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139 परिवारों ने अपनों को गंवाया, अब तक हाथ में कुछ नहीं आया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 Jan 2021 10:44 PM IST
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139 families sitting
। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित डा. श्याम प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना में वर्ष 2020 में कोई बजट अलाटॅ नहीं किया गया है। जिस कारण जिले के 139 पात्र परिवार एक लाख रुपये की मदद का इंतजार कर रहे हैं। अब विभाग ने इस योजना को सरकार के आदेशानुसार वित्त विभाग में ट्रांसफर कर दिया है। जिस कारण यह सहायता राशि मिलने पर अब संशय पैदा हो गया है।
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जिले में 31 मार्च 2020 में के बाद से इस योजना के तहत कोई बजट अलॉट नहीं किया गया है। 139 लोगों की अलग अलग हादसों में हुई मौत के बाद इनके आश्रितों ने आवेदन किया है। इनमें से कई ऐसे परिवार हैं, जिनका गुजारा मुश्किल से ही चल रहा है और एक लाख रुपये की मदद उनके लिए बड़ी मदद हो सकती है। ये परिवार इस सहायता राशि के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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परिवार का था इकलौता सहारा
नरड़ निवासी रामनिवास ने बताया कि उसके बहनोई सिणद गांव निवासी रामबुल (30) की धनौरी के निकट सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वे मुनीमी का काम करते थे। न उनका भाई है और न ही पिता। जिस कारण परिवार में अकेले कमाने वाले थे। छह व आठ साल के दो बच्चे हैं। उसकी बहन गोमती देवी और उनकी सास दूध आदि बेचकर काम चला रही हैं। सहायता राशि मिल जाती है तो परिवार को कुछ राहत मिलेगी।
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इकलौते बेटे के बाद योजना के सहारे
गांव कवारतन के रहने वाले गुरमीत सिंह ने बताया कि उसके अविवाहित बेटे अमनजोत की समाधां के पास अगस्त माह में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। मां-बाप उसी के सहारे थे। वह ड्राइवर के तौर पर काम करता था। परिवार जरूरतमंद है। यदि योजना की सहायता राशि मिल जाती है तो परिवार की काफी मदद हो जाएगी।
सरकार से की सहायता राशि देने की मांग
गांव किठाना निवासी जितेंद्र ने बताया कि उसके भाई बलिंद्र की बेल्लरखां में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह पेंटर का काम करता था। उसके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। बलिंद्र ही परिवार चलाता था। उसके इलाज पर भी साढ़े चार लाख रुपये का खर्च आया था। लेकिन अब यदि योजना को बंद कर दिया गया तो उन्हें एक लाख रुपये की सहायता राशि भी नहीं मिल पाएगी। सरकार से मांग है कि यह राशि दी जाए।
सहायता राशि मिले तो हो परिवार की मदद
आंहू निवासी विक्रम ने बताया कि वह और उसकी पत्नी मधुबाला मजदूरी करके परिवार चलाते थे। उसकी पत्नी की गांव चंदलाना के निकट हादसे में मौत हो गई थी। जिसके लिए उसने सहायता राशि के लिए आवेदन किया हुआ है। उसकी मांग है कि यह आवेदन जल्द स्वीकार किया जाए। ताकि परिवार की मदद हो सके।

जिला समाज कल्याण अधिकारी कुलदीप सिंह ने बताया कि जिले में वर्ष 2020 में इस योजना के तहत बजट नहीं आया। जिस कारण किसी परिवार के आवेदन पर सहायता राशि जारी नहीं हुई है। अब विभाग की ओर से सूचित किया गया है कि योजना में पूरे साल बजट न मिलने पर पूरी योजना को वित्त विभाग भेज दिया गया है। आगे वहीं से इस बारे में जानकारी मिल सकेगी कि आवेदनों का क्या होगा। अभी तक 31 मार्च 2020 के बाद जिले में 139 आवेदन आए हैं।
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