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जिन खिलाड़ियों को कर दिया था बाहर, वही विजेता बने
Updated Mon, 11 Sep 2017 12:04 AM IST
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जिन खिलाड़ी को कर दिया था बाहर, वही बने विजेता
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्रदेश स्तरीय विद्यालय क्रीड़ा प्रतियोगिता सरकारी व गैर सरकारी फेडरेशन के बीच जंग का अखाड़ा बन गई है। रविवार को प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबलों में परिणाम पर बवाल हो गया। सूचना मिलने पर पूरा प्रशासनिक अमला स्कूल में पहुंचा। जहां प्रतियोगिता के लिए खेल अधिकारी बनाए गए गैर सरकारी फेडरेशन के प्रभारी को अधिकारियों ने जमकर लताड़ लगाई। बाद में विवादित मैच फिर से करवाए गए तो परिणाम उन्हीं बच्चों के पक्ष में आया, जो आवाज बुलंद कर रहे थे। बच्चों ने प्रतियोगिता में परिणाम में हेरा-फेरी का आरोप लगाया है।
बता दें कि 7 सितंबर को आयोजित हुई प्रतियोगिता के रविवार को फाइनल मुकाबले थे। तीन चरणों में विजेता रहे अंडर 17 लड़कों को आगे खेलने से इंकार कर दिया गया। जबकि वे पांचवें राउंड तक खेल सकते थे। इस पर फरीदाबाद के खिलाड़ियों ने कहा कि वे जीत चुके हैं। तो आगे मैच नहीं हो सकता। इसी बात पर बवाल हो गया। खिलाड़ियों ने मामले की सूचना एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह को दी। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी डीईओ, तहसीलदार, नायब तहसीलदार व भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। इसके बाद फिर से उन्हीं बच्चों का मैच करवाया गया तो फरीदाबाद की टीम ने चरखी दादरी को हरा दिया। इसी तरह कई अन्य खिलाड़ियों ने कहा कि उनके परिणाम में गड़बड़ी की जा रही है।
मेरी बेटी की 10 साल की मेहनत पर पानी फेरा
नेशनल लेवल के लिए चयनित हुई फरीदाबाद की खिलाड़ी हसी छिक्कारा को बाहर किए जाने पर उसकी मां अल्का छिक्कारा बोली कि जब प्रतियोगिता के दौरान गेम का पहला चरण शुरू हुआ तो सेक्रेटरी ने उन्हें नियमों के बारे कोई जानकारी नहीं दी। बेटी के प्वाइंट्स भी अच्छे थे। लेकिन एक सेक्रेटरी के कारण वह गेम नहीं खेल पाई। उसने बताया कि उसकी बेटी दूसरी कक्षा से चेस खेल रही है। उसने ऑल इंडिया चेस फेडरेशन की ओर से ओपन नेशनल गेम में हिस्सा लेना था। लेकिन वह उस टूर्नामेंट को छोड़कर यहां आई। अब वह ओपन नेशनल टूर्नामेंट में भाग नहीं ले सकती।
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खिलाड़ियों ने कहा, अपनी मनमर्जी कर रहे एचसीए सचिव
खिलाड़ियों ने हरियाणा शतरंज एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी कुलदीप शर्मा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह गेम में अपनी मनमर्जी करने में लगे हैं। वे अपनी एसोसिएशन के खिलाड़ियों को जीताकर नेशनल प्रतियोगिता खिलवाना चाहते हैं। वह खिलाड़ियों के साथ धोखा करने में जुटे हैं। लेकिन वह उनके साथ धोखा नहीं होने देंगे और मैच नहीं खेलेंगे। जिसके बाद प्रशासन की ओर से आए तहसीलदार व नायब तहसीलदार, डीईओ ने उन्हें समझा-बुझाकर मैच करवाया।
सचिव को नायब तहसीलदार ने फटकारा
विवाद के बीच प्रतियोगिता अधिकारी बनाए गए कुलदीप शर्मा ने जब कहा कि वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तो नायब तहसीलदार ने उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि एक निजी संस्था के व्यक्ति की वजह से सैकड़ों बच्चे परेशान हैं। पूरा प्रशासन स्कूल में खड़ा है और वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। क्या साबित करना चाहते हो। जिला प्रशासन को बदनाम करने में लगे हैं।
खिलाड़ियों ने दी अधिकारियों को शिकायत
विवाद के बीच खेल अधिकारी बनाए गए कुलदीप शर्मा के खिलाफ खिलाड़ियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत देकर जांच की मांग की। जिसमें खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में भेदभाव, अव्यवस्था, देरी से करवाए जाने, निजी फेडरेशन को बढ़ावा देने सहित पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
वहीं एचसीए के सचिव कुलदीप शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान एक कमेटी बनाई जाती है, जिसका निर्णय सर्वमान्य होता है। गेम के दौरान डायरेक्टर को तैनात किया जाता है। जिसे इसकी शिकायत दी जाती है। इसके बाद उनका जो निर्णय होता है, सभी खिलाड़ियों को मानना पड़ता है। नियमानुसार यदि प्वाइंट्स बराबर रहते हैं तो दोबारा मैच करवाने का नियम है। वे विरोध कर रहे सभी अभिभावकों को जवाब देने के लिए तैयार हैं। यदि किसी को उनका विरोध करना है तो वे कानूनी कार्रवाई के साथ करें। उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्रदेश स्तरीय विद्यालय क्रीड़ा प्रतियोगिता सरकारी व गैर सरकारी फेडरेशन के बीच जंग का अखाड़ा बन गई है। रविवार को प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबलों में परिणाम पर बवाल हो गया। सूचना मिलने पर पूरा प्रशासनिक अमला स्कूल में पहुंचा। जहां प्रतियोगिता के लिए खेल अधिकारी बनाए गए गैर सरकारी फेडरेशन के प्रभारी को अधिकारियों ने जमकर लताड़ लगाई। बाद में विवादित मैच फिर से करवाए गए तो परिणाम उन्हीं बच्चों के पक्ष में आया, जो आवाज बुलंद कर रहे थे। बच्चों ने प्रतियोगिता में परिणाम में हेरा-फेरी का आरोप लगाया है।
बता दें कि 7 सितंबर को आयोजित हुई प्रतियोगिता के रविवार को फाइनल मुकाबले थे। तीन चरणों में विजेता रहे अंडर 17 लड़कों को आगे खेलने से इंकार कर दिया गया। जबकि वे पांचवें राउंड तक खेल सकते थे। इस पर फरीदाबाद के खिलाड़ियों ने कहा कि वे जीत चुके हैं। तो आगे मैच नहीं हो सकता। इसी बात पर बवाल हो गया। खिलाड़ियों ने मामले की सूचना एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह को दी। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी डीईओ, तहसीलदार, नायब तहसीलदार व भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। इसके बाद फिर से उन्हीं बच्चों का मैच करवाया गया तो फरीदाबाद की टीम ने चरखी दादरी को हरा दिया। इसी तरह कई अन्य खिलाड़ियों ने कहा कि उनके परिणाम में गड़बड़ी की जा रही है।
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मेरी बेटी की 10 साल की मेहनत पर पानी फेरा
नेशनल लेवल के लिए चयनित हुई फरीदाबाद की खिलाड़ी हसी छिक्कारा को बाहर किए जाने पर उसकी मां अल्का छिक्कारा बोली कि जब प्रतियोगिता के दौरान गेम का पहला चरण शुरू हुआ तो सेक्रेटरी ने उन्हें नियमों के बारे कोई जानकारी नहीं दी। बेटी के प्वाइंट्स भी अच्छे थे। लेकिन एक सेक्रेटरी के कारण वह गेम नहीं खेल पाई। उसने बताया कि उसकी बेटी दूसरी कक्षा से चेस खेल रही है। उसने ऑल इंडिया चेस फेडरेशन की ओर से ओपन नेशनल गेम में हिस्सा लेना था। लेकिन वह उस टूर्नामेंट को छोड़कर यहां आई। अब वह ओपन नेशनल टूर्नामेंट में भाग नहीं ले सकती।
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खिलाड़ियों ने कहा, अपनी मनमर्जी कर रहे एचसीए सचिव
खिलाड़ियों ने हरियाणा शतरंज एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी कुलदीप शर्मा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह गेम में अपनी मनमर्जी करने में लगे हैं। वे अपनी एसोसिएशन के खिलाड़ियों को जीताकर नेशनल प्रतियोगिता खिलवाना चाहते हैं। वह खिलाड़ियों के साथ धोखा करने में जुटे हैं। लेकिन वह उनके साथ धोखा नहीं होने देंगे और मैच नहीं खेलेंगे। जिसके बाद प्रशासन की ओर से आए तहसीलदार व नायब तहसीलदार, डीईओ ने उन्हें समझा-बुझाकर मैच करवाया।
सचिव को नायब तहसीलदार ने फटकारा
विवाद के बीच प्रतियोगिता अधिकारी बनाए गए कुलदीप शर्मा ने जब कहा कि वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तो नायब तहसीलदार ने उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि एक निजी संस्था के व्यक्ति की वजह से सैकड़ों बच्चे परेशान हैं। पूरा प्रशासन स्कूल में खड़ा है और वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। क्या साबित करना चाहते हो। जिला प्रशासन को बदनाम करने में लगे हैं।
खिलाड़ियों ने दी अधिकारियों को शिकायत
विवाद के बीच खेल अधिकारी बनाए गए कुलदीप शर्मा के खिलाफ खिलाड़ियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत देकर जांच की मांग की। जिसमें खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में भेदभाव, अव्यवस्था, देरी से करवाए जाने, निजी फेडरेशन को बढ़ावा देने सहित पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
वहीं एचसीए के सचिव कुलदीप शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान एक कमेटी बनाई जाती है, जिसका निर्णय सर्वमान्य होता है। गेम के दौरान डायरेक्टर को तैनात किया जाता है। जिसे इसकी शिकायत दी जाती है। इसके बाद उनका जो निर्णय होता है, सभी खिलाड़ियों को मानना पड़ता है। नियमानुसार यदि प्वाइंट्स बराबर रहते हैं तो दोबारा मैच करवाने का नियम है। वे विरोध कर रहे सभी अभिभावकों को जवाब देने के लिए तैयार हैं। यदि किसी को उनका विरोध करना है तो वे कानूनी कार्रवाई के साथ करें। उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं।