{"_id":"59666a9b4f1c1b7f548b4594","slug":"41499884187-kaithal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईटीआई ट्रेनीज के भरोसे रोडवेज वर्कशॉप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईटीआई ट्रेनीज के भरोसे रोडवेज वर्कशॉप
Updated Wed, 12 Jul 2017 11:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईटीआई ट्रेनीज के भरोसे रोडवेज की वर्कशॉप
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रोडवेज विभाग की वर्कशॉप में कर्मचारियों का भारी टोटा है। जिस वजह से वर्कशॉप में काम प्रभावित होने लगा है। एक बार खराब हुई बस को ठीक करने में कई दिन लगते हैं। आईटीआई के ट्रेनी विद्यार्थियों से काम चलाया जा रहा है। नियमित कर्मचारियों की कमी के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग के अनुसार कैथल डिपो में कुल 204 पद हैं। जिसमें से केवल 115 कर्मचारी ही वर्कशॉप में कार्यरत हैं। यहां पर अभी भी 89 कर्मचारियों की जरूरत है। लेकिन रोडवेज विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
वर्कशॉप में यह पद है खाली
जिला की रोडवेज वर्कशॉप में सर्विस स्टेशन इंचार्ज की दो पद, फोरमैन का एक, असिस्टेंट रेडियर के दो, हेड ब्लेक स्मिथ की एक, हेड कारपरेंटर की एक, अपहोल्स्टर के दो, असिस्टेंट अपहोल्स्टर का एक, असिस्टेंट वेल्डर का एक, इलेक्ट्रिशियन का एक, पेंटर के दो, असिस्टेंट मैकेनिक के 19, असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन के आठ, असिस्टेंट टायरमैन के दो, हेल्पर टेक्निकल के 40, वेल्डर का एक व स्टोरमैन के दो पद खाली हैं।
विज्ञापन
बस खराब हो तो ठीक होने में लगता एक सप्ताह
कर्मचारी चालक कृष्ण गुलियाणा ने कहा कि वर्कशॉप में टेक्निकल कर्मचारियों की कमी के कारण चालकों को भी काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि यदि बस खराब हो जाए तो उसे ठीक होने में 5 से 7 दिन लग जाते हैं। जिस कारण रूटों पर चलने वाली बसें कम होती है और यात्रियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। सरकार खाली पदों को जल्द भरने का कार्य करे।
प्रतिदिन 10 बसें रहती हैं वर्कशॉप में
विभाग के अनुसार प्रतिदिन 10 बसें वर्कशॉप में ठीक होने के इंतजार में खड़ी रहती हैं। जिससे बसों के लोकल व बाहर के 15 से 20 रूट प्रभावित होते हैं। इस 10 बसों के वर्कशॉप में खड़े रहने के कारण रोडवेज को रोजाना 80 हजार से एक लाख रुपये का घाटा होता है। यदि कर्मचारी पूरे हों तो बसें हर दो दिन में ठीक हो सकती हैं।
आईटीआई के विद्यार्थियों से चलाया जा रहा है काम
रोडवज वर्कशॉप के वर्क मैनेजर नवीन कुमार ने बताया कि वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी है। यदि आईटीआई के प्रशिक्षु विद्यार्थी न हों तो और भी ज्यादा मुश्किलें हो जाती हैं।
जल्द भरे जाएंगे पद
सरकार की ओर से वर्कशॉप में हेल्पर कर्मचारियों की पदों की भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन निकाले गए जिसकी डिपो स्तर पर छंटनी होने लगी है। जल्द ही वर्कशॉप में खाली पड़े पद भरे जाएंगे। जिसके बाद वर्कशॉप कर्मचारियों की कमी की समस्या का समाधान हो जाएगा।
रामकुमार, जीएम रोडवेज, कैथल डिपो।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रोडवेज विभाग की वर्कशॉप में कर्मचारियों का भारी टोटा है। जिस वजह से वर्कशॉप में काम प्रभावित होने लगा है। एक बार खराब हुई बस को ठीक करने में कई दिन लगते हैं। आईटीआई के ट्रेनी विद्यार्थियों से काम चलाया जा रहा है। नियमित कर्मचारियों की कमी के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग के अनुसार कैथल डिपो में कुल 204 पद हैं। जिसमें से केवल 115 कर्मचारी ही वर्कशॉप में कार्यरत हैं। यहां पर अभी भी 89 कर्मचारियों की जरूरत है। लेकिन रोडवेज विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
विज्ञापन
वर्कशॉप में यह पद है खाली
जिला की रोडवेज वर्कशॉप में सर्विस स्टेशन इंचार्ज की दो पद, फोरमैन का एक, असिस्टेंट रेडियर के दो, हेड ब्लेक स्मिथ की एक, हेड कारपरेंटर की एक, अपहोल्स्टर के दो, असिस्टेंट अपहोल्स्टर का एक, असिस्टेंट वेल्डर का एक, इलेक्ट्रिशियन का एक, पेंटर के दो, असिस्टेंट मैकेनिक के 19, असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन के आठ, असिस्टेंट टायरमैन के दो, हेल्पर टेक्निकल के 40, वेल्डर का एक व स्टोरमैन के दो पद खाली हैं।
विज्ञापन
बस खराब हो तो ठीक होने में लगता एक सप्ताह
कर्मचारी चालक कृष्ण गुलियाणा ने कहा कि वर्कशॉप में टेक्निकल कर्मचारियों की कमी के कारण चालकों को भी काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि यदि बस खराब हो जाए तो उसे ठीक होने में 5 से 7 दिन लग जाते हैं। जिस कारण रूटों पर चलने वाली बसें कम होती है और यात्रियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। सरकार खाली पदों को जल्द भरने का कार्य करे।
प्रतिदिन 10 बसें रहती हैं वर्कशॉप में
विभाग के अनुसार प्रतिदिन 10 बसें वर्कशॉप में ठीक होने के इंतजार में खड़ी रहती हैं। जिससे बसों के लोकल व बाहर के 15 से 20 रूट प्रभावित होते हैं। इस 10 बसों के वर्कशॉप में खड़े रहने के कारण रोडवेज को रोजाना 80 हजार से एक लाख रुपये का घाटा होता है। यदि कर्मचारी पूरे हों तो बसें हर दो दिन में ठीक हो सकती हैं।
आईटीआई के विद्यार्थियों से चलाया जा रहा है काम
रोडवज वर्कशॉप के वर्क मैनेजर नवीन कुमार ने बताया कि वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी है। यदि आईटीआई के प्रशिक्षु विद्यार्थी न हों तो और भी ज्यादा मुश्किलें हो जाती हैं।
जल्द भरे जाएंगे पद
सरकार की ओर से वर्कशॉप में हेल्पर कर्मचारियों की पदों की भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन निकाले गए जिसकी डिपो स्तर पर छंटनी होने लगी है। जल्द ही वर्कशॉप में खाली पड़े पद भरे जाएंगे। जिसके बाद वर्कशॉप कर्मचारियों की कमी की समस्या का समाधान हो जाएगा।
रामकुमार, जीएम रोडवेज, कैथल डिपो।