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वक्फ बोर्ड जमीन पर मालिकाना हक को लेकर शुरु की सांकेतिक भूख हड़ताल
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वक्फ बोर्ड जमीन पर मालिकाना हक को लेकर शुरू की सांकेतिक भूख हड़ताल
फोटो नंबर-29
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। वक्फ बोर्ड की जमीन पर मालिकाना हक को लेकर स्थानीय निवासियों ने सांकेतिक भूख हड़ताल कर बोर्ड को भंग करने के लिए व हकदारों को मालिकाना हक दिए जाने की सरकार से गुहार लगाई है।
संजीव कुमार, दीप कुमार, धर्मपाल धीमान, सुरेश गर्ग, जगबीर सिंह, महेंद्र गर्ग, कृष्ण कुमार, भरथो, दर्शना, कविता, कांता, रामप्यारी, राजबाला, अनारकली, मीना, बतेरी, सुमन और दूसरे वक्फ बोर्ड के लीजधारकों ने कहा कि वे लगभग 40 वर्षों से वक्फ बोर्ड की जमीन पर रह रहे हैं। वक्फ बोर्ड द्वारा पहले उन्हें जमीन 99 वर्ष के पट्टे के हिसाब से दी गई थी। जबकि उन्होंने किराया वसूलना व संपत्ति बनाने की अनुमति व रिन्यूल के नाम पर पैसे ऐंठते रहे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार ने जाते-जाते अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार में ऐसा काला कानून पास किया जिससे वक्फ बोर्ड को तानाशाह बना दिया गया। अब बोर्ड ने स्थानीय निवासियों को बेघर करने के लिए खुली बोली के नाम पर ढाई प्रतिशत किराया शुरू कर जो बोली अधिक देगा संपत्ति उसे दे दिए जाने का फरमान सुनाया है। उन्होंने कहा है कि लोगों ने जिंदगी भर की जमा पूंजी इस बंजर पड़ी जमीन को सजाने में लगा दी। वक्फ बोर्ड की जमीन पर अब जिंदगी भर की जमा पूंजी से घर, दुकानें, स्कूल, कारखाने, दो मंजिला इमारतें बनी है। अब उनकी कीमत बढ़ते देख उनसे जमीन हथियाने का काला कानून बनाया गया है। सोमवार को सभी वक्फ बोर्ड लीज धारकों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार से वक्फ बोर्ड को भंग कर राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने व जमीनों पर रह रहे अत्यंत गरीबों को मुफ्त व न्यूनतम राशि में मालिकाना हक दिए जाने की मांग की जाएगी।
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फोटो नंबर-29
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। वक्फ बोर्ड की जमीन पर मालिकाना हक को लेकर स्थानीय निवासियों ने सांकेतिक भूख हड़ताल कर बोर्ड को भंग करने के लिए व हकदारों को मालिकाना हक दिए जाने की सरकार से गुहार लगाई है।
संजीव कुमार, दीप कुमार, धर्मपाल धीमान, सुरेश गर्ग, जगबीर सिंह, महेंद्र गर्ग, कृष्ण कुमार, भरथो, दर्शना, कविता, कांता, रामप्यारी, राजबाला, अनारकली, मीना, बतेरी, सुमन और दूसरे वक्फ बोर्ड के लीजधारकों ने कहा कि वे लगभग 40 वर्षों से वक्फ बोर्ड की जमीन पर रह रहे हैं। वक्फ बोर्ड द्वारा पहले उन्हें जमीन 99 वर्ष के पट्टे के हिसाब से दी गई थी। जबकि उन्होंने किराया वसूलना व संपत्ति बनाने की अनुमति व रिन्यूल के नाम पर पैसे ऐंठते रहे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार ने जाते-जाते अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार में ऐसा काला कानून पास किया जिससे वक्फ बोर्ड को तानाशाह बना दिया गया। अब बोर्ड ने स्थानीय निवासियों को बेघर करने के लिए खुली बोली के नाम पर ढाई प्रतिशत किराया शुरू कर जो बोली अधिक देगा संपत्ति उसे दे दिए जाने का फरमान सुनाया है। उन्होंने कहा है कि लोगों ने जिंदगी भर की जमा पूंजी इस बंजर पड़ी जमीन को सजाने में लगा दी। वक्फ बोर्ड की जमीन पर अब जिंदगी भर की जमा पूंजी से घर, दुकानें, स्कूल, कारखाने, दो मंजिला इमारतें बनी है। अब उनकी कीमत बढ़ते देख उनसे जमीन हथियाने का काला कानून बनाया गया है। सोमवार को सभी वक्फ बोर्ड लीज धारकों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार से वक्फ बोर्ड को भंग कर राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने व जमीनों पर रह रहे अत्यंत गरीबों को मुफ्त व न्यूनतम राशि में मालिकाना हक दिए जाने की मांग की जाएगी।
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