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टमाटर की लाली ने बिगाड़ा लोगों का जायका
Updated Wed, 26 Jul 2017 12:20 AM IST
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टमाटर की ‘लाली’ ने बिगाड़ा लोगों का जायका
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। हिमाचल प्रदेश से आ रहे टमाटर में कमी और अभी महाराष्ट्र के टमाटर की आवक न होने के कारण पंद्रह दिनों में टमाटर की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई हैं। करीब पंद्रह दिन पूर्व ये 30 रुपये प्रति किलो थीं। जो आज 70 से 80 रुपये प्रति किलो की दर पर पहुंच गई हैं। जिस कारण खाने में तड़के का स्वाद बिगड़ गया है। रसोई में गृहणियां दूसरे विकल्पों पर विचार कर रही हैं। वहीं बढ़ी हुई कीमतों का दुकानदारों को भी नुकसान हो रहा है।
30 रुपये का आया उछाल
आढ़ती राजकुमार ने बताया कि करीब पंद्रह दिन पहले टमाटर महज 30 रुपये था। अब केवल हिमाचल प्रदेश अकेला उत्तर भारत की डिमांड पूरी कर रहा है। मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिस कारण टमाटर की मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि टमाटर के दामों ने सीधा 50 रुपये की उछाल लगाई है। जिससे न केवल ग्राहकों को बल्कि आढ़तियों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
10 से 12 किलो टमाटर होते खराब
दुकानदार राकेश ने बताया कि टमाटरों के मंहगे होने के कारण दुकानदारों का मुनाफा भी कम हुआ है। उसने बताया कि टमाटरों की एक कैरेट 15 सौ से 17 सौ रुपये में आती है। जिसमें 50 किलो टमाटर होते है। लेकिन इसमें से भी 10 से 12 किलो टमाटर खराब हो जाते है।
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दूसरे खाद्य पदार्थों का प्रयोग करने लगे
ग्राहक चतर सिंह ने बताया कि टमाटर के दाम बढ़ने के बाद इससे खरीदने का मन ही नहीं करता। जिस कारण अब सब्जी के तड़के में टमाटर के अलावा दूसरे खाद्य पदार्थों का प्रयोग करने लगे है।
पिछले दो महीनों से सब्जी में नहीं डाले टमाटर
सब्जी मंडी में खरीदारी करने आई गृहणी राजरानी ने बताया कि वह मजदूरी करके तीन सौ रुपये एक दिन में कमाती है। जब सब्जी को तड़का लगाने वाला टमाटर ही 70 से 80 रुपये प्रति किलो हो गया है। ऐसे में गरीबों पर मंहगाई की मार पड़ी है। उसने बताया कि उसने पिछले दो महीने से टमाटर सब्जी में ही नहीं डाला।
टमाटर की जगह लगा रही जीरे का तड़का
गृहणी बबली ने बताया कि टमाटर के मंहगे होने के कारण वह सब्जी में टमाटर के तडक़े के अलावा जीरे का तडक़ा लगा रही है। उसने बताया कि अभी तक वह आचार का तड़क ही लगा रही थी। मजबूरी में ऐसा करना पड़ रहा है।
मंहगाई के चलते आम आदमी का जीना मुहाल
गृहिणी सुदेश ने बताया कि टमाटरों की महंगाई के चलते आम आदमी का जीना मुहाल चुका है। महंगाई बढ़ने के कारण गरीब आदमी के घरों में चूल्हा भी मुश्किल से जल पाता है। कभी गरीब पर सब्जियों के मंहगे होने की मार होती है तो कभी सब्जियों लगने वाले तड़के में डलने वाले चीजों की महंगाई से रसाई का जायका खराब होता है।
नासिक से टमाटर की आवक के बाद मिल सकती है राहत
व्यापारियों का कहना है कि नासिक से टमाटर की आवक होने पर ही टमाटर की महंगाई से निजात मिल सकती है। उम्मीद है यह आवक जल्द शुरू हो जाए। साथ ही स्थानीय स्तर पर भी टमाटर का सीजन नहीं है।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई दुकानदार किसी तरह की अनावश्यक स्टोरेज न करे। लोगों को जरूरत अनुसार एवं आपूर्ति के हिसाब से खाद्य सामग्री मिलती रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। हिमाचल प्रदेश से आ रहे टमाटर में कमी और अभी महाराष्ट्र के टमाटर की आवक न होने के कारण पंद्रह दिनों में टमाटर की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई हैं। करीब पंद्रह दिन पूर्व ये 30 रुपये प्रति किलो थीं। जो आज 70 से 80 रुपये प्रति किलो की दर पर पहुंच गई हैं। जिस कारण खाने में तड़के का स्वाद बिगड़ गया है। रसोई में गृहणियां दूसरे विकल्पों पर विचार कर रही हैं। वहीं बढ़ी हुई कीमतों का दुकानदारों को भी नुकसान हो रहा है।
30 रुपये का आया उछाल
आढ़ती राजकुमार ने बताया कि करीब पंद्रह दिन पहले टमाटर महज 30 रुपये था। अब केवल हिमाचल प्रदेश अकेला उत्तर भारत की डिमांड पूरी कर रहा है। मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिस कारण टमाटर की मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि टमाटर के दामों ने सीधा 50 रुपये की उछाल लगाई है। जिससे न केवल ग्राहकों को बल्कि आढ़तियों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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10 से 12 किलो टमाटर होते खराब
दुकानदार राकेश ने बताया कि टमाटरों के मंहगे होने के कारण दुकानदारों का मुनाफा भी कम हुआ है। उसने बताया कि टमाटरों की एक कैरेट 15 सौ से 17 सौ रुपये में आती है। जिसमें 50 किलो टमाटर होते है। लेकिन इसमें से भी 10 से 12 किलो टमाटर खराब हो जाते है।
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दूसरे खाद्य पदार्थों का प्रयोग करने लगे
ग्राहक चतर सिंह ने बताया कि टमाटर के दाम बढ़ने के बाद इससे खरीदने का मन ही नहीं करता। जिस कारण अब सब्जी के तड़के में टमाटर के अलावा दूसरे खाद्य पदार्थों का प्रयोग करने लगे है।
पिछले दो महीनों से सब्जी में नहीं डाले टमाटर
सब्जी मंडी में खरीदारी करने आई गृहणी राजरानी ने बताया कि वह मजदूरी करके तीन सौ रुपये एक दिन में कमाती है। जब सब्जी को तड़का लगाने वाला टमाटर ही 70 से 80 रुपये प्रति किलो हो गया है। ऐसे में गरीबों पर मंहगाई की मार पड़ी है। उसने बताया कि उसने पिछले दो महीने से टमाटर सब्जी में ही नहीं डाला।
टमाटर की जगह लगा रही जीरे का तड़का
गृहणी बबली ने बताया कि टमाटर के मंहगे होने के कारण वह सब्जी में टमाटर के तडक़े के अलावा जीरे का तडक़ा लगा रही है। उसने बताया कि अभी तक वह आचार का तड़क ही लगा रही थी। मजबूरी में ऐसा करना पड़ रहा है।
मंहगाई के चलते आम आदमी का जीना मुहाल
गृहिणी सुदेश ने बताया कि टमाटरों की महंगाई के चलते आम आदमी का जीना मुहाल चुका है। महंगाई बढ़ने के कारण गरीब आदमी के घरों में चूल्हा भी मुश्किल से जल पाता है। कभी गरीब पर सब्जियों के मंहगे होने की मार होती है तो कभी सब्जियों लगने वाले तड़के में डलने वाले चीजों की महंगाई से रसाई का जायका खराब होता है।
नासिक से टमाटर की आवक के बाद मिल सकती है राहत
व्यापारियों का कहना है कि नासिक से टमाटर की आवक होने पर ही टमाटर की महंगाई से निजात मिल सकती है। उम्मीद है यह आवक जल्द शुरू हो जाए। साथ ही स्थानीय स्तर पर भी टमाटर का सीजन नहीं है।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई दुकानदार किसी तरह की अनावश्यक स्टोरेज न करे। लोगों को जरूरत अनुसार एवं आपूर्ति के हिसाब से खाद्य सामग्री मिलती रहे।