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नवरात्रों के पहले दिन कलश स्थापना कर शुरु किए व्रत

Mon, 19 Mar 2018 12:12 AM IST
Updated Mon, 19 Mar 2018 12:12 AM IST
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नवरात्रों के पहले दिन कलश स्थापना कर शुरु किए व्रत
चैत्र नवरात्र : पहले दिन श्रद्धालुओं ने की मां शैलपुत्री की आराधना
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रविवार को चैत्र नवरात्र शुरू हुए। नवरात्र के पहले दिन सुबह चार बजे ही शहर भर में मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ना शुरू हो गई। पहले दिन मां भगवती की आराधना करते हुए कलश की स्थापना की। शहर में स्थित बड़ी देवी और छोटी देवी मंदिर को भव्य ढंग से सजाया गया। इन मंदिरों में मां के भक्तों की लंबी लंबी कतारें लगी रही। पहले दिन के नवरात्र पर मां शैलपुत्री की पूजा हुई। मां शैलपुत्री चैत्र नवरात्र की प्रथम आराध्य देवी है।

देवी मंदिर में लगा श्रद्धालुओं का तांता
पूंडरी। मनसा देवी मंदिर फतेहपुर में पहले दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। फतेहपुर स्थित इस देवी मंदिर की दूर-दूर तक मान्यता है। कहते हैं कि जो भी सच्चे दिल से यहां अपनी मुराद लेकर आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यहां कोई नंगे पांव आता है तो कोई घुटनों के बल आता है। यह मंदिर सिद्धपीठ के नाम से भी जाना जाता है। यहां लोगों का यह भी विश्वास है कि जो भी भगत इस मंदिर में सच्ची श्रद्धा से कोई भी मन्नत मांगता है वह पूरी हो जाती है। माता मनसा देवी मंदिर के पुजारी देवेंद्र शर्मा ने बताया कि यह 20 गांवों की कुल देवी है और यहां पर इस मंदिर में 7वें व 8वें नवरात्र वाले दिन एक विशाल मेला भी लगता है।
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मंदिर में गूंजे जय माता दी के जयकारे
राजौंद। रविवार को सुबह चार बजे से ही दुर्गा मंदिर, भद्रकाली मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, गांव में स्थित बाबा बहादुर बण मंदिर में भक्तों ने पहुंचकर पूजा अर्चना कर मां जगदम्बे भवानी से मंगल कामना की प्रार्थना की। नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिरों को खूब सजाया गया है। श्रद्धालुओं द्वारा नवरात्र के प्रथम दिन नवदुर्गा में प्रथम रूप में शैलपुत्री की पूजा अर्चना की गई। मंदिर पुजारी ने बताया कि मां के बारे में ब्रह्मा ने स्वयं मार्कंडेय से कहा कि देवी शैलपुत्री गिरी राज हिमालय की पुत्री पार्वती देवी है।
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शतचंडी यज्ञ का शुभारंभ
राजौंद। बाबा बहादुर बन मंदिर में सात दिवसीय शतचंडी यज्ञ का आयोजन किया गया। महंत तेज गिरी ने बताया कि 18 मार्च प्रथम नवरात्र से मंदिर में 7 ब्राह्मणों द्वारा सत चंडी पाठ आरंभ किया गया है। जो सात दिन तक निर्बाध रूप से चलेगा। आचार्य बृजभूषण शर्मा ने बताया कि पूरे सात दिन तक मंदिर प्रांगण में नगरवासियों की श्रद्धा व आस्था के चलते पूजन कार्यक्रम करवाया जाएगा। दुर्गा अष्टमी के उपलक्ष में हवन यज्ञ के साथ सत चंडी यज्ञ का समापन होगा व इस दिन कन्याओं का पूजन होगा। उन्होंने बताया कि यज्ञ के माध्यम से जो पूजा अर्चना का एक मात्र उद्देश्य नगर में सुख शांति व अमन चैन को बनाए रखने के लिए मां भगवती से प्रार्थना करना है। उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्रों का यह आठवां शतचंडी यज्ञ का आयोजन करवाया जा रहा है। जिसमें नगर के सभी लोगों का बढ़-चढकर योगदान मिल रहा है। लोगों की यह श्रद्धा यज्ञ की सफलता व महता को और भी अहम बना रही है। इस दौरान पंडित दीपक हरित, धमेंद्र हरित, जयदेव कौशल, महावीर दीक्षित, नवीन कौशल, मदन हरित ने भाग लिया।


शहर के मंदिरों में सुबह चार बजे से ही शुरू हुई मां भगवती की पूजा अर्चना, कलश स्थापना कर शुरू किए व्रत
फोटो नंबर-02,28,29
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