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गोदामों में सड़ गया 3650 मीट्रिक टन गेहूं
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पूंडरी। एक ओर किसान खून-पसीना एक करके अनाज पैदा करता है और सरकार उसे महंगे दामों पर खरीद कर लोगों को करीब-करीब निशुल्क उपलब्ध करवाती है लेकिन अफसरों को इसकी परवाह नहीं है। यही वजह है कि फतेहपुर व पूंडरी में खाद्य आपूर्ति विभाग के दो गोदामों में 3650 मीट्रिक टन गेहूं खराब हो गया। इसमें संबंधित विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के दोनों गोदामों में खुले में गेहूं का भंडारण किया गया है। उन पर कोई शेड या कवर नहीं है। जब दोनों गोदामों का हाल देखा गया तो अनाज बुरी तरह सड़ा हुआ था और दुर्गंध आ रही थी। दोनों गोदामों में सरकारी गेहूं का इतनी बड़ी मात्रा में खराब होना कहीं न कहीं एक बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है। डीएफएससी प्रमोद कुमार का कहना है कि यह गेहूं वर्ष 2019-20 का है जो खुले गोदाम में स्टोर किया गया है। इंस्पेक्टर की लापरवाही से गेहूं खराब हुआ है। इसकी रिपोर्ट बनाकर विभाग को चंडीगढ़ भेज दी गई है। इसमें कार्रवाई भी की जाएगी और साथ में भरपाई भी करवाई जाएगी। इसमें इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, एफएससी, डीएफएससी व डीएफएसओ सभी अधिकारी मिलकर खराब हुए गेहूं की भरपाई करेंगे।
यहां सवाल उठता है कि जब विभाग को ये पता था कि भारी मात्रा में गेहूं खराब हो चुका है तो लीपापोती करने की कोशिश भी जरूर रही होगी। जब इस विषय में विभाग के अधिकारी बिजेंद्र सिंह और अन्य अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो अधिकारी बचते नजर आए। दो दिन की मशक्कत के बाद जब डीसी प्रदीप दहिया से मामले के बारे में बात की गई तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों के पास तुरंत फोन किया और जवाब देने को कहा। तब जाकर अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। डीसी ने भी कहा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के दोनों गोदामों में खुले में गेहूं का भंडारण किया गया है। उन पर कोई शेड या कवर नहीं है। जब दोनों गोदामों का हाल देखा गया तो अनाज बुरी तरह सड़ा हुआ था और दुर्गंध आ रही थी। दोनों गोदामों में सरकारी गेहूं का इतनी बड़ी मात्रा में खराब होना कहीं न कहीं एक बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है। डीएफएससी प्रमोद कुमार का कहना है कि यह गेहूं वर्ष 2019-20 का है जो खुले गोदाम में स्टोर किया गया है। इंस्पेक्टर की लापरवाही से गेहूं खराब हुआ है। इसकी रिपोर्ट बनाकर विभाग को चंडीगढ़ भेज दी गई है। इसमें कार्रवाई भी की जाएगी और साथ में भरपाई भी करवाई जाएगी। इसमें इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, एफएससी, डीएफएससी व डीएफएसओ सभी अधिकारी मिलकर खराब हुए गेहूं की भरपाई करेंगे।
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यहां सवाल उठता है कि जब विभाग को ये पता था कि भारी मात्रा में गेहूं खराब हो चुका है तो लीपापोती करने की कोशिश भी जरूर रही होगी। जब इस विषय में विभाग के अधिकारी बिजेंद्र सिंह और अन्य अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो अधिकारी बचते नजर आए। दो दिन की मशक्कत के बाद जब डीसी प्रदीप दहिया से मामले के बारे में बात की गई तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों के पास तुरंत फोन किया और जवाब देने को कहा। तब जाकर अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। डीसी ने भी कहा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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