फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   40% of IDs in the municipal council area were not self-certified.

Kaithal News: नगर परिषद क्षेत्र की 40 फीसदी आईडी नहीं हुईं स्व-प्रमाणित

Sat, 25 Oct 2025 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 25 Oct 2025 01:53 AM IST
विज्ञापन
40% of IDs in the municipal council area were not self-certified.
नगर प​रिषद में कार्य के लिए पहुंचे शहरवासी।
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


कैथल। नगर परिषद क्षेत्र की लगभग 40 प्रतिशत प्रॉपर्टी आईडी अब तक स्व-प्रमाणित नहीं हो सकी हैं। इससे इन आईडी के डाटा में छेड़छाड़ और चोरी की आशंका गहरा रही है। कुल 80,775 प्रॉपर्टी आईडी में से केवल 49,194 आईडी ही स्व-प्रमाणित हुई हैं, जबकि करीब 31 हजार आईडी अभी भी पोर्टल पर सार्वजनिक हैं, जिन्हें कोई भी देख सकता है। यही वजह है कि दलालों द्वारा इन आईडी का गलत इस्तेमाल करने का खतरा बढ़ गया है।

नगर परिषद की ओर से आमजन को प्रॉपर्टी आईडी स्व-प्रमाणित करने के लिए जो जागरूकता शिविर चलाए गए थे, वे अब पूरी तरह थम चुके हैं। पिछले कुछ माह से परिषद की ओर से कोई भी नया शिविर आयोजित नहीं किया गया है। यह भी एक बड़ा कारण है कि नागरिक आगे नहीं आ रहे। कई लोगों को इस प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है। जबकि प्रॉपर्टी आईडी का सत्यापन न केवल संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि कर व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए भी आवश्यक है। फिलहाल नगर परिषद इस प्रक्रिया में पिछड़ती नजर आ रही है।
विज्ञापन


स्व-प्रमाणित होने पर लॉक हो जाएगी आईडी ः स्व-प्रमाणित करने की प्रक्रिया में प्रॉपर्टी आईडी को मोबाइल नंबर से लिंक करके ‘लॉक’ किया जाता है। इस लॉक को खोलने के लिए उसी नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है। इस तरह किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा कोई बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रमाणित आईडी की प्रत्येक जानकारी सुरक्षित रहती है, जबकि गैर-प्रमाणित आईडी की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक रहती है। यही कारण है कि कई बार ऐसी सार्वजनिक आईडी का दुरुपयोग कर अवैध कॉलोनियों या अवैध रजिस्ट्री तक करवा दी जाती है।

ऐसे समझें डाटा चोरी का खेल



पोर्टल पर सार्वजनिक पड़ी आईडी से छेड़छाड़ कर दलालों द्वारा गलत फायदा उठाया जा सकता है। इससे आमजन को नुकसान के साथ-साथ सरकार को भी राजस्व हानि होती है।

उदाहरण के तौर पर- किसी प्रॉपर्टी आईडी पर नगर परिषद का कर या विकास शुल्क बकाया नहीं है, जबकि दूसरी आईडी पर कर बकाया है। ऐसे में कुछ लोग सार्वजनिक पड़ी ‘कर-मुक्त’ आईडी को बकायेदार आईडी से जोड़कर रिकॉर्ड बदल देते हैं। इससे बकायेदार संपत्ति कर-मुक्त दिखने लगती है। असली भू-स्वामी को इसका पता तब चलता है, जब उसे किसी काम के लिए परिषद में दस्तावेज की जरूरत पड़ती है।


नगर परिषद की ओर से नागरिकों को प्रॉपर्टी आईडी स्व-प्रमाणित करने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। आमजन से अपील है कि वे अपनी आईडी को समय पर प्रमाणित कराएं, ताकि डेटा चोरी या फर्जीवाड़े का कोई अंदेशा न रहे। समय रहते सभी प्रॉपर्टी मालिकों को अपनी आईडी स्व-प्रमाणित करनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे।-सुरभि गर्ग, अध्यक्ष, नगर परिषद

नगर परिषद में कार्य के लिए पहुंचे शहरवासी।

नगर परिषद में कार्य के लिए पहुंचे शहरवासी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed