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महाशिवरात्रि का महापर्व: सुबह 2.10 से लेकर रात के 10.45 तक महाकाल का जलाभिषेक
Updated Thu, 09 Aug 2018 12:09 AM IST
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महाशिवरात्रि : सुबह 2.10 से लेकर रात के 10.45 तक महाकाल का जलाभिषेक
- त्रियोदशी तिथि में आया सावन की महाशिवरात्रि का महापर्व, अरद्रा नक्षत्र में है हर्ष का सुंदर योग,
फोटो नंबर-6 से 10
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सावन की महाशिवरात्रि का पर्व वीरवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। जिसको लेकर शहर की सभी सड़कों पर बुधवार को कांवड़ियों की भारी रौनक रही। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से कांवड़ियों के लिए भंडारे भी आयोजित किए गए। शहर के सभी मुख्य मंदिरों को भव्य लाइटों से भी सजाया गया है। अबकी बार महाशिवरात्रि का पवन पर्व अरद्रा नक्षत्र में आ रही है जिसका हर्ष में सुंदर योग है।
शिव शक्ति धाम मंदिर के संचालक पंडित प्रेमशंकर शास्त्री ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि त्रियोदशी तिथि में ही आ रही है। जो काफी विशेष है। वीरवार सुबह 2.10 बजे से ही भगवान महाकाल का जलाभिषेक शुरू होगा जो रात्रि 10.45 बजे समाप्त होगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा कांवड़ियों द्वारा जलाभिषेक का समय बुधवार को ही 10.46 के बाद शुरू हो गया। यह शिवरात्रि प्रथम प्रहर में आ रही है। जिसकी पूजा उत्तम रहेगी। इस पर श्रद्धालु शिवपचांकसर मंत्र व शिव चालीस का पाठ करें।
ऐसे करें पूजा, यह मिलेगा फल : हनुमान वटिका के पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि जल से जलाभिषेक पर सुख शांति, शक्कर और दूध से विद्या की प्राप्ति, जल में कुश मिलाकर रोग शांति, गन्ने के रस से लक्ष्मी प्राप्ति व शहद से जलाभिषेक करने पर राजपद की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भगवान शिव को अतिप्रिय बेलपत्र और भांग धतूरा व आक के पत्ते चढ़ाए।
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शर्मा ने बताया कि शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मुल्तोब्रह्म रुपया नम:, मध्यतेविष्णु रुपेनमा:, अग्रतेशिवरुपनमा:, विल्वपत्रम शिवाय नमा: मंत्र का जाप करें इससे विशेष फल की प्राप्ति होगी।
16 वर्षों से साइकिल पर कांवड़ ला रहा राजपाल
कैथल। बुधवार को नेहरू गार्डन कालोनी निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग राजपाल 16वीं बार कांवड़ लेकर कैथल पहुंचा। राजपाल ने बताया कि वह प्रथम बार कांवड़ वर्ष 2002 में लाया। जिसके बाद से वे लगातार कांवड़ ल रहे हैं। उसने बताया कि वर्ष 2001 में वह ढांड रोड मंदिर में स्थित मंदिर में जल चढ़ाने के लिए गया तो उसने वहां से जल मांगा लेकिन कोढ़ के कारण उसे जल नहीं दिया। जिसके बाद उसने ठाना कि वह अगले वर्ष स्वयं हरिद्वार जाकर कांवड़ लाएगा और जल चढ़ाएगा।
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- त्रियोदशी तिथि में आया सावन की महाशिवरात्रि का महापर्व, अरद्रा नक्षत्र में है हर्ष का सुंदर योग,
फोटो नंबर-6 से 10
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सावन की महाशिवरात्रि का पर्व वीरवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। जिसको लेकर शहर की सभी सड़कों पर बुधवार को कांवड़ियों की भारी रौनक रही। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से कांवड़ियों के लिए भंडारे भी आयोजित किए गए। शहर के सभी मुख्य मंदिरों को भव्य लाइटों से भी सजाया गया है। अबकी बार महाशिवरात्रि का पवन पर्व अरद्रा नक्षत्र में आ रही है जिसका हर्ष में सुंदर योग है।
शिव शक्ति धाम मंदिर के संचालक पंडित प्रेमशंकर शास्त्री ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि त्रियोदशी तिथि में ही आ रही है। जो काफी विशेष है। वीरवार सुबह 2.10 बजे से ही भगवान महाकाल का जलाभिषेक शुरू होगा जो रात्रि 10.45 बजे समाप्त होगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा कांवड़ियों द्वारा जलाभिषेक का समय बुधवार को ही 10.46 के बाद शुरू हो गया। यह शिवरात्रि प्रथम प्रहर में आ रही है। जिसकी पूजा उत्तम रहेगी। इस पर श्रद्धालु शिवपचांकसर मंत्र व शिव चालीस का पाठ करें।
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ऐसे करें पूजा, यह मिलेगा फल : हनुमान वटिका के पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि जल से जलाभिषेक पर सुख शांति, शक्कर और दूध से विद्या की प्राप्ति, जल में कुश मिलाकर रोग शांति, गन्ने के रस से लक्ष्मी प्राप्ति व शहद से जलाभिषेक करने पर राजपद की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भगवान शिव को अतिप्रिय बेलपत्र और भांग धतूरा व आक के पत्ते चढ़ाए।
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शर्मा ने बताया कि शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मुल्तोब्रह्म रुपया नम:, मध्यतेविष्णु रुपेनमा:, अग्रतेशिवरुपनमा:, विल्वपत्रम शिवाय नमा: मंत्र का जाप करें इससे विशेष फल की प्राप्ति होगी।
16 वर्षों से साइकिल पर कांवड़ ला रहा राजपाल
कैथल। बुधवार को नेहरू गार्डन कालोनी निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग राजपाल 16वीं बार कांवड़ लेकर कैथल पहुंचा। राजपाल ने बताया कि वह प्रथम बार कांवड़ वर्ष 2002 में लाया। जिसके बाद से वे लगातार कांवड़ ल रहे हैं। उसने बताया कि वर्ष 2001 में वह ढांड रोड मंदिर में स्थित मंदिर में जल चढ़ाने के लिए गया तो उसने वहां से जल मांगा लेकिन कोढ़ के कारण उसे जल नहीं दिया। जिसके बाद उसने ठाना कि वह अगले वर्ष स्वयं हरिद्वार जाकर कांवड़ लाएगा और जल चढ़ाएगा।