फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   शहर में डिफेसमेंट एक्ट की उड़ रही हैं धज्जियां

शहर में डिफेसमेंट एक्ट की उड़ रही हैं धज्जियां

Sat, 10 Feb 2018 11:33 PM IST
Updated Sat, 10 Feb 2018 11:33 PM IST
विज्ञापन
शहर में डिफेसमेंट एक्ट की उड़ रही हैं धज्जियां
न कोई मंजूरी, न कोई दी फीस, पोस्टरों से पाट दिए शहर
विज्ञापन

नसीब सैनी
कैथल। शहर में आपको हर सार्वजनिक हो या निजी प्रतिष्ठानों पर सड़कों और चौक-चौराहों से निकलते हुए पोस्टर व बड़े-बड़े बैनर दिखाई दे रहे हैं। इनके माध्यम से निजी कंपनियां अपना प्रचार-प्रसार कर रही हैं। इसके लिए उन्हें नगर परिषद में एक निर्धारित फीस जमा करवानी होती है। लेकिन अधिकतर होर्डिंग्स व बैनर्स के लिए परिषद में कोई फीस जमा नहीं हो रही हैं। मुख्य 35 साइटों के लिए ही पिछले साल 36 लाख रुपये में टेंडर छोड़ा गया था। सहयोग ना करने के कारण ठेकेदार समय पूरा होने से पहले ही ठेका छोड़ गया। प्रचार-प्रसार के लिए अब पैसा किसकी जेब में जा रहा है। यह बड़ी जांच का विषय है। निजी प्रॉपर्टी या सार्वजनिक स्थानों पर लग रहे पोस्टरों या बैनर्स के लिए परिषद में निर्धारित फीस जमा करवाई जाए तो आर्थिक तंगी से जूझ रही परिषद को बड़ी आमदनी हो सकती है।
बिना अनुमति के निजी प्रॉपर्टी पर भी नहीं लगाई जा सकती प्रचार सामग्री
डिफेसमेंट एक्ट के अनुसार शहर में बिना अनुमति के निजी प्रॉपर्टी पर भी प्रचार सामग्री नहीं लगाई जा सकती। सार्वजनिक प्रापॅर्टी पर लगाने के लिए तो अनुमति लेनी ही पड़ती है। लेकिन शहर में सड़कों व चौक-चौराहों पर हर जगह बड़े-बड़े पोस्टर व बैनर लगे हैं। इनके लिए कोई फीस जमा नहीं हो रही है। डिफेसमेंट एक्ट का सरेआम उल्लंघन हो रहा है।
विज्ञापन


35 साइटों के लिए 36 लाख रुपये में छूटा था ठेका
इन पोस्टरों से होने वाली आय का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में मुख्य सिर्फ 35 साइटों के लिए नगर परिषद ने 36 लाख रुपये में टेंडर छोड़ा था। लेकिन ठेकेदार ने तीन माह पहले इसे इसीलिए छोड़ दिया कि परिषद के अधिकारियों ने अवैध रूप से लगाए जा रहे बैनर्स व पोस्टर्स को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। जब ठेकेदार ठेका छोड़ गया तो कुछेक जगहों से अब जाकर परिषद अधिकारियों ने पोस्टर व बैनर उतरवाए। ठेकेदार ने कहा कि उसने इतना महंगा ठेका लिया था, लेकिन अवैध साइटों पर परिषद ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस कारण उसे अपनी राशि पूरी करनी भी मुश्किल हो रही थी। जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो ठेका छोड़ना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

परिषद को इस मद में लाखों रुपये की आय हो सकती है। अब सवाल उठता है कि ना तो तीन माह से मुख्य 35 साइटों के लिए ठेके को दोबारा छोड़ा जा रहा और ना ही अवैध साइटों पर लगे बैनर्स या पोस्टर्स के लिए फीस परिषद में जमा हो रही। फिर इसकी एवज में पैसा किसकी जेब में जा रहा है। यह बड़ी जांच का विषय है।

परिषद में सक्रिय हैं कई दलाल, उनके माध्यम से हो रही है उगाही
सूत्रों ने बताया कि इस काम में कई दलाल सक्रिय हैं। जो अवैध साइटों पर प्रचार करने वालों से उगाही करते हैं और परिषद में किसी ना किसी कर्मचारी या अधिकारी की जेब गर्म करते हैं। हालांकि इस बारे में पुष्टि नहीं हो पाई। शहरवासी जयदेव ने इस मामले में सीएम विंडो में शिकायत भी दी है।

--------
इस बारे में जानकारी नहीं है। ठेकेदार ने ठेका कब छोड़ा, यह कागजात देखकर ही बताया जा सकता है। आधिकारिक वक्तव्य ईओ ही जारी कर सकते हैं।
- कुलदीप मलिक, सचिव, नगर परिषद
--
यह बात उनकी जानकारी में नहीं है कि ठेका छोड़ा गया है या नहीं। फीस ली जा रही है या नहीं। नगर परिषद के अधिकारियों से इस बारे में रिपोर्ट ली जाएगी। क्यों नहीं टेंडर छोड़ा जा रहा और फीस जमा करवाई जा रही?
- सुनीता वर्मा, डीसी, कैथल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed