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Kaithal News: रोडवेज वर्कशॉप में कर्मचारियों के 147 पद खाली
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वर्कशॉप में मरम्मत के लिए खड़ी बसें। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रोडवेज डिपो की वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी के कारण बसों की मरम्मत और रखरखाव में परेशानी हो रही है। वर्कशॉप में 204 स्वीकृत पद हैं और मात्र 57 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 147 पद खाली पड़े हैं। तकनीकी स्टाफ की कमी के चलते बसों की नियमित जांच करने और खराबी दूर करने में परेशानी आती है। इसका असर मरम्मत कार्य की गति और बसों के संचालन पर पड़ रहा है।
वर्कशॉप में टायर बदलने, पंचर ठीक करने, कमानी की मरम्मत और गियर बॉक्स जैसी तकनीकी खराबियों को दूर करने का काम सीमित कर्मचारियों के सहारे किया जा रहा है। शाम को डिपो में लौटने वाली बसों की जांच कर उनकी खामियों को दूर करना भी जरूरी होता है, ताकि अगले दिन उन्हें निर्धारित रूटों पर भेजा जा सके। लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण सभी बसों का रखरखाव समय पर करना मुश्किल हो जाता है। मरम्मत में देरी होने पर संबंधित बस को लंबे समय तक वर्कशॉप में खड़ा रखना पड़ सकता है।
आईटीआई के प्रशिक्षुओं से लिया जा रहा काम
वर्कशॉप में नियमित कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए पहले आईटीआई के प्रशिक्षु विद्यार्थियों से भी काम लिए जाने की बात सामने आ चुकी है। हालांकि, बसों की तकनीकी खराबियां दूर करने के लिए अनुभवी कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। स्टाफ की कमी के चलते मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ता है। ऐसे में बसों की मरम्मत के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव का काम भी प्रभावित होने की आशंका रहती है।
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डिपो में 148 बसें, मरम्मत की जिम्मेदारी सीमित स्टाफ पर
कैथल रोडवेज डिपो में फिलहाल 148 बसें हैं। इन बसों को नियमित रूप से रूटों पर चलाने के लिए उनकी समय-समय पर जांच और मरम्मत जरूरी है। किसी बस में तकनीकी खराबी आने पर उसे जल्द दुरुस्त करना आवश्यक होता है, ताकि यात्रियों को निर्धारित समय पर परिवहन सुविधा मिल सके। वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी के कारण मरम्मत कार्य का दबाव सीमित स्टाफ पर है। बसों को समय पर तैयार नहीं कर पाने की स्थिति में रूटों पर उपलब्ध बसों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में वर्कशॉप के खाली पदों को भरना जरूरी है।
वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की मांग मुख्यालय को भेजी हुई है। बसों की मरम्मत में दिक्कत नहीं आने दी जा रही है और बसों की मरम्मत समय पर की जा रही है।
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कैथल। रोडवेज डिपो की वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी के कारण बसों की मरम्मत और रखरखाव में परेशानी हो रही है। वर्कशॉप में 204 स्वीकृत पद हैं और मात्र 57 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 147 पद खाली पड़े हैं। तकनीकी स्टाफ की कमी के चलते बसों की नियमित जांच करने और खराबी दूर करने में परेशानी आती है। इसका असर मरम्मत कार्य की गति और बसों के संचालन पर पड़ रहा है।
वर्कशॉप में टायर बदलने, पंचर ठीक करने, कमानी की मरम्मत और गियर बॉक्स जैसी तकनीकी खराबियों को दूर करने का काम सीमित कर्मचारियों के सहारे किया जा रहा है। शाम को डिपो में लौटने वाली बसों की जांच कर उनकी खामियों को दूर करना भी जरूरी होता है, ताकि अगले दिन उन्हें निर्धारित रूटों पर भेजा जा सके। लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण सभी बसों का रखरखाव समय पर करना मुश्किल हो जाता है। मरम्मत में देरी होने पर संबंधित बस को लंबे समय तक वर्कशॉप में खड़ा रखना पड़ सकता है।
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आईटीआई के प्रशिक्षुओं से लिया जा रहा काम
वर्कशॉप में नियमित कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए पहले आईटीआई के प्रशिक्षु विद्यार्थियों से भी काम लिए जाने की बात सामने आ चुकी है। हालांकि, बसों की तकनीकी खराबियां दूर करने के लिए अनुभवी कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। स्टाफ की कमी के चलते मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ता है। ऐसे में बसों की मरम्मत के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव का काम भी प्रभावित होने की आशंका रहती है।
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डिपो में 148 बसें, मरम्मत की जिम्मेदारी सीमित स्टाफ पर
कैथल रोडवेज डिपो में फिलहाल 148 बसें हैं। इन बसों को नियमित रूप से रूटों पर चलाने के लिए उनकी समय-समय पर जांच और मरम्मत जरूरी है। किसी बस में तकनीकी खराबी आने पर उसे जल्द दुरुस्त करना आवश्यक होता है, ताकि यात्रियों को निर्धारित समय पर परिवहन सुविधा मिल सके। वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी के कारण मरम्मत कार्य का दबाव सीमित स्टाफ पर है। बसों को समय पर तैयार नहीं कर पाने की स्थिति में रूटों पर उपलब्ध बसों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में वर्कशॉप के खाली पदों को भरना जरूरी है।
वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की मांग मुख्यालय को भेजी हुई है। बसों की मरम्मत में दिक्कत नहीं आने दी जा रही है और बसों की मरम्मत समय पर की जा रही है।