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निजी कंपनियों द्वारा दूध, दही, लस्सी के रेट बढ़ाए जाने से लोग परेशान
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कैथल। निजी कंपनियों द्वारा दूध, दही, लस्सी के रेट बढ़ाए जाने से लोग परेशान हैं। निजी कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले पेय पदार्थों के प्रति किलो के हिसाब से 4 से 5 रुपये के रेट में इजाफा हुआ है। लेकिन बढ़े हुए रेटों के बाद निजी कंपनियों द्वारा किसानों से लिए जाने वाले दूध का मूल्य नहीं बढ़ाया गया है। हालांकि पैकेट के दूध, दही सहित घी बेचने वाले दुकानदारों ने गर्मी होने के कारण किसानों की तरफ से रेट बढ़ाने का हवाला दिया है।
दुकानदार अशोक ने बताया कि पैकेट के दूध, दही व लस्सी के रेट गर्मी होने के कारण बढ़े है। गर्मी में ही दूध की खपत अधिक हो जाती है। जिस कारण रेट में इजाफा हुआ है।
गांव चंदाना निवासी पशुपालक किसान गौरव ने बताया कि आजकल गर्मी ज्यादा होने के कारण हरे चारे को लेकर परेशानी होती है। हरा चारा नहीं मिलने और मच्छरों के काटने से पशुओं द्वारा दिए जाने वाले दूध की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में शहर में दूध की सप्लाई गांवों से ही कम जाती है, जिस कारण दूध के दाम थोड़े बहुत बढ़ जाते हैं। जैसे ही मौसम ठीक होता है और चारा उपलब्ध होने लगता है तो पशु दूध भी ठीक देने लगते हैं। ऐसे में दूध के रेट भी कम हो जाते हैं।
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गांव दिल्लोंवाली निवासी किसान सतपाल सिंह ने बताया कि दूध विक्रेता निजी कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए रेटों का डेयरियों में बिक रहे दूध के दामों पर कोई असर नहीं पड़ा है। आज भी डेयरियों में 35 से लेकर 40 रुपये प्रति लीटर दूध बिक रहा है। इसके अलावा डेयरी संचालक फेंट और दूध की शुद्धता के अनुसार भी कीमत में थोड़ी बहुत कमी या बढ़ोतरी कर देते हैं।
गांव सिकंदर खेड़ी निवासी किसान राजेश कुमार ने बताया कि किसान गांवों में दूध आज भी उन्हीं रेटों में बेच रहे हैं, जो आज से छह महीने पहले था। निजी कंपनियां रेट बढ़ाएं या न बढ़ाएं, लेकिन किसानों के रेट पहले वाले ही हैं। आज भी वे गांवों में लोगों को 40 रुपये प्रति लीटर के अनुसार शुद्ध दूध उपलब्ध करवा रहे हैं। रेटों में न तो किसी प्रकार की कमी आई है और न ही बढ़ोतरी हुई है।
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दुकानदार अशोक ने बताया कि पैकेट के दूध, दही व लस्सी के रेट गर्मी होने के कारण बढ़े है। गर्मी में ही दूध की खपत अधिक हो जाती है। जिस कारण रेट में इजाफा हुआ है।
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गांव चंदाना निवासी पशुपालक किसान गौरव ने बताया कि आजकल गर्मी ज्यादा होने के कारण हरे चारे को लेकर परेशानी होती है। हरा चारा नहीं मिलने और मच्छरों के काटने से पशुओं द्वारा दिए जाने वाले दूध की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में शहर में दूध की सप्लाई गांवों से ही कम जाती है, जिस कारण दूध के दाम थोड़े बहुत बढ़ जाते हैं। जैसे ही मौसम ठीक होता है और चारा उपलब्ध होने लगता है तो पशु दूध भी ठीक देने लगते हैं। ऐसे में दूध के रेट भी कम हो जाते हैं।
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गांव दिल्लोंवाली निवासी किसान सतपाल सिंह ने बताया कि दूध विक्रेता निजी कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए रेटों का डेयरियों में बिक रहे दूध के दामों पर कोई असर नहीं पड़ा है। आज भी डेयरियों में 35 से लेकर 40 रुपये प्रति लीटर दूध बिक रहा है। इसके अलावा डेयरी संचालक फेंट और दूध की शुद्धता के अनुसार भी कीमत में थोड़ी बहुत कमी या बढ़ोतरी कर देते हैं।
गांव सिकंदर खेड़ी निवासी किसान राजेश कुमार ने बताया कि किसान गांवों में दूध आज भी उन्हीं रेटों में बेच रहे हैं, जो आज से छह महीने पहले था। निजी कंपनियां रेट बढ़ाएं या न बढ़ाएं, लेकिन किसानों के रेट पहले वाले ही हैं। आज भी वे गांवों में लोगों को 40 रुपये प्रति लीटर के अनुसार शुद्ध दूध उपलब्ध करवा रहे हैं। रेटों में न तो किसी प्रकार की कमी आई है और न ही बढ़ोतरी हुई है।