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Kaithal News: अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग, इस बार खास रहेगी जन्माष्टमी
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कलायत। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष संयोग लेकर आ रहा है। जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इसके अलावा कई शुभ योग भी बन रहे हैं जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 4 सितंबर की रात 2 बजकर 25 मिनट पर होगा और इसका समापन 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर होगा। उदयातिथि और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की परंपरा को ध्यान में रखते हुए 4 सितंबर को ही जन्माष्टमी का व्रत रखा जाएगा।
रोहिणी नक्षत्र का भी बन रहा संयोग
पंडित विशाल शांडिल्य के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से रोहिणी नक्षत्र का विशेष संबंध माना जाता है। इस बार रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 4 सितंबर की रात 12 बजकर 29 मिनट पर होगा और यह रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ऐसे में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग जन्माष्टमी को विशेष बना रहा है। उन्होंने बताया कि इस दिन हर्षण योग, बुधादित्य योग, हंस योग और मालव्य योग भी बन रहे हैं। इसके अलावा चंद्रमा और गुरु की स्थिति को भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन शुभ संयोगों के कारण इस बार जन्माष्टमी का पर्व विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व वाला माना जा रहा है।
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रोहिणी नक्षत्र का भी बन रहा संयोग
पंडित विशाल शांडिल्य के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से रोहिणी नक्षत्र का विशेष संबंध माना जाता है। इस बार रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 4 सितंबर की रात 12 बजकर 29 मिनट पर होगा और यह रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ऐसे में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग जन्माष्टमी को विशेष बना रहा है। उन्होंने बताया कि इस दिन हर्षण योग, बुधादित्य योग, हंस योग और मालव्य योग भी बन रहे हैं। इसके अलावा चंद्रमा और गुरु की स्थिति को भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन शुभ संयोगों के कारण इस बार जन्माष्टमी का पर्व विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व वाला माना जा रहा है।
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