाग के डायरेक्टर को लिखा जाए। अभी तक इस प्रस्ताव की मिनिट्स डीसी तक नहीं पहुंची हैं। लेकिन डीसी ने बैठक बुलाकर संबंधित पक्षों से जानकारी हासिल की। डीसी ने बताया कि उन्होंने सोमवार को मामले में नगर परिषद चेयरपर्सन, ठेकेदार, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों सहित इस मामले से जुड़े लोगों को बुलाकर बैठक की।
डीसी ने नप अधिकारियों से पूछे ये सवाल : डीसी ने अधिकारियों से पूछा कि हाउस की बैठक में इस तरह के प्रस्ताव क्यों पारित हुए? वर्क ऑर्डर काम शुरू होने के बाद क्यों जारी किया गया? पाइल्स की टेस्टिंग रिपोर्ट अप्रूव हुए बिना भुगतान क्यों किया गया? एमई के रहते हुए एडीशनल एमई क्यों नियुक्त किया गया? इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि हाउस की बैठक में पार्षदों ने उन्हें बोलने तक नहीं दिया। उन्हें सफाई तक का मौका नहीं मिला। इस पर डीसी ने कहा कि पार्षद एकमत किसी न किसी मुद्दे पर तो हुए होंगे। उसका जवाब दें। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में अधिकारी अपनी स्थिति स्पष्ट करें। ताकि नियमानुसार आगे कार्रवाई हो सके।
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- नप हाउस द्वारा पारित किए गए काम रोको प्रस्ताव के बाद डीसी ने संबंधित पक्षों को किया तलब, 30 जनवरी को तत्कालीन अधिकारियों को भी बुलाया
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। करीब 35 करोड़ रुपये के सिटी स्क्वायर मामले में डीसी धर्मबीर सिंह ने संज्ञान लेते हुए सोमवार को संबंधित पक्षों के साथ बैठक की। उन्होंने जानकारी हासिल की कि नगर परिषद हाउस की बैठक में काम रोकने, एफआईआर दर्ज करवाने सहित कई तरह के प्रस्ताव किस कारण पारित हुए। कहां गड़बड़ी हुई है। डीसी ने अब इस मामले में 30 जनवरी को फिर से बैठक बुलाई है और संबंधित अधिकारियों को तलब किया है। तब तक एडीसी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर मामले की पूरी जांच करने के निर्देश जारी किए हैं। इस कमेटी में एडीसी के अलावा हुडा के एक्सईएन और समग्र शिक्षा विभाग के अकाउंटेंट को शामिल किया गया है।
विदित रहे कि नगर परिषद कैथल की हाउस की बैठक में 11 जनवरी को प्रस्ताव पारित किया गया था कि सिटी स्क्वायर मामले में अधिकारियों ने चूंकि करोड़ों रुपये की अदायगी में अपनी गलती मान ली है। इसलिए सिटी स्क्वायर प्रोजेक्ट का काम रोका जाए। दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही इस मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभाग के डायरेक्टर को लिखा जाए। अभी तक इस प्रस्ताव की मिनिट्स डीसी तक नहीं पहुंची हैं। लेकिन डीसी ने बैठक बुलाकर संबंधित पक्षों से जानकारी हासिल की। डीसी ने बताया कि उन्होंने सोमवार को मामले में नगर परिषद चेयरपर्सन, ठेकेदार, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों सहित इस मामले से जुड़े लोगों को बुलाकर बैठक की।
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डीसी ने नप अधिकारियों से पूछे ये सवाल : डीसी ने अधिकारियों से पूछा कि हाउस की बैठक में इस तरह के प्रस्ताव क्यों पारित हुए? वर्क ऑर्डर काम शुरू होने के बाद क्यों जारी किया गया? पाइल्स की टेस्टिंग रिपोर्ट अप्रूव हुए बिना भुगतान क्यों किया गया? एमई के रहते हुए एडीशनल एमई क्यों नियुक्त किया गया? इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि हाउस की बैठक में पार्षदों ने उन्हें बोलने तक नहीं दिया। उन्हें सफाई तक का मौका नहीं मिला। इस पर डीसी ने कहा कि पार्षद एकमत किसी न किसी मुद्दे पर तो हुए होंगे। उसका जवाब दें। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में अधिकारी अपनी स्थिति स्पष्ट करें। ताकि नियमानुसार आगे कार्रवाई हो सके।
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