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जमींदोज होने की कगार पर कैथल का इतिहास
Updated Sat, 29 Jul 2017 11:47 PM IST
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जमींदोज होने की कगार पर कैथल का इतिहास
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर में एतिहासिक स्थलों की हालत काफी दयनीय है। यहां स्थित इतिहास का प्रमाण देने वाले स्थलों के सुधार पर सरकार द्वारा कोई भी ध्यान न दिए जाने के कारण लोगों में काफी मायूसी है। हालांकि पूर्व सरकार के शासनकाल में मुगलकाल के अंतिम शासक भाई उदय सिंह के किले का तो जीर्णोद्धार किया गया था। लेकिन अब किला भगवान भरोसे है। यहां अब सिक्योरिटी गार्ड तक नहीं हैं। जिस कारण साफ-सफाई से लेकर संजोया गया इतिहास फिर से जमींदोज होने की ओर अग्रसर है। इसी के साथ किले से कुछ ही दूरी पर स्थित प्राचीन ऐतिहासिक बावड़ी पर सरकार द्वारा कोई ध्यान न दिए के कारण यह भी अपना अस्तित्व खोती जा रही है। जिससे यहां के लोगों को इसके के बारे में पूर्ण रुप में ज्ञान नहीं मिल पाता है।
जब कार्यक्रम होता है, तभी होती सफाई, बाद स्थिति ज्यों की त्यों
भाई उदय सिंह किला के परिसर में उसी समय सफाई की जाती है। जब यहां प्रशासन की ओर से कोई कार्यक्रम को करवाया जाना हो। यहां किसी सामाजिक या धार्मिक संस्था के द्वारा कोई आयोजन करवाना हो। ऐसे मौके पर भी जो संस्था यह आयोजन करवा रही है। वहीं सफाई का बीड़ा उठाती है। पहले यहां बाकायदा सिक्योरिटी गार्ड रखा गया था। लेकिन अब सिक्योरिटी गार्ड भी नहीं है। न ही कोई अन्य देखभाल करने वाला।
प्राचीन एतिहासिक स्थल बावड़ी को सरकार कर रही अनदेखा
शहर की एतिहासिक धरोहरों में से बावड़ी एक प्राचीन एतिहासिक स्थल है। बताया जाता है कि यहां स्नान करने से चरम रोग ठीक होते थे। यह काफी आकर्षक बनी हुई है। सात मंजिला बावड़ी के कुएं में हालांकि अभी भी पानी है। लेकिन उचित देखभाल न होने के कारण बावड़ी जीर्ण शीर्ण हो रही है।
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प्रशासन ने बनाया था प्रपोजल, नहीं हुआ पास
कुछ वर्ष पहले बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए जिला प्रशासन द्वारा इसका प्रपोजल बनाया गया था। लेकिन सरकार द्वारा अनुमति न देने के कारण इसका जीर्णोद्धार होते होते रह गया।
सामाजिक संस्थाएं और शहरवासी सहयोग करें
इतिहासकार डॉ. कमलेश शर्मा ने बताया कि शहर में स्थित बावड़ी का प्रदेश में एक अलग स्थान है। इसकी पहचान को संजोकर रखने के लिए सामाजिक संस्थाएं व अन्य शहरवासी को अपना सहयोग करना चाहिए। यह सहयोग केवल कुछ रुपयों के चंदे व सफाई का योगदान देकर कर सकते हैं। तभी इसके एतिहासिक महत्व को खोने से बचाया जा सकता है।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि कैथल शहर एतिहासिक धरोहरों को लेकर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां स्थित जिस भी एतिहासिक धरोहरों के सुधार की जरूरत है। इसके लिए जिला प्रशासन सरकार को पत्र लिखेगा। इसके सुधार के प्रयास किए जाएंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर में एतिहासिक स्थलों की हालत काफी दयनीय है। यहां स्थित इतिहास का प्रमाण देने वाले स्थलों के सुधार पर सरकार द्वारा कोई भी ध्यान न दिए जाने के कारण लोगों में काफी मायूसी है। हालांकि पूर्व सरकार के शासनकाल में मुगलकाल के अंतिम शासक भाई उदय सिंह के किले का तो जीर्णोद्धार किया गया था। लेकिन अब किला भगवान भरोसे है। यहां अब सिक्योरिटी गार्ड तक नहीं हैं। जिस कारण साफ-सफाई से लेकर संजोया गया इतिहास फिर से जमींदोज होने की ओर अग्रसर है। इसी के साथ किले से कुछ ही दूरी पर स्थित प्राचीन ऐतिहासिक बावड़ी पर सरकार द्वारा कोई ध्यान न दिए के कारण यह भी अपना अस्तित्व खोती जा रही है। जिससे यहां के लोगों को इसके के बारे में पूर्ण रुप में ज्ञान नहीं मिल पाता है।
जब कार्यक्रम होता है, तभी होती सफाई, बाद स्थिति ज्यों की त्यों
भाई उदय सिंह किला के परिसर में उसी समय सफाई की जाती है। जब यहां प्रशासन की ओर से कोई कार्यक्रम को करवाया जाना हो। यहां किसी सामाजिक या धार्मिक संस्था के द्वारा कोई आयोजन करवाना हो। ऐसे मौके पर भी जो संस्था यह आयोजन करवा रही है। वहीं सफाई का बीड़ा उठाती है। पहले यहां बाकायदा सिक्योरिटी गार्ड रखा गया था। लेकिन अब सिक्योरिटी गार्ड भी नहीं है। न ही कोई अन्य देखभाल करने वाला।
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प्राचीन एतिहासिक स्थल बावड़ी को सरकार कर रही अनदेखा
शहर की एतिहासिक धरोहरों में से बावड़ी एक प्राचीन एतिहासिक स्थल है। बताया जाता है कि यहां स्नान करने से चरम रोग ठीक होते थे। यह काफी आकर्षक बनी हुई है। सात मंजिला बावड़ी के कुएं में हालांकि अभी भी पानी है। लेकिन उचित देखभाल न होने के कारण बावड़ी जीर्ण शीर्ण हो रही है।
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प्रशासन ने बनाया था प्रपोजल, नहीं हुआ पास
कुछ वर्ष पहले बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए जिला प्रशासन द्वारा इसका प्रपोजल बनाया गया था। लेकिन सरकार द्वारा अनुमति न देने के कारण इसका जीर्णोद्धार होते होते रह गया।
सामाजिक संस्थाएं और शहरवासी सहयोग करें
इतिहासकार डॉ. कमलेश शर्मा ने बताया कि शहर में स्थित बावड़ी का प्रदेश में एक अलग स्थान है। इसकी पहचान को संजोकर रखने के लिए सामाजिक संस्थाएं व अन्य शहरवासी को अपना सहयोग करना चाहिए। यह सहयोग केवल कुछ रुपयों के चंदे व सफाई का योगदान देकर कर सकते हैं। तभी इसके एतिहासिक महत्व को खोने से बचाया जा सकता है।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि कैथल शहर एतिहासिक धरोहरों को लेकर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां स्थित जिस भी एतिहासिक धरोहरों के सुधार की जरूरत है। इसके लिए जिला प्रशासन सरकार को पत्र लिखेगा। इसके सुधार के प्रयास किए जाएंगे।