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बरसात नहीं हुई तो गेहूं की फसल में होगा 20 प्रतिशत तक नुकसान

Fri, 15 Jan 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल Updated Fri, 15 Jan 2016 12:00 AM IST
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बिना बरसात के खाली जा रहा सर्दी का मौसम किसानों पर भारी पड़ने वाला है। किसान टकटकी लगाए आसमान की ओर देख रहा है। लेकिन बादल आते हैं और चलते जाते हैं। बिना बरसात के गेहूं की फसल का विकास प्रभावित हो रहा है। जिसका अंतत: उत्पादन पर असर होना निश्चित है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले एक सप्ताह तक भी बरसात नहीं होती है तो गेहूं की फसल में 20 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।

सर्दियों में लाभदायक रहती है बरसात

जिले में अधिकतर इलाके में गेहूं की फसल का उत्पादन होता है। बरसात के साथ ठंड के बढ़ जाने के कारण गेहूं की फसल को विकसित होने का अवसर मिल जाता है। जिसमें ज्यादा फुटाव होता है। वैज्ञानिक भी पश्चिमी विक्षोभ के कारण होने वाली इन बरसातों को फसल के लिए सोना मानते रहे हैं। लेकिन इस बार यह सोना नहीं बरस रहा है।
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दिसंबर खाली निकला, जनवरी में भी पहले पखवाड़े में नहीं हुई बरसात
इस बार पूरा दिसंबर माह बिना बरसात के निकल गया है। वहीं जनवरी में भी पहले पखवाड़े में बरसात नहीं हुई। तीन दिनों से बादल जरूर छाए हुए हैं, लेकिन बारिश नहीं आ रही। जिसका फसल पर विपरीत असर हो रहा है।
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ऐसे प्रभावित हो रहा है गेहूं के पौधे का विकास
कृषि वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा बताते हैं कि वातावरण में नाइट्रोजन की मात्रा होती है। जो बरसात के साथ पौधों को मिल जाती है। इस बार बरसात न होने के कारण सर्दियों में भी ज्यादा तापमान है। इस गर्म तापमान में गेहूं की फसल में एी पौधे से ज्यादा तने विकसित नहीं हो पा रहे हैं। यदि ठंड ज्यादा हो जाए तो पौधा नीचे ही नीचे विकास करता है। जिससे ज्यादा तने बनते हैं। लेकिन तापमान में गर्मी के चलते पौधा सीधा ऊपर की ओर बढ़ता है। जिससे यदि एक पौधे में यदि 10 तने बनने थे तो वहां केवल 6 या 7 तने बन रहे हैं। कई जगह से ऐसी भी रिपोर्ट आ रही हैं कि छोटे पौधों में ही बालियां आ गई हैं। जो उत्पादन की दृष्टि से काफी खतरनाक स्थिति है। यदि अगले एक सप्ताह तक भी बरसात नहीं होती है तो फसल में करीब 20 प्रतिशत तक भी नुकसान हो सकता है।


ये है पिछले दस सालों में जिले में बरसात की स्थिति
     वर्ष      दिसंबर    जनवरी
2004-05    0        0
05-06        0        0
06-07        0        0
07-08        0        16
08-09        0        0
09-10         51    2
10-11       3        5
11-12      0        0
12-13     6        24
13-14      2        76
14-15    22        123
2015 में      0     0


हलकी सिंचाई से मिल सकती है राहत

वैज्ञानिकों का कहना है कि बरसात न होने का नुकसान तो पूरा नहीं किया जा सकता। लेकिन किसान हलकी सिंचाई करते रहें। ताकि जमीन में नमी बनी रहे और पौधे को विकसित होने का अवसर मिलता है।


जिले में 1 लाख 55 हजार हेक्टेयर में है गेहूं की रोपाई
जिले में 1 लाख 55 हजार हेक्टेयर में गेहूं की रोपाई की गई है। जिसमें यदि बरसात नहीं होती है तो 20 प्रतिशत तक नुकसान से करोड़ों रुपये के गेहूं का उत्पादन प्रभावित होगा। कैथल जिला गेहूं उत्पादक जिलों में से एक है। यहां से केंद्रीय पूल के लिए भी गेहूं जाता रहा है।
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