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जिंदगी तू ही बता मेरी क्या लगती है, पास रहती है मगर, मुझ से जुदा लगती है...

Mon, 27 Nov 2017 12:14 AM IST
Updated Mon, 27 Nov 2017 12:14 AM IST
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जिंदगी तू ही बता मेरी क्या लगती है, पास रहती है मगर, मुझ से जुदा लगती है...
जिंदगी तू ही बता मेरी क्या लगती है, पास रहती है मगर, मुझ से जुदा लगती है...
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में रविवार को साहित्य सभा की ओर से वार्षिक उत्सव एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। जबकि समारोह की अध्यक्षता हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डा. चंद्र त्रिखा ने की। समारोह में चंडीगढ़ से हिंदी दैनिक के संपादक राजकुमार सिंह और वरिष्ठ साहित्यकार डा. हरबंस सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। समारोह में साहित्य विचार-विमर्श एवं बहुभाषायी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। साहित्य विचार-विमर्श में प्रो. अमृत लाल मदान ने शब्द-शक्ति विषय पर वर्तमान संदर्भ में युधिष्ठिर एवं अर्जुन संवाद के माध्यम से बताया कि संवाद के माध्यम से ही हर प्रकार की समस्या का समाधान होता है।
समारोह के दौरान कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसका आगाज नदिया वधवा द्वारा सरस्वती वंदना के गायन से किया गया। सत्यप्रकाश भारद्वाज ने कहा कि जब भी हम छटपटाते हैं। मन को कैद में पाते हैं। बचपन को याद करते हुए दिनेश बंसल ने कहा, बचपन था वो हमारा, या झोंका बहार का, लौट आए काश फिर वो जमाना बहार का। दोस्ती पर व्यंग्य करते हुए मुख्यातिथि कैप्टन शक्ति सिंह ने कहा, वो दोस्त ही था मेरा, कल जिसने मुझे लूटा, आज खुला राज तो मुस्कुरा दिया। जिंदगी के बारे में रमेश चंद पुहाल पानीपती ने अपने अंदाज में कुछ यूं कहा, जिंदगी तू ही बता मेरी क्या लगती है, पास रहती है मगर, मुझ से जुदा लगती है। समारोह का समापन डा. चंद्र त्रिखा की अध्यक्षीय टिप्पणी से हुआ। सम्मेलन में ज्ञानप्रकाश पीयूष, सत्यप्रकाश भारद्वाज, सुशांत सुप्रिय, महेंद्रपाल द्विवेदी, दिलबाग सिंह बाग, मेहरु, डा. तेजिंद्र, चेतन चौहान, लहणा सिंह अत्री, संतोष गर्ग, आदि ने भी अपनी रचना प्रस्तुत की।
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साहित्यकारों को मिला सम्मान
साहित्य सभा की ओर से आयोजित वार्षिक सम्मान समारोह में सतीश बंसल कैथल के सौजन्य प्रो. अमृतलाल मदान को लाला निरंजन दास व सुमित्रा देवी स्मृति साहित्य गौरव सम्मान से, डा. चंद्र त्रिखा व उनकी धर्मपत्नी के सौजन्य से राजकुमार सिंह चंडीगढ़ को धीरज त्रिखा स्मृति पत्रकारिता सम्मान से, शिवानंद शर्मा करनाल के सौजन्य से आर.पी.सेठी कमाल सिरसा को देशराज शर्मा अब्र सीमाबी स्मृति साहित्य सम्मान से, प्रो. अमृत लाल मदान एवं राजकुमारी मदान के सौजन्य से डा. हरीश झंडई को दयाल चंद मदान स्मृति साहित्य सम्मान से, नरेंद्र गुप्ता सीए के सौजन्य से लहणा सिंह अत्री असंध को बाबू राम गुप्ता एडवोकेट स्मृति साहित्य सम्मान से, पीआर. बाम्बा के सौजन्य से अमरजीत कौर हिरदे मोहाली को माता इकबाल कौर स्मृति साहित्य सम्मान से, प्रो. बीबी भारद्वाज के सौजन्य से डा. अशोक अत्री को बृजभूषण भारद्वाज एडवोकेट स्मृति साहित्य सम्मान से, जयचंद बजाज के सौजन्य से सत्यप्रकाश भारद्वाज सिरसा को माता राम बाई स्मृति साहित्य सम्मान से, डा. संजय बंसल रेडियोलोजिस्ट के सौजन्य से रमेश पुहाल पानीपत को डा. ओमप्रकाश बंसल स्मृति साहित्य सम्मान से, ओमपति मोर के सौजन्य से स्व. डा. राजेंद्र मानव जींद को मरणोपरांत अजमेर मोर स्मृति साहित्य सम्मान से, ओपी अरोड़ा अधिवक्ता के सौजन्य से सुशांत सुप्रिय कुरुक्षेत्र को आईसी अरोड़ा एडवोकेट स्मृति साहित्य सम्मान से, डा. हरीश झंडई व उनकी धर्मपत्नी के सौजन्य से संदीप कपूर अंबाला को रामचंद्र झंडई स्मृति साहित्य सम्मान से, राठी परिवार के सौजन्य से संतोष गर्ग हिसार को विजयकृष्ण राठी स्मृति साहित्य सम्मान से, डा. एसके सिंघल रेडियोलोजिस्ट के सौजन्य से गुरमुख सिंह बडै़च करनाल को मीनू सिंघल स्मृति साहित्य सम्मान से, धीरज त्रिखा स्मृति फाउंडेशन चंडीगढ़ के सौजन्य से वरिष्ठ पत्रकार महीपाल सिंह को डा. दामोदर विशिष्ठ स्मृति पत्रकारिता सम्मान, सोहन लाल गुप्ता के सौजन्य प्रदीप नील वशिष्ठ हिसार को रामगोपाल पांडे स्मृति पुरस्कार से, डा. तेङ्क्षजद्र परिवार के सौजन्य से ज्ञान प्रकाश पीयूष सिरसा को जगदीश राम स्मृति पुस्तक पुरस्कार से, धीरज त्रिखा स्मृति फाउंडेशन चंडीगढ़ के सौजन्य से अनामिका वालिया अंबाला को स्वदेश दीपक स्मृति पुस्तक पुरस्कार से, रचना भल्ला को डा. भगवान दास निर्मोही स्मृति पुस्तक पुरस्कार से, शिखा राणा पंचकूला को राकेश वत्स स्मृति पुस्तक पुरस्कार से और भारत भूषण वर्मा असंध को प्रज्ञा साहित्य मंच पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान रमेश चंद पुहाल पानीपत की पुस्तक हरियाणा का लोक सांस्कृतिक जीवन, हरिकृष्ण द्विवेदी कुरुक्षेत्र की प्रायश्चित, प्रो. अमृतलाल मदान के काव्य-संग्रह हे प्रभो, डा. हरीश झंडई के काव्य-संग्रह जिंदगी में धूप-छांव, लहणा सिंह अत्री की पुस्तक किस्मत के खेल, नरेश के उपन्यास एक सवाल, तीन तलाक का और राजेश चुघ की साहित्यिक पत्रिका सांझी सोच का लोकार्पण किया गया।
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आरकेएसडी कॉलेज में रविवार को साहित्य सभा की ओर से वार्षिक उत्सव एवं सम्मान समारोह आयोजित
फोटो नंबर-8,9
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