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Kaithal News: कलायत में 250 वर्ष पुराना केंदू, साल भर रहता है हरा-भरा

Tue, 19 May 2026 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 19 May 2026 12:44 AM IST
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250 year old Kendu in Kalayat, remains green throughout the year
बाबा चिमन ऋषि की समाधि पर खड़ा करीब 250 वर्ष पुराना केंदू का पौधा
निशीकांत शर्मा
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कलायत। प्रकृति कई बार ऐसे रहस्य और चमत्कार समेटे होती है, जो लोगों को आश्चर्यचकित कर देते हैं। ऐसा ही एक अनोखा पौधा कलायत स्थित राष्ट्रीय धरोहर ब्रिक टेंपल परिसर में देखने को मिलता है, जहां बाबा चिमन ऋषि की समाधि पर मौजूद केंदू का पौधा वर्षों से लोगों की आस्था और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह पौधा करीब 250 वर्ष पुराना है और इसे ‘शापित पौधा’ कहा जाता है।

करीब तीन मीटर ऊंचा यह केंदू का पौधा न तो बढ़ता है और न ही इस पर फल लगते हैं। खास बात यह है कि पतझड़ का भी इस पर कोई असर नहीं पड़ता और यह वर्षभर हरा-भरा बना रहता है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर पौधे में बौर तो आता है, लेकिन उस पर फल नहीं लगते।

बाबा चिमन ऋषि और इस केंदू के पौधे का लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं है, लेकिन क्षेत्र के बुजुर्गों के अनुसार यह पौधा कई पीढ़ियों से यहां मौजूद है।

90 से 95 वर्ष आयु वर्ग के स्थानीय बुजुर्ग श्रीचंद, मामन राज, लक्ष्मी देवी, भागवंती देवी और अवधेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने परदादाओं से भी इस समाधि और केंदू के पौधे की चर्चा सुनी थी। इसी आधार पर इसकी आयु करीब 250 वर्ष आंकी जाती है।
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स्थानीय निवासी लक्ष्मी देवी ने बताया कि उनके ससुर कहा करते थे कि बाबा चिमन सिद्ध पुरुष थे और कपिल तीर्थ के किनारे तपस्या करते थे।

मान्यता है कि एक बार केंदू के पौधे पर खूब फल आए हुए थे। उसी दौरान बाबा समाधि में लीन थे और पौधे से फल टूटकर उन पर गिरने लगे। इससे समाधि भंग होने पर क्रोधित बाबा ने पौधे को श्राप देते हुए कहा कि इसके बाद इस पर कभी फल नहीं आएंगे, यह बढ़ेगा भी नहीं और सदैव हरा-भरा रहेगा।


लक्ष्मी देवी ने बताया कि आज भी चिमन बाबा की समाधि पर सुबह-शाम श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं और इस अनोखे पौधे के दर्शन भी करते हैं।


200 वर्ष तक हो सकती है आयु



वन अधिकारी प्रणपाल ने बताया कि सामान्य रूप से केंदू के पौधे की ऊंचाई 8 से 18 मीटर तक हो सकती है और इसकी आयु लगभग 200 वर्ष मानी जाती है। उन्होंने बताया कि केंदू की पत्तियां, छाल और फल त्वचा रोग, अल्सर तथा पाचन संबंधी विकारों के उपचार में उपयोगी माने जाते हैं।
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