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जिला अस्पताल में सेवाओं के लिए ली जाने वाली फीस में 1.70 लाख का घोटाला
Updated Mon, 01 Oct 2018 12:04 AM IST
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जिला अस्पताल में ली जाने वाली फीस में 1.70 लाख की गड़बड़ी
ऑडिट जांच में पकड़ा गया मामला, मई 2018 के बाद से अपडैट नहीं है कैश बुक
हड्डी विभाग में ऑपरेशन के लिए डॉक्टर की मिलीभगत पर अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं आला अधिकारी
नसीब सैनी
कैथल। जिले का स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार के मामले में विवादित होता जा रहा है। हड्डी ऑपरेशन में भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद अब यहां विभिन्न सेवाओं के बदले ली जाने वाली फीस में एक लाख 70 हजार रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आया है। यह भी किसी और ने नहीं बल्कि विभागीय ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ। खुलासा होने के बावजूद अन्य मामलों की तरह इस मामले को भी दबा दिया गया और कर्मचारी से एक लाख 70 हजार रुपये की राशि जमा करवाकर महज उसका उस सीट से तबादला कर दिया गया है। लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों की लगातार की जा रही अनदेखी के कारण सरकार के जीरो टोलरेंस नीति पर बड़ा सवाल उठ रहा है।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2017-18 में यूजर मनी (विभिन्न सेवाओं के बदले ली जाने वाली फीस) की राशि में कई तिथियों में गड़बड़ी पाई गई है। इसमें पूरे साल में मई, जुलाई, अगस्त, अक्तूबर, नवंबर 2017 व फरवरी, मार्च व अप्रैल 2018 की अलग-अलग तिथियों में अस्पताल में आई राशि में से पूरी राशि जमा नहीं करवाई गई। इस कारण इन सभी तिथियों में कुल एक लाख 70 हजार रुपये की राशि का गबन कर लिया गया।
ऑडिट रिपोर्ट में न आती बात तो दबा रहता मामला : विभागीय ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ। ऑडिटर ने तिथि अनुसार पूरी डिटेल निकाल कर विभागीय अधिकारियों के सामने रख दी। इसके बाद एक बार तो हड़कंप मचा। लेकिन फिर दूसरे मामलों की तरह से शुरू हो गई इस मामले को भी दबाने के लिए लीपापोती की कवायद और आखिर में संबंधित कर्मचारी से एक लाख 70 हजार रुपये की राशि जमा करवा कर उसे महज सीट से तब्दील कर दिया गया।
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मामला सामने आया तो जमा करवा दी गई राशि : ऑडिट रिपोर्ट में गबन की बात सामने आने पर सात अगस्त को राशि बैंक के माध्यम से जमा करवा दी गई और संबंधित कर्मचारी की सीट बदल दी गई है। लेकिन ऑडिटर के सामने रसीद नहीं दी गई। अब सवाल उठता है कि क्या मामले के खुलासा होने के बाद राशि जमा करवाने भर से सरकारी कर्मचारी का पल्ला झड़ जाता है।
15 मई के बाद से अपडेट नहीं है कैशबुक : ऑडिटर ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि 15 मई 2018 के बाद से कैशबुक अपडेट नहीं है। इस कारण यह गड़बड़ी और भी सामने आ सकती है।
क्या है यूजर मनी : अस्पताल में यूजर मनी खाते का वह हेड है, जिसमें हर रोज अस्पताल में काटी जाने वाली पांच रुपये की पर्ची, एक्सरे या विभिन्न टेस्टों के बदले जो मामूली शुल्क लिया जाता है, उसकी एकत्रित हुई राशि को इस हेड में जमा करवाया जाता है।
इस तरह से की गई गड़बड़ी
तिथि अस्पताल में आई राशि जमा करवाई गई राशि राशि जो जमा नहीं हुई
31-05-17 26740 6740 20000
25-07-2017 36900 6900 30000
04-08-2017 51510 31510 20000
06-09-2017 55280 35280 20000
27-10-2017 38460 28460 10000
27-11-2017 50995 40885 10000
20-12-2017 33395 23395 10000
07-02-2018 16075 6075 10000
14-03-2018 24145 14145 10000
22-3-2018 18860 8860 10000
02-04-2018 59935 49935 10000
07-04-2018 34870 24870 10000
अधिकारी क्यों आंखें मूंदे रहते हैं : जिला अस्पताल में खून बेचने, हड्डियों के ऑपरेशन में उपकरण विक्रेता एजेंसियों के साथ मिलीभगत के बाद अब नकदी हड़पने का मामला सामने आया है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस अवधि में अस्पताल या विभाग के जिले के आला अधिकारी क्यों आंखें मूंदे रहते हैं? क्या उन्हें मासिक या पाक्षिक कोई रिपोर्ट नहीं जाती, क्या कैशबुक अपडेट रखने आदि पर उनके हस्ताक्षर नहीं होते? ऐसे कई सवाल हैं। जो इन मामलों के सामने आने के बाद उठ रहे हैं।
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यह मामला मेरे ज्वाइन करने से पहले का है। अब संबंधित कर्मचारी की सीट बदल दी गई है। राशि भी जमा करवा दी गई है। मामले की जांच जारी है।
-डॉ. संत लाल, सीएमओ
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ऑडिट जांच में पकड़ा गया मामला, मई 2018 के बाद से अपडैट नहीं है कैश बुक
हड्डी विभाग में ऑपरेशन के लिए डॉक्टर की मिलीभगत पर अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं आला अधिकारी
नसीब सैनी
कैथल। जिले का स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार के मामले में विवादित होता जा रहा है। हड्डी ऑपरेशन में भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद अब यहां विभिन्न सेवाओं के बदले ली जाने वाली फीस में एक लाख 70 हजार रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आया है। यह भी किसी और ने नहीं बल्कि विभागीय ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ। खुलासा होने के बावजूद अन्य मामलों की तरह इस मामले को भी दबा दिया गया और कर्मचारी से एक लाख 70 हजार रुपये की राशि जमा करवाकर महज उसका उस सीट से तबादला कर दिया गया है। लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों की लगातार की जा रही अनदेखी के कारण सरकार के जीरो टोलरेंस नीति पर बड़ा सवाल उठ रहा है।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2017-18 में यूजर मनी (विभिन्न सेवाओं के बदले ली जाने वाली फीस) की राशि में कई तिथियों में गड़बड़ी पाई गई है। इसमें पूरे साल में मई, जुलाई, अगस्त, अक्तूबर, नवंबर 2017 व फरवरी, मार्च व अप्रैल 2018 की अलग-अलग तिथियों में अस्पताल में आई राशि में से पूरी राशि जमा नहीं करवाई गई। इस कारण इन सभी तिथियों में कुल एक लाख 70 हजार रुपये की राशि का गबन कर लिया गया।
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ऑडिट रिपोर्ट में न आती बात तो दबा रहता मामला : विभागीय ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ। ऑडिटर ने तिथि अनुसार पूरी डिटेल निकाल कर विभागीय अधिकारियों के सामने रख दी। इसके बाद एक बार तो हड़कंप मचा। लेकिन फिर दूसरे मामलों की तरह से शुरू हो गई इस मामले को भी दबाने के लिए लीपापोती की कवायद और आखिर में संबंधित कर्मचारी से एक लाख 70 हजार रुपये की राशि जमा करवा कर उसे महज सीट से तब्दील कर दिया गया।
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मामला सामने आया तो जमा करवा दी गई राशि : ऑडिट रिपोर्ट में गबन की बात सामने आने पर सात अगस्त को राशि बैंक के माध्यम से जमा करवा दी गई और संबंधित कर्मचारी की सीट बदल दी गई है। लेकिन ऑडिटर के सामने रसीद नहीं दी गई। अब सवाल उठता है कि क्या मामले के खुलासा होने के बाद राशि जमा करवाने भर से सरकारी कर्मचारी का पल्ला झड़ जाता है।
15 मई के बाद से अपडेट नहीं है कैशबुक : ऑडिटर ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि 15 मई 2018 के बाद से कैशबुक अपडेट नहीं है। इस कारण यह गड़बड़ी और भी सामने आ सकती है।
क्या है यूजर मनी : अस्पताल में यूजर मनी खाते का वह हेड है, जिसमें हर रोज अस्पताल में काटी जाने वाली पांच रुपये की पर्ची, एक्सरे या विभिन्न टेस्टों के बदले जो मामूली शुल्क लिया जाता है, उसकी एकत्रित हुई राशि को इस हेड में जमा करवाया जाता है।
इस तरह से की गई गड़बड़ी
तिथि अस्पताल में आई राशि जमा करवाई गई राशि राशि जो जमा नहीं हुई
31-05-17 26740 6740 20000
25-07-2017 36900 6900 30000
04-08-2017 51510 31510 20000
06-09-2017 55280 35280 20000
27-10-2017 38460 28460 10000
27-11-2017 50995 40885 10000
20-12-2017 33395 23395 10000
07-02-2018 16075 6075 10000
14-03-2018 24145 14145 10000
22-3-2018 18860 8860 10000
02-04-2018 59935 49935 10000
07-04-2018 34870 24870 10000
अधिकारी क्यों आंखें मूंदे रहते हैं : जिला अस्पताल में खून बेचने, हड्डियों के ऑपरेशन में उपकरण विक्रेता एजेंसियों के साथ मिलीभगत के बाद अब नकदी हड़पने का मामला सामने आया है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस अवधि में अस्पताल या विभाग के जिले के आला अधिकारी क्यों आंखें मूंदे रहते हैं? क्या उन्हें मासिक या पाक्षिक कोई रिपोर्ट नहीं जाती, क्या कैशबुक अपडेट रखने आदि पर उनके हस्ताक्षर नहीं होते? ऐसे कई सवाल हैं। जो इन मामलों के सामने आने के बाद उठ रहे हैं।
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यह मामला मेरे ज्वाइन करने से पहले का है। अब संबंधित कर्मचारी की सीट बदल दी गई है। राशि भी जमा करवा दी गई है। मामले की जांच जारी है।
-डॉ. संत लाल, सीएमओ