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व्यापारियों व आढ़तियों का शोषण बंद करे सरकार- रणदीप सुरजेवाला
Updated Sun, 17 Sep 2017 11:59 PM IST
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व्यापारियों व आढ़तियों का शोषण बंद करें सरकार : रणदीप सुरजेवाला
कहा- जबरन लागू न करे ई-ट्रेडिंग की अव्यवहारिक प्रणाली
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। अखिल भारतीय कांग्रेस मीडिया प्रभारी व मौजूदा विधायक रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी व खट्टर सरकार व्यापारियों व आढ़तियों के शोषण व उत्पीड़न पर तुली है। आए दिन ताबड़तोड़ टैक्स, इंस्पेक्टरी राज व व्यापारी/आढ़ती को अपराधी साबित करने की एक नापाक कोशिश भाजपा सरकार के सरकारी तंत्र व प्रशासनिक अमले की एकमात्र मंशा है। जीएसटी द्वारा अप्रत्याशित टैक्स लगाकर तो हर दुकानदार, छोटे व्यापारी, उद्यमी व आढ़ती की कमर भाजपा ने तोड़ी है। सच यह है कि पहले नोटबंदी फिर जीएसटी के माध्यम से हर छोटे-छोटे दुकानदार, व्यापारी व उद्यमी को सरकारी तंत्र द्वारा अनावश्यक तौर से शक की निगाह से देखा जा रहा है।
सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा सबसे ताजा प्रहार मंडियों में अव्यवहारिक ई-ट्रेडिंग तथा बगैर रजामंदी के फसल की डायरेक्ट पेमेंट प्रणाली को जबरदस्ती लागू करना है। पिछले वर्ष 22 सितंबर, 2016 को ई ट्रेडिंग व डायरेक्ट पेमेंट के विषय पर मंडियों के आढ़तियों के डेलिगेशन के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से विस्तारपूर्वक मंत्रणा हुई। आढ़तियों व व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को बताया था कि मंडियों में आने वाले धान के लिए ई-ट्रेडिंग प्रणाली अव्यवहारिक ही नहीं बल्कि असंभव भी है क्योंकि लगभग 20 प्रतिशत धान ही मंडियों में मानकों के अनुरूप आता है बाकी का धान ढेरी पर खड़े होकर उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करके ही खरीदार मौके पर खरीदता है। इसे मुख्यमंत्री ने भली भांति स्वीकार किया था। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद हरियाणा राज्य मार्केटिंग बोर्ड इसे दोबारा से लागू करने के आदेश जारी कर चुका है। इससे हरियाणा के लगभग 35 हजार आढ़ती व 70 हजार मुनीम सड़कों पर आ जाएंगे।
सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि आढ़ती और किसान का वर्षों पुराना परम्परागत रिश्ता है। हरियाणा के आढ़तियों की एक और समस्या सरकार द्वारा जीएसटी नंबर की अनिवार्यता भी है। पंजाब में ऐसी कोई आवश्यकता नहीं तो हरियाणा में भाजपा ने यह शर्त क्यों रखी है? वो भी तब जब अनाज पर कोई टैक्स नहीं है। खट्टर सरकार आढ़तियों की मदद करने की बजाय उनका धंधा चौपट करने पर तुली है। क्या मुख्यमंत्री, मनोहर लाल खट्टर यह बताएंगे कि हरियाणा के आढ़तियों के जो 600 करोड़ रुपया निर्यातकों के पास फंसा पड़ा है, सरकार उसका भुगतान करवाने में छोटे-छोटे आढ़तियों की क्या मदद करेगी?
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कहा- जबरन लागू न करे ई-ट्रेडिंग की अव्यवहारिक प्रणाली
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। अखिल भारतीय कांग्रेस मीडिया प्रभारी व मौजूदा विधायक रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी व खट्टर सरकार व्यापारियों व आढ़तियों के शोषण व उत्पीड़न पर तुली है। आए दिन ताबड़तोड़ टैक्स, इंस्पेक्टरी राज व व्यापारी/आढ़ती को अपराधी साबित करने की एक नापाक कोशिश भाजपा सरकार के सरकारी तंत्र व प्रशासनिक अमले की एकमात्र मंशा है। जीएसटी द्वारा अप्रत्याशित टैक्स लगाकर तो हर दुकानदार, छोटे व्यापारी, उद्यमी व आढ़ती की कमर भाजपा ने तोड़ी है। सच यह है कि पहले नोटबंदी फिर जीएसटी के माध्यम से हर छोटे-छोटे दुकानदार, व्यापारी व उद्यमी को सरकारी तंत्र द्वारा अनावश्यक तौर से शक की निगाह से देखा जा रहा है।
सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा सबसे ताजा प्रहार मंडियों में अव्यवहारिक ई-ट्रेडिंग तथा बगैर रजामंदी के फसल की डायरेक्ट पेमेंट प्रणाली को जबरदस्ती लागू करना है। पिछले वर्ष 22 सितंबर, 2016 को ई ट्रेडिंग व डायरेक्ट पेमेंट के विषय पर मंडियों के आढ़तियों के डेलिगेशन के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से विस्तारपूर्वक मंत्रणा हुई। आढ़तियों व व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को बताया था कि मंडियों में आने वाले धान के लिए ई-ट्रेडिंग प्रणाली अव्यवहारिक ही नहीं बल्कि असंभव भी है क्योंकि लगभग 20 प्रतिशत धान ही मंडियों में मानकों के अनुरूप आता है बाकी का धान ढेरी पर खड़े होकर उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करके ही खरीदार मौके पर खरीदता है। इसे मुख्यमंत्री ने भली भांति स्वीकार किया था। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद हरियाणा राज्य मार्केटिंग बोर्ड इसे दोबारा से लागू करने के आदेश जारी कर चुका है। इससे हरियाणा के लगभग 35 हजार आढ़ती व 70 हजार मुनीम सड़कों पर आ जाएंगे।
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सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि आढ़ती और किसान का वर्षों पुराना परम्परागत रिश्ता है। हरियाणा के आढ़तियों की एक और समस्या सरकार द्वारा जीएसटी नंबर की अनिवार्यता भी है। पंजाब में ऐसी कोई आवश्यकता नहीं तो हरियाणा में भाजपा ने यह शर्त क्यों रखी है? वो भी तब जब अनाज पर कोई टैक्स नहीं है। खट्टर सरकार आढ़तियों की मदद करने की बजाय उनका धंधा चौपट करने पर तुली है। क्या मुख्यमंत्री, मनोहर लाल खट्टर यह बताएंगे कि हरियाणा के आढ़तियों के जो 600 करोड़ रुपया निर्यातकों के पास फंसा पड़ा है, सरकार उसका भुगतान करवाने में छोटे-छोटे आढ़तियों की क्या मदद करेगी?
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