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80 लाख का भवन 4 साल में ही खस्ताहाल, जांच रिपोर्ट पर अफसर खामोश
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:29 AM IST
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80 लाख का भवन 4 साल में ही खस्ताहाल, जांच रिपोर्ट पर अफसर खामोश
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। वर्ष 2013 में बनी नगर परिषद की इमारत चार साल भी नहीं चल सकी, 80 लाख रुपये की लागत से बने भवन में दरारें आ गईं हैं। लीकेज के कारण इमारत में बनाए गए कई शौचालयों को बंद कर दिया गया है। इससे अब मरम्मत के लिए 5 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है, लेकिन निर्माण में गड़बड़ी के आरोपी पर कार्रवाई नहीं हो सकी। इसको लेकर विजिलेंस जांच भी कर चुकी है, मगर जांच रिपोर्ट पर अफसर खामोश हैं। वहीं खराब गुणवत्ता वाले भवन का भुगतान किन अधिकारियों ने किया इस पर भी महकमे के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस भवन निर्माण करने वाली फर्म की विजिलेंस जांच चल रही है।
2 मंजिला भवन में स्थित हैं परिषद की सभी शाखाओं के कार्यालय:-कमेटी चौक नगर परिषद के लिए 80 लाख से दो मंजिला भवन तैयार किया गया था, जो बाहर से देखने पर काफी साफ-सुथरा नजर आता है। लेकिन भवन की बड़ी-बड़ी दरारें कर्मचारियों और पब्लिक को डराती हैं। इसमें नीचे ई-सर्विसेज के लिए विंडो, किराया शाखा, भवन शाखा, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, रेंट शाखा आदि के कार्यालय हैं। ऊपर ईओ, चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, अकाउंट्स विभाग सहित एमई व जेई के कार्यालय हैं। इनमें अधिकांश कार्यालयों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं, इनमें सीलन भी है। शौचालय बदहाल हैं। सीलन के कारण कई शौचालय बंद कर दिए गए हैं।
पांच लाख के रिपयेर के बजट के बाद भी शुरू नहीं हुआ कार्य:-नगर परिषद भवन की जर्जर हुई इमारत की मरम्मत के लिए छह माह पहले हुई बैठक में पांच लाख रुपये के बजट का प्रस्ताव को पारित किया था। लेकिन अब तक इस भवन की मरम्मत के लिए कार्य को शुरू नहीं करवाया गया है।
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कब पूरी होगी विजलेंस की जांच:-नगर परिषद भवन के निर्माण कार्य के ठेकेदार पर भवन के निर्माण में लापरवाही बरतने के आरोप में विजिलेंस की जांच चल रही है, यह जांच कब पूरी होगी और कोई अगली कार्रवाई होगी। इस बात की कोई जानकारी नहीं है। सवाल उठता है कि क्या 80 लाख रुपये में नए बनाए गए भवन के महज 4 साल में जर्जर होने का कारण इसके निर्माण में धांधली है?
कमेटी बनाकर की जाए जांच:-वार्ड नंबर 28 के पार्षद मोहन शर्मा ने कहा कि नगर परिषद भवन की स्थिति पर उसके अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई है। इसके लिए एक विशेष कमेटी का गठन होना चाहिए। इसके साथ साथ जिस समय इस इमारत का निर्माण हुआ उस समय जो परिषद के मुख्य अधिकारी थे उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करवा जांच कराई जानी चाहिए।
मुझे जानकारी नहीं:-परिषद के कार्यकारी चेयरमैन डा. पवन थरेजा ने कहा कि नगर परिषद के साथ वाली इमारत में अधिक पानी बहता है, जो नगर परिषद भवन के साथ लगता है। जिस कारण यह समस्या आ रही है। इसके बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। जानकारी के बाद ही इसकी मरम्मत के लिए कोई कदम उठाया जाएगा।
मरम्मत का एस्टीमेट बनाकर भेजा:-परिषद के सचिव कुलदीप ने बताया कि नगर परिषद भवन के मरम्मत के लिए हेड ऑफिस में एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। जैसे ही इस पर अप्रूवल मिलेगी तो इसमें मरम्मत का कार्य को शुरु करा दिया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। वर्ष 2013 में बनी नगर परिषद की इमारत चार साल भी नहीं चल सकी, 80 लाख रुपये की लागत से बने भवन में दरारें आ गईं हैं। लीकेज के कारण इमारत में बनाए गए कई शौचालयों को बंद कर दिया गया है। इससे अब मरम्मत के लिए 5 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है, लेकिन निर्माण में गड़बड़ी के आरोपी पर कार्रवाई नहीं हो सकी। इसको लेकर विजिलेंस जांच भी कर चुकी है, मगर जांच रिपोर्ट पर अफसर खामोश हैं। वहीं खराब गुणवत्ता वाले भवन का भुगतान किन अधिकारियों ने किया इस पर भी महकमे के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस भवन निर्माण करने वाली फर्म की विजिलेंस जांच चल रही है।
2 मंजिला भवन में स्थित हैं परिषद की सभी शाखाओं के कार्यालय:-कमेटी चौक नगर परिषद के लिए 80 लाख से दो मंजिला भवन तैयार किया गया था, जो बाहर से देखने पर काफी साफ-सुथरा नजर आता है। लेकिन भवन की बड़ी-बड़ी दरारें कर्मचारियों और पब्लिक को डराती हैं। इसमें नीचे ई-सर्विसेज के लिए विंडो, किराया शाखा, भवन शाखा, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, रेंट शाखा आदि के कार्यालय हैं। ऊपर ईओ, चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, अकाउंट्स विभाग सहित एमई व जेई के कार्यालय हैं। इनमें अधिकांश कार्यालयों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं, इनमें सीलन भी है। शौचालय बदहाल हैं। सीलन के कारण कई शौचालय बंद कर दिए गए हैं।
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पांच लाख के रिपयेर के बजट के बाद भी शुरू नहीं हुआ कार्य:-नगर परिषद भवन की जर्जर हुई इमारत की मरम्मत के लिए छह माह पहले हुई बैठक में पांच लाख रुपये के बजट का प्रस्ताव को पारित किया था। लेकिन अब तक इस भवन की मरम्मत के लिए कार्य को शुरू नहीं करवाया गया है।
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कब पूरी होगी विजलेंस की जांच:-नगर परिषद भवन के निर्माण कार्य के ठेकेदार पर भवन के निर्माण में लापरवाही बरतने के आरोप में विजिलेंस की जांच चल रही है, यह जांच कब पूरी होगी और कोई अगली कार्रवाई होगी। इस बात की कोई जानकारी नहीं है। सवाल उठता है कि क्या 80 लाख रुपये में नए बनाए गए भवन के महज 4 साल में जर्जर होने का कारण इसके निर्माण में धांधली है?
कमेटी बनाकर की जाए जांच:-वार्ड नंबर 28 के पार्षद मोहन शर्मा ने कहा कि नगर परिषद भवन की स्थिति पर उसके अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई है। इसके लिए एक विशेष कमेटी का गठन होना चाहिए। इसके साथ साथ जिस समय इस इमारत का निर्माण हुआ उस समय जो परिषद के मुख्य अधिकारी थे उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करवा जांच कराई जानी चाहिए।
मुझे जानकारी नहीं:-परिषद के कार्यकारी चेयरमैन डा. पवन थरेजा ने कहा कि नगर परिषद के साथ वाली इमारत में अधिक पानी बहता है, जो नगर परिषद भवन के साथ लगता है। जिस कारण यह समस्या आ रही है। इसके बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। जानकारी के बाद ही इसकी मरम्मत के लिए कोई कदम उठाया जाएगा।
मरम्मत का एस्टीमेट बनाकर भेजा:-परिषद के सचिव कुलदीप ने बताया कि नगर परिषद भवन के मरम्मत के लिए हेड ऑफिस में एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। जैसे ही इस पर अप्रूवल मिलेगी तो इसमें मरम्मत का कार्य को शुरु करा दिया जाएगा।