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पीएचसी से सामूदायिक केंद्र तो बना..सुविधाएं घटीं
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:58 AM IST
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पीएचसी से सामुदायिक केंद्र तो बना लेकिन सुविधाएं घटीं
अमर उजाला ब्यूरो
राजौंद।
नगर के सरकारी अस्पताल को बेशक पीएचसी से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिल गया हो लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां वहीं ढाक के तीन पात वाली बात अब भी ज्यों की त्यों है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब खुद बीमार नजर आने लगा है। यहां 4 डॉक्टर के साथ एक महिला डॉक्टर, 3 रेगुलर स्टाफ नर्स की पोस्ट रिक्त पड़ी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 200 से 300 की ओपीडी प्रतिदिन है। इसके अलावा महिला प्रसूति के भी प्रतिदिन दो से चार केस आते हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगता है कि इतने बड़े अस्पताल में रोगियों का इलाज करने की बजाय अस्पताल स्वयं ही बीमार है।
यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अनेक प्रकार की बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित है। राजौंद ब्लाक की आबादी डेढ़ लाख के करीब है, जिसमें किठाना पीएचसी, जाखौली पीएचसी व करोड़ा पीएचसी भी आते हैं। किठाना पीएचसी में भी कोई डाक्टर नियुक्त नहीं है। किठाना के ग्रामीणों का भी इलाज राम भरोसे ही है। लेकिन यह बिडंबना है कि बेहतर सुविधाएं देने का दावा करने वाली राज्य सरकार व स्वास्थ्य विभाग यहां रिक्त पड़े डाक्टरों के पदों को नहीं भर पाया है। अस्पताल में महिला डाक्टर के न होने से भी खासकर महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा किए जाने वाले दावे यहां हवा में उडक़र रह गए हैं। यहां आधुनिक तकनीकों की मशीनें होना तो दूर की बात बिजली जैसी मूलभूत सुविधा भी 24 घंटे उपलब्ध नहीं हो पाती। कहने को तो प्रदेश सरकार से सभी अस्पतालों को हॉट लाइन से जोड़ा हुआ है लेकिन यहां लोगों के बार-बार अधिकारियों को मिलने के बाद भी उन्हें अस्पताल में यह सुविधा नहीं मिल रही है। नागरिक नरेंद्र, शीशपाल, महेंद्र, मनोज, रोशन, सुमित, किरणपाल, रामकुमार सैक्ट्ररी, भूषण शर्मा ने बताया कि सरकार की ये योजनाएं कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था न होने से क्षेत्र के ग्रामीण मरीजों को लंबे अर्से से परेशान होना पड़ रहा है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि आज स्वास्थ्य केंद्र में उपचार हेतु आने वाले ज्यादातर मरीजों की बीमारी तक गहनता से पहुंचने के लिए चिकित्सक अल्ट्रासाउंड व एक्सरे का परामर्श देते हैं। राजौंद उप तहसील के स्वास्थ्य केंद्र में सरकार की तरफ से इस सुविधा की व्यवस्था नहीं है। जिससे मरीजों को कैथल, असंध व जींद तक जाना पड़ता है। लोगों ने कहा कि एक्सरे मशीन भी पिछले एक वर्ष से बंद पड़ी है। इसको चलाने वाला कोई रेडियाग्राफर ही नहीं है।
कोट-
केवल दो डाक्टर हैं। 200 से 300 की प्रतिदिन की ओपीडी है। महिला चिकित्सक, तीन रेगुलर स्टाफ नर्स के साथ एक्सरे रोडियोग्राफर नहीं है। इस बारे में विभाग के उच्चधिकारियों को भी लिखा हुआ है।
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-डॉ. रजनीश मल्होत्रा, एसएमओ
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अमर उजाला ब्यूरो
राजौंद।
नगर के सरकारी अस्पताल को बेशक पीएचसी से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिल गया हो लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां वहीं ढाक के तीन पात वाली बात अब भी ज्यों की त्यों है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब खुद बीमार नजर आने लगा है। यहां 4 डॉक्टर के साथ एक महिला डॉक्टर, 3 रेगुलर स्टाफ नर्स की पोस्ट रिक्त पड़ी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 200 से 300 की ओपीडी प्रतिदिन है। इसके अलावा महिला प्रसूति के भी प्रतिदिन दो से चार केस आते हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगता है कि इतने बड़े अस्पताल में रोगियों का इलाज करने की बजाय अस्पताल स्वयं ही बीमार है।
यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अनेक प्रकार की बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित है। राजौंद ब्लाक की आबादी डेढ़ लाख के करीब है, जिसमें किठाना पीएचसी, जाखौली पीएचसी व करोड़ा पीएचसी भी आते हैं। किठाना पीएचसी में भी कोई डाक्टर नियुक्त नहीं है। किठाना के ग्रामीणों का भी इलाज राम भरोसे ही है। लेकिन यह बिडंबना है कि बेहतर सुविधाएं देने का दावा करने वाली राज्य सरकार व स्वास्थ्य विभाग यहां रिक्त पड़े डाक्टरों के पदों को नहीं भर पाया है। अस्पताल में महिला डाक्टर के न होने से भी खासकर महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा किए जाने वाले दावे यहां हवा में उडक़र रह गए हैं। यहां आधुनिक तकनीकों की मशीनें होना तो दूर की बात बिजली जैसी मूलभूत सुविधा भी 24 घंटे उपलब्ध नहीं हो पाती। कहने को तो प्रदेश सरकार से सभी अस्पतालों को हॉट लाइन से जोड़ा हुआ है लेकिन यहां लोगों के बार-बार अधिकारियों को मिलने के बाद भी उन्हें अस्पताल में यह सुविधा नहीं मिल रही है। नागरिक नरेंद्र, शीशपाल, महेंद्र, मनोज, रोशन, सुमित, किरणपाल, रामकुमार सैक्ट्ररी, भूषण शर्मा ने बताया कि सरकार की ये योजनाएं कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था न होने से क्षेत्र के ग्रामीण मरीजों को लंबे अर्से से परेशान होना पड़ रहा है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि आज स्वास्थ्य केंद्र में उपचार हेतु आने वाले ज्यादातर मरीजों की बीमारी तक गहनता से पहुंचने के लिए चिकित्सक अल्ट्रासाउंड व एक्सरे का परामर्श देते हैं। राजौंद उप तहसील के स्वास्थ्य केंद्र में सरकार की तरफ से इस सुविधा की व्यवस्था नहीं है। जिससे मरीजों को कैथल, असंध व जींद तक जाना पड़ता है। लोगों ने कहा कि एक्सरे मशीन भी पिछले एक वर्ष से बंद पड़ी है। इसको चलाने वाला कोई रेडियाग्राफर ही नहीं है।
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कोट-
केवल दो डाक्टर हैं। 200 से 300 की प्रतिदिन की ओपीडी है। महिला चिकित्सक, तीन रेगुलर स्टाफ नर्स के साथ एक्सरे रोडियोग्राफर नहीं है। इस बारे में विभाग के उच्चधिकारियों को भी लिखा हुआ है।
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-डॉ. रजनीश मल्होत्रा, एसएमओ