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4700 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचा बासमती धान का भाव
Updated Fri, 14 Dec 2018 12:04 AM IST
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4700 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचा बासमती धान का भाव
पहले बेच गए किसानों को नुकसान, अब बेचने वालों की चांदी
फोटो संख्या-39
अमर उजाला ब्यूरो
पूंडरी। कई सालों बाद धान की बासमती किस्म की कीमतें 4700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं। वीरवार को अनाज मंडी में लगभग 3 हजार बोरी की आवक रही और यह विभिन्न खरीददारों द्वारा खरीदी गई। इस समय बासमती धान का सीजन अंतिम चरण पर है और अंत में इतनी तेजी आना उन किसानों के साथ धोखा है जो अपने धान को शुरू में ही बेचकर चले गए। उन किसानों को अब बड़ा पछतावा हो रहा है कि उनका धान लूट लिया गया, वहीं जिन किसानों ने अपने धान को तेजी के चलते रोका हुआ था उनके चेहरों खिल गए हैं। लेकिन वे अभी भी अपने धान को बेचने का नाम नहीं ले रहे, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह धान जल्द ही 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगा।
अनाज मंडी प्रधान बाबूराम मुंदड़ी ने बताया कि बासमती धान का सीजन अब 10 से 20 प्रतिशत ही रह गया है और उन्हें लगता है कि इस धान में तेजी का कारण इस बार बासमती धान कम लगना था। वहीं राईस मिलरों के अनुसार बासमती चावल के सौदे होने के कारण इस धान में तेजीआई है। जब राईस मिलरों से यह जानना चाहा कि यह तेजी का रूकेगी तो उन्होंने बताया कि तेजी की कोई परिभाषा नहीं होती और उन्हें खुद यह मालूम नहीं है कि यह तेजी कहां रूकेगी, जिन राईस मिलरों ने बासमती चावल के सौदे कर दिए हैं, वे अब इस धान को लेने में जुट गए हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं और तेजी न आ जाए। कुल मिलाकर इस समय बासमती धान में तेजी का रूख दिखाई दे रहा है और यह तेजी कहां तक रूकेगी यह भविष्य के गर्भ में है।
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पहले बेच गए किसानों को नुकसान, अब बेचने वालों की चांदी
फोटो संख्या-39
अमर उजाला ब्यूरो
पूंडरी। कई सालों बाद धान की बासमती किस्म की कीमतें 4700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं। वीरवार को अनाज मंडी में लगभग 3 हजार बोरी की आवक रही और यह विभिन्न खरीददारों द्वारा खरीदी गई। इस समय बासमती धान का सीजन अंतिम चरण पर है और अंत में इतनी तेजी आना उन किसानों के साथ धोखा है जो अपने धान को शुरू में ही बेचकर चले गए। उन किसानों को अब बड़ा पछतावा हो रहा है कि उनका धान लूट लिया गया, वहीं जिन किसानों ने अपने धान को तेजी के चलते रोका हुआ था उनके चेहरों खिल गए हैं। लेकिन वे अभी भी अपने धान को बेचने का नाम नहीं ले रहे, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह धान जल्द ही 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगा।
अनाज मंडी प्रधान बाबूराम मुंदड़ी ने बताया कि बासमती धान का सीजन अब 10 से 20 प्रतिशत ही रह गया है और उन्हें लगता है कि इस धान में तेजी का कारण इस बार बासमती धान कम लगना था। वहीं राईस मिलरों के अनुसार बासमती चावल के सौदे होने के कारण इस धान में तेजीआई है। जब राईस मिलरों से यह जानना चाहा कि यह तेजी का रूकेगी तो उन्होंने बताया कि तेजी की कोई परिभाषा नहीं होती और उन्हें खुद यह मालूम नहीं है कि यह तेजी कहां रूकेगी, जिन राईस मिलरों ने बासमती चावल के सौदे कर दिए हैं, वे अब इस धान को लेने में जुट गए हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं और तेजी न आ जाए। कुल मिलाकर इस समय बासमती धान में तेजी का रूख दिखाई दे रहा है और यह तेजी कहां तक रूकेगी यह भविष्य के गर्भ में है।
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