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बीएड कॉलेजों मेें 70 प्रतिशत सीटें खालीं
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Mon, 31 Aug 2015 11:37 PM IST
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बीएड कोर्स के लिए दो वर्ष की सीमा करने के बाद अब इसे करने वाले युवाओं की संख्या में जबरदस्त कमी आई है। दो चरणों की काउंसलिंग के बाद अभी तक केवल 30 प्रतिशत सीटें ही भर सकी हैं।
ऐसे में निजी बीएड कॉलेज संचालकों की नींद उड़ी हुई है।
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से बीएड कोर्स एक से बढ़ाकर दो वर्ष का करने से विद्यार्थियों को एक साल अधिक देेने के साथ दोगुनी फीस जमा करानी होगी।
इस कारण युवा अब बीएड की बनिस्पत अन्य कोर्सों की ओर अधिक रुचि ले रहे हैं।
70 प्रतिशत सीटें खाली
जिले के कुल 15 बीएड कॉलेजों में बीएड की 1900 सीटें हैं। दो चरण की काउंसलिंग होने के बाद अभी तक केवल 569 सीटें भरी जा सकी हैं।
अगर ऐसा हाल रहा तो कॉलेजों में बीएड के छात्रों की संख्या नाममात्र की रह जाएगी। इससे कॉलेजों को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ेगा।
कई कॉलेज हो सकते हैं बंद
विशेषज्ञों की मानें तो विद्यार्थी नहीं होने के कारण इस बार कई कॉलेज बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। प्रदेश के किसी भी कॉलेज में अभी तक शत प्रतिशत सीटें पूरी नहीं हुई है।
प्रदेश में महिला तुलसी कॉलेज ऑफ एजुकेशन अंबाला में सबसे अधिक 128 सीटें भरी हैं। इसके बाद प्रदेश में दूसरे नंबर पर आरकेएसडी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 118 सीटों पर विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है।
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कैथल जिले में बीएड के 15 कॉलेजों की स्थिति
1. आरकेएसडी कॉलेज सीटें 200 में से 118 सीटें पर दाखिला हुआ है।
2. चौधरी ईश्वर सिंह महिला शिक्षण महाविद्यालय में 200 में से केवल 15 सीटों पर दाखिला हुआ है।
3. सरस्वती देवी मैमोरियल कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 200 में से केवल 34 सीटों पर दाखिला हुआ है।
4. श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन कैथल में 200 सीटों में से 75 सीटों पर दाखिला हुआ है।
5. एसएसएम कॉलेज ऑफ एजुकेशन कलायत में 100 सीटों में से 37 पर दाखिला हुआ है।
6. सरस्वती कॉलेज ऑफ एजुकेशन टीक में 100 सीटों में से केवल 5 सीटों पर दाखिला हुआ है।
7. बीपीआर कॉलेज ढांड में 100 सीटों में से 28 सीटों पर दाखिला हुआ है।
8. यूनाईटेड कॉलेज ऑफ एजुकेशन कौल में 100 सीटों में से केवल पांच सीटों पर दाखिला हुआ है।
9. जाट कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 100 सीटों में से 51 सीटों पर दाखिला हुआ है।
10. किठाना कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 100 सीटों में से 29 सीटों पर दाखिला हुआ है।
11. एमडीएन कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 100 सीटों में 55 सीटों पर दाखिला हुआ है।
12. बाबू अंतराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन कौल में 100 सीटों में से 30 सीटों पर दाखिला हुआ है।
13. श्री साईबाबा कॉलेज ऑफ एजुकेशन सीवन में 100 सीटों में से 36 सीटों पर दाखिला हुआ है।
14. महाराजा अग्रसैन कॉलेज पूंडरी में 100 सीटों में से 33 सीटों पर दाखिला हुआ है।
15. रामा कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 100 सीटों में से 18 सीटों पर दाखिला हुआ है।
कॉलेज के नाम पर चल रही है कई दुकानें
जिले के कुछ बीएड कॉलेजों में नाम ही चलता है। इन कॉलेजों में विद्यार्थियों की कक्षाएं नाममात्र ही होती हैं। कॉलेज में अध्यापक, प्रिंसिपल, कर्मचारी, सहित सब कुछ कागजों में है।
ये कॉलेज विद्यार्थियों को नॉन अटेंडिंग के लिए अलग से पैसा लेते हैं। जिसके नियमित कक्षाएं लगाने वाले कॉलेजों को इसका नुकसान होता है।
हरियाणा एजुकेशन कॉलेज टीचर एसोसिशन के महासचिव राजेन्द्र ढुल ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को नॉन अटेंडिंग दाखिला देने वाले कॉलेजों पर नकेल कसनी चाहिए।
परिषद को समय-समय पर विद्यार्थियों की हाजिरी पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कई विद्यार्थियों को दाखिला लेने के बाद यह भी नहीं पता होता है कि उसका कॉलेज कौन-सा है।
दो वर्ष में की बीएड करने के लिए विद्यार्थियों को जो फीस अधिक होगी। उसको भी ध्यान में रखना अनिवार्य है।
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ऐसे में निजी बीएड कॉलेज संचालकों की नींद उड़ी हुई है।
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से बीएड कोर्स एक से बढ़ाकर दो वर्ष का करने से विद्यार्थियों को एक साल अधिक देेने के साथ दोगुनी फीस जमा करानी होगी।
इस कारण युवा अब बीएड की बनिस्पत अन्य कोर्सों की ओर अधिक रुचि ले रहे हैं।
70 प्रतिशत सीटें खाली
जिले के कुल 15 बीएड कॉलेजों में बीएड की 1900 सीटें हैं। दो चरण की काउंसलिंग होने के बाद अभी तक केवल 569 सीटें भरी जा सकी हैं।
अगर ऐसा हाल रहा तो कॉलेजों में बीएड के छात्रों की संख्या नाममात्र की रह जाएगी। इससे कॉलेजों को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ेगा।
कई कॉलेज हो सकते हैं बंद
विशेषज्ञों की मानें तो विद्यार्थी नहीं होने के कारण इस बार कई कॉलेज बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। प्रदेश के किसी भी कॉलेज में अभी तक शत प्रतिशत सीटें पूरी नहीं हुई है।
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प्रदेश में महिला तुलसी कॉलेज ऑफ एजुकेशन अंबाला में सबसे अधिक 128 सीटें भरी हैं। इसके बाद प्रदेश में दूसरे नंबर पर आरकेएसडी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 118 सीटों पर विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है।
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कैथल जिले में बीएड के 15 कॉलेजों की स्थिति
1. आरकेएसडी कॉलेज सीटें 200 में से 118 सीटें पर दाखिला हुआ है।
2. चौधरी ईश्वर सिंह महिला शिक्षण महाविद्यालय में 200 में से केवल 15 सीटों पर दाखिला हुआ है।
3. सरस्वती देवी मैमोरियल कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 200 में से केवल 34 सीटों पर दाखिला हुआ है।
4. श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन कैथल में 200 सीटों में से 75 सीटों पर दाखिला हुआ है।
5. एसएसएम कॉलेज ऑफ एजुकेशन कलायत में 100 सीटों में से 37 पर दाखिला हुआ है।
6. सरस्वती कॉलेज ऑफ एजुकेशन टीक में 100 सीटों में से केवल 5 सीटों पर दाखिला हुआ है।
7. बीपीआर कॉलेज ढांड में 100 सीटों में से 28 सीटों पर दाखिला हुआ है।
8. यूनाईटेड कॉलेज ऑफ एजुकेशन कौल में 100 सीटों में से केवल पांच सीटों पर दाखिला हुआ है।
9. जाट कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 100 सीटों में से 51 सीटों पर दाखिला हुआ है।
10. किठाना कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 100 सीटों में से 29 सीटों पर दाखिला हुआ है।
11. एमडीएन कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 100 सीटों में 55 सीटों पर दाखिला हुआ है।
12. बाबू अंतराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन कौल में 100 सीटों में से 30 सीटों पर दाखिला हुआ है।
13. श्री साईबाबा कॉलेज ऑफ एजुकेशन सीवन में 100 सीटों में से 36 सीटों पर दाखिला हुआ है।
14. महाराजा अग्रसैन कॉलेज पूंडरी में 100 सीटों में से 33 सीटों पर दाखिला हुआ है।
15. रामा कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 100 सीटों में से 18 सीटों पर दाखिला हुआ है।
कॉलेज के नाम पर चल रही है कई दुकानें
जिले के कुछ बीएड कॉलेजों में नाम ही चलता है। इन कॉलेजों में विद्यार्थियों की कक्षाएं नाममात्र ही होती हैं। कॉलेज में अध्यापक, प्रिंसिपल, कर्मचारी, सहित सब कुछ कागजों में है।
ये कॉलेज विद्यार्थियों को नॉन अटेंडिंग के लिए अलग से पैसा लेते हैं। जिसके नियमित कक्षाएं लगाने वाले कॉलेजों को इसका नुकसान होता है।
हरियाणा एजुकेशन कॉलेज टीचर एसोसिशन के महासचिव राजेन्द्र ढुल ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को नॉन अटेंडिंग दाखिला देने वाले कॉलेजों पर नकेल कसनी चाहिए।
परिषद को समय-समय पर विद्यार्थियों की हाजिरी पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कई विद्यार्थियों को दाखिला लेने के बाद यह भी नहीं पता होता है कि उसका कॉलेज कौन-सा है।
दो वर्ष में की बीएड करने के लिए विद्यार्थियों को जो फीस अधिक होगी। उसको भी ध्यान में रखना अनिवार्य है।