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Kaithal News: सिटी एंड बैंक स्क्वेयर का छठी बार लगा 19 करोड़ का टेंडर, पुराने रेटों के कारण थमी रफ्तार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2026 12:26 AM IST
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19-crore tender for City and Bank Square floated for the sixth time; pace stalled due to old rates.
अधूरा पड़ा सिटी एंड बैंक स्क्वेयर का निर्माण कार्य। संवाद
कैथल। शहर का बहुचर्चित और वर्षों से विवादों में घिरा 54 करोड़ रुपये का सिटी एंड बैंक स्क्वेयर प्रोजेक्ट एक बार फिर सुर्खियों में है। नगर परिषद ने इस परियोजना के लिए छठी बार 19 करोड़ से अधिक का टेंडर रिकॉल किया है। अब 11 अगस्त को टेंडर खुलेगा। करीब आठ साल पहले शुरू हुआ ड्रीम प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। इस बीच परियोजना पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, मामला पुलिस और हाईकोर्ट तक पहुंचा और निर्माण कार्य कई बार बंद रहा।
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अब एक बार फिर नई एजेंसी की तलाश शुरू की गई है, जिसे कार्य आवंटित होने पर 18 महीने में निर्माण पूरा करना होगा। पुराने बस स्टैंड की करीब 43 कनाल 10 मरला जमीन पर वर्ष 2018 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य शहर को आधुनिक बैंकिंग, व्यावसायिक और पार्किंग सुविधाएं उपलब्ध कराना रहा लेकिन समय पर काम पूरा न होने, विवादों और प्रशासनिक अड़चनों के कारण यह परियोजना वर्षों से अधर में लटकी हुई है। हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2016 में इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी।
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टेंडर लेने को तैयार नहीं एजेंसियां, ये दो बड़ी वजह बन रही बाधा

नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार प्रोजेक्ट निर्माण में इस बार भी सबसे बड़ी चुनौती ठेकेदारों की उदासीनता है। अधिकारियों का कहना है कि पहली बार जब टेंडर जारी हुआ था, तब हरियाणा शेड्यूल ऑफ रेट्स (एचएसआर) की दरें काफी कम थीं। बाद में एचएसआर दरों में संशोंधन हुआ लेकिन नियमों के तहत दोबारा टेंडर भी उसी पुराने रेट पर जारी करना पड़ रहा है। अपने रिस्क पर काम करने, निर्माण सामग्री और श्रम लागत बढ़ने के कारण एजेंसियां इस परियोजना में आर्थिक रूप से रुचि नहीं ले रही हैं।
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दूसरी बड़ी वजह प्रोजेक्ट की विवादित छवि है। पहले इस प्रोजेक्ट में एजेंसी और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और मामले में नगर परिषद के तत्कालीन अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी। लगातार विवादों में रहने के कारण अधिकांश निर्माण एजेंसियां इस परियोजना से दूरी बनाए हुए हैं।

सरकार की गलत नीतियों की भेंट चढ़ा प्रोजेक्ट

सरकारी की गलत नीतियों के कारण सिटी एंड बैंक स्क्वेयर तथाकथित नेताओं व अधिकारियों की बली चढ़ गया है। शहर का एक भव्य और सुंदर सिटी स्क्वेयर का सपना केवल सपना ही बनकर रह गया है। इसका पूरा होना नामुमकिन है, क्योंकि भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। पहले जिस ठेकेदार को निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था वह ठेकेदार प्रदेश में चल रहे 100 सरकारी कार्यों में ब्लैकलिस्ट रहा है। इतना ही नहीं जीएसटी घोटाले में कई महीनों तक जेल में रहा और यह मामला आज भी हाईकोर्ट में चल रहा है। सरकार व नगर परिषद के अधिकारियों ने अपने काम को सही तरीके से न करके केवल घोटालों को अंजाम दिया जिसके कारण नौ अधिकारियों व तत्कालीन चेयरपर्सन के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज हुआ जो आज भी हाईकोर्ट में चल रहा है।
- मोहन लाल शर्मा, पार्षद, नगर परिषद, कैथल।
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किसी और विभाग से करवाना चाहिए काम : जगरूप ढुल

नगर परिषद ऐसे बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में सक्षम नहीं है, इसलिए इस प्रोजेक्ट को पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन या फिर पीडब्ल्यूडी को सौंपकर इसको पूरा करवाना चाहिए। जब तक ये प्रोजेक्ट नगर परिषद के पास रहेगा इसका पूरा होना मुश्किल है। सभी आइटम के रेट लगभग दौगुने हो चुके हैं और पुराने रेटों पर इसको कोई भी एजेंसी नहीं बनाएगी और यही कारण है कि कोई भी एजेंसी इसका टेंडर लेने के लिए तैयार नहीं है। इसको दूसरे विभाग को देकर अनुभवी इंजीनियरों से सर्वे करवाकर दोबारा से एस्टीमेट बनाकर नए सिरे से टेंडर लगवाने की जरूरत है। वे लोग इस मामले में नगर आयुक्त को मिलेंगे और ज्ञापन देंगे।

- जगरूप ढुल, समाजसेवी।
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सिटी एंड बैंक स्क्वेयर के निर्माण के लिए नए सिरे से टेंडर लगा दिया गया है। जो भी एजेंसी टेंडर की शर्तों के अनुसार जो भी एजेंसी टेंडर भरेगी नियमों को अनुसार उसको टेंडर अलॉट कर दिया जाएगा।
वरुण शर्मा, एमई, नगर परिषद, कैथल।

अधूरा पड़ा सिटी एंड बैंक स्क्वेयर का निर्माण कार्य। संवाद

अधूरा पड़ा सिटी एंड बैंक स्क्वेयर का निर्माण कार्य। संवाद

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