{"_id":"5a2d7cf34f1c1b74698c0fc4","slug":"61512930547-kaithal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपनों के आशियाने में पड़ गई दरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपनों के आशियाने में पड़ गई दरार
Updated Mon, 11 Dec 2017 12:02 AM IST
विज्ञापन
सपनों के आशियाने में पड़ गई दरार
नसीब सैनी
कैथल।
बीपीएल परिवारों के सपनों के आशियाने में दरार पड़ गई है। गुलमोहर सिटी और सन सिटी में अपने फ्लैट्स देखने पहुंचे लोगों के सपने बिखर गए। अब वे किसी भी सूरत में यहां रहने को तैयार नहीं। 60 से 70 प्रतिशत लोग इन फ्लैट्स को सरेंडर कर रहे हैं।
हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से बीपीएल परिवारों को दिए जाने वाले बीपीएल फ्लैट्स के तीन चरणों में जारी किए गए अलॉटमेंट लेटर मिलने के बाद अपने सपनों के घर का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्हें गुलमोहर सिटी में बनाए गए फ्लैट्स की हालत काफी खस्ता नजर आई। ये दो साल पहले बनकर तैयार हो गए थे। भवन में सीलन, दरारें व झाड़ियां उग आई हैं। जिस कारण पहली नजर में फ्लैट लोगों को पसंद नहीं आ रहे हैं। सप्ताह में वीरवार को ही हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी कैथल पहुंचते हैं तो फ्लैट्स सरेंडर करने वालों की वहां भीड़ उमड़ पड़ती है।
यहां सेक्टर 29 में स्थित गुलमोहर सिटी में करीब 415 फ्लैट्स के लिए बीपीएल परिवारों से वर्ष 2013 में आवेदन मांगे गए थे। उनका ड्रा भी हो गया था। हाउसिंग बोर्ड को 2015 में ये फ्लैट्स तैयार करने थे। ये 2015 में बन तो गए, लेकिन किन्हीं कारणों से अलॉटमेंट में देरी हो गई। पिछले दो साल से नए फ्लैट्स खस्ताहाल में पहुंच गए हैं। हालांकि सन सिटी में सेक्टर 33 में भी करीब 272 फ्लैट्स बनाए गए हैं। यहां कुछ साफ-सफाई है। लेकिन जगह कम होने के कारण लोग यहां भी फ्लैट्स सरेंडर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि साढ़े छह लाख रुपये कैसे खर्च करें, बाहर इतने में 100 गज का अच्छा प्लाट मिल जाएगा।
विज्ञापन
मैं चीका में पंजाब बॉर्डर पर स्थित गांव कम्हेड़ी से आया हूं। यहां आकर पता चला कि यदि बैंक से अब लोन करवाएं तो 13 साल में यह फ्लैट कुल 6 लाख 50 हजार से भी अधिक में पड़ेगा। जबकि पहले 4 लाख 10 या 4.90 लाख रुपये में बताया गया था। एकदम से 2 लाख भरवा रहे हैं। कहां से लाएं इतनी रकम।
सोमा, कम्हेड़ी
फ्लैट्स इतनी खस्ताहाल में हैं कि उन्हें देखते ही कोई भी रिजैक्ट कर दे। मैं भी अपने फ्लैट को सरेंडर कर रहा हूं। जगह काफी कम है। एक बेड भी ठीक से नहीं आ सकता। बीपीएल परिवार हैं तो क्या उनके पास सामान नहीं होता।
सुशील कुमार
इतनी ज्यादा रकम लगाकर भी महज 33 वर्ग फुट में सामान कहां रखेंगे। बीपीएल परिवारों के साथ यह एक भद्दा मजाक है। 78 हजार रुपये पहले भर चुके हैं। अब 2 लाख रुपये ओर मांग रहे हैं। शेष रकम यदि लोन करवाएं तो 2200 रुपये से अधिक की 13 साल मासिक किश्त बन रही है। 6.50 लाख से भी अधिक रुपये में यह फ्लैट पड़ेगा।
राकेश कुमार, कलायत
ये है बजट की स्थिति : ग्राउंड फ्लोर की 4.90 तो प्रथम व द्वितीय तल पर स्थित फ्लैट की कीमत 4.10 लाख रुपये रखी थी। अब इस पर अलग चार्ज बढ़कर 4 लाख 64 हजार रुपये के आस-पास बन रही है। लोग दो किश्तों में 78 हजार रुपये पहले जमा करवा चुके हैं। 1.91 लाख रुपये की राशि अब अलॉटमेंट के बाद जमा करवाई जा रही है। यदि कोई चाहे तो पूरी की पूरी राशि भी जमा करवा सकता है। लेकिन जो बैंक से ऋण ले रहे हैं, उन्हें 9.25 प्रतिशत का ब्याज देना होगा। सरेंडर करने पर 20 हजार के आस-पास नुकसान भी हो रहा है।
लोगों को आवेदन मांगने से पूर्व बताया गया था कि इसमें 33 वर्ग फुट का कवर्ड एरिया मिलेगा। अब इसे वे कम बता रहे हैं। करीब 60 से 70 प्रतिशत लोग सरेंडर कर रहे हैं। जो सरेंडर कर रहे हैं, उनकी पहली किश्त का 50 प्रतिशत काटा जा रहा है। यह विभाग की पॉलिसी है। इसमें मैं कुछ नहीं कर सकते। साफ-सफाई या दरारों का जवाब निर्माण विंग देगी।
रमेश शर्मा, मैनेजर हाउसिंग बोर्ड
सीलन की समस्या पूरे शहर में वातावरण के कारण है। साफ-सफाई या दरारें हैं तो अलॉटमेंट से पूर्व इसे ठीक किया जाएगा। दो साल से फ्लैट बंद पड़े हैं, इस कारण यह स्थिति हो सकती है।
निर्माण विंग में एसडीओ हाउसिंग बोर्ड।
फ्लैग- सरकार ने चार साल पहले निकाला था ड्रा, अलॉटमेंट में हो गए दो साल लेट बदहाल फ्लैट्स को लौटाने को मजबूर बीपीएल परिवार
हेडिंग -
फोटो संख्या-6 से 11
विज्ञापन
नसीब सैनी
कैथल।
बीपीएल परिवारों के सपनों के आशियाने में दरार पड़ गई है। गुलमोहर सिटी और सन सिटी में अपने फ्लैट्स देखने पहुंचे लोगों के सपने बिखर गए। अब वे किसी भी सूरत में यहां रहने को तैयार नहीं। 60 से 70 प्रतिशत लोग इन फ्लैट्स को सरेंडर कर रहे हैं।
हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से बीपीएल परिवारों को दिए जाने वाले बीपीएल फ्लैट्स के तीन चरणों में जारी किए गए अलॉटमेंट लेटर मिलने के बाद अपने सपनों के घर का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्हें गुलमोहर सिटी में बनाए गए फ्लैट्स की हालत काफी खस्ता नजर आई। ये दो साल पहले बनकर तैयार हो गए थे। भवन में सीलन, दरारें व झाड़ियां उग आई हैं। जिस कारण पहली नजर में फ्लैट लोगों को पसंद नहीं आ रहे हैं। सप्ताह में वीरवार को ही हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी कैथल पहुंचते हैं तो फ्लैट्स सरेंडर करने वालों की वहां भीड़ उमड़ पड़ती है।
विज्ञापन
यहां सेक्टर 29 में स्थित गुलमोहर सिटी में करीब 415 फ्लैट्स के लिए बीपीएल परिवारों से वर्ष 2013 में आवेदन मांगे गए थे। उनका ड्रा भी हो गया था। हाउसिंग बोर्ड को 2015 में ये फ्लैट्स तैयार करने थे। ये 2015 में बन तो गए, लेकिन किन्हीं कारणों से अलॉटमेंट में देरी हो गई। पिछले दो साल से नए फ्लैट्स खस्ताहाल में पहुंच गए हैं। हालांकि सन सिटी में सेक्टर 33 में भी करीब 272 फ्लैट्स बनाए गए हैं। यहां कुछ साफ-सफाई है। लेकिन जगह कम होने के कारण लोग यहां भी फ्लैट्स सरेंडर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि साढ़े छह लाख रुपये कैसे खर्च करें, बाहर इतने में 100 गज का अच्छा प्लाट मिल जाएगा।
विज्ञापन
मैं चीका में पंजाब बॉर्डर पर स्थित गांव कम्हेड़ी से आया हूं। यहां आकर पता चला कि यदि बैंक से अब लोन करवाएं तो 13 साल में यह फ्लैट कुल 6 लाख 50 हजार से भी अधिक में पड़ेगा। जबकि पहले 4 लाख 10 या 4.90 लाख रुपये में बताया गया था। एकदम से 2 लाख भरवा रहे हैं। कहां से लाएं इतनी रकम।
सोमा, कम्हेड़ी
फ्लैट्स इतनी खस्ताहाल में हैं कि उन्हें देखते ही कोई भी रिजैक्ट कर दे। मैं भी अपने फ्लैट को सरेंडर कर रहा हूं। जगह काफी कम है। एक बेड भी ठीक से नहीं आ सकता। बीपीएल परिवार हैं तो क्या उनके पास सामान नहीं होता।
सुशील कुमार
इतनी ज्यादा रकम लगाकर भी महज 33 वर्ग फुट में सामान कहां रखेंगे। बीपीएल परिवारों के साथ यह एक भद्दा मजाक है। 78 हजार रुपये पहले भर चुके हैं। अब 2 लाख रुपये ओर मांग रहे हैं। शेष रकम यदि लोन करवाएं तो 2200 रुपये से अधिक की 13 साल मासिक किश्त बन रही है। 6.50 लाख से भी अधिक रुपये में यह फ्लैट पड़ेगा।
राकेश कुमार, कलायत
ये है बजट की स्थिति : ग्राउंड फ्लोर की 4.90 तो प्रथम व द्वितीय तल पर स्थित फ्लैट की कीमत 4.10 लाख रुपये रखी थी। अब इस पर अलग चार्ज बढ़कर 4 लाख 64 हजार रुपये के आस-पास बन रही है। लोग दो किश्तों में 78 हजार रुपये पहले जमा करवा चुके हैं। 1.91 लाख रुपये की राशि अब अलॉटमेंट के बाद जमा करवाई जा रही है। यदि कोई चाहे तो पूरी की पूरी राशि भी जमा करवा सकता है। लेकिन जो बैंक से ऋण ले रहे हैं, उन्हें 9.25 प्रतिशत का ब्याज देना होगा। सरेंडर करने पर 20 हजार के आस-पास नुकसान भी हो रहा है।
लोगों को आवेदन मांगने से पूर्व बताया गया था कि इसमें 33 वर्ग फुट का कवर्ड एरिया मिलेगा। अब इसे वे कम बता रहे हैं। करीब 60 से 70 प्रतिशत लोग सरेंडर कर रहे हैं। जो सरेंडर कर रहे हैं, उनकी पहली किश्त का 50 प्रतिशत काटा जा रहा है। यह विभाग की पॉलिसी है। इसमें मैं कुछ नहीं कर सकते। साफ-सफाई या दरारों का जवाब निर्माण विंग देगी।
रमेश शर्मा, मैनेजर हाउसिंग बोर्ड
सीलन की समस्या पूरे शहर में वातावरण के कारण है। साफ-सफाई या दरारें हैं तो अलॉटमेंट से पूर्व इसे ठीक किया जाएगा। दो साल से फ्लैट बंद पड़े हैं, इस कारण यह स्थिति हो सकती है।
निर्माण विंग में एसडीओ हाउसिंग बोर्ड।
फ्लैग- सरकार ने चार साल पहले निकाला था ड्रा, अलॉटमेंट में हो गए दो साल लेट बदहाल फ्लैट्स को लौटाने को मजबूर बीपीएल परिवार
हेडिंग -
फोटो संख्या-6 से 11