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जाति ही नहीं उप-जाति व गौत्र भी बताना होगा कर्मचारियों को..
Updated Tue, 10 Oct 2017 11:59 PM IST
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जाति ही नहीं उप-जाति व गोत्र भी बताना होगा कर्मचारियों को
सॉफ्टवेयर के माध्यम से कर्मचारियों की जातीय गणना
सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश
सॉफ्टवेयर में कर्मचारी का नाम, पद व जाति भरें
90 विभागों के कर्मचारियों का जिले में जुटाया जाना है डाटा सरकार के आदेशानुसार जातीय गणना करवा रहा है प्रशासन
नसीब सैनी
कैथल।
सरकार के निर्देशानुसार एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रदेश के कर्मचारियों की जाति की गणना की जा रही है। शीघ्र ही यह रिपोर्ट फाइनल होकर सरकार को भेज दी जाएगी। जिले के 90 विभागों के विभागाध्यक्षों को इस सॉफ्टवेयर में अपने कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों का ब्यौरा देने को कहा है। जिसमें न केवल जाति बल्कि उप-जाति व गोत्र तक की जानकारी देने को कहा गया है। पिछले तीन दिनों में जिले के अधिकतर विभागों ने यह जानकारी भेज दी है।
सरकार ने किया था कर्मचारियों की जाति अनुसार गणना का एलान
सरकार ने पिछले दिनों एलान किया था कि प्रदेश में कर्मचारियों की जाति की गणना की जाएगी। ताकि पता चल सके कि किस जाति के कितने कर्मचारी व अधिकारी कार्यरत हैं। इस फैसले का कुछ लोग जहां विरोध कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इस फैसले का स्वागत भी कर रहे हैं।
सॉफ्टवेयर में करवाया जा रहा है अपडेट
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सरकार ने एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बनाया है। जिसमें विभागानुसार व्यवस्था करते हुए उसमें जाति संबंधी जानकारी अपडेट करने के लिए कहा गया है। बताया जा रहा है कि 10 अक्टूबर तक यह जानकारी मांगी गई थी। जिसे अधिकतर विभागों ने अपलोड कर दिया है।
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ऐसे दी जा रही है जानकारी
कंप्यूटर में बनाए गए इस परफॉर्मा में सबसे पहले कर्मचारी का नाम, फिर पद, फिर विभाग एवं अंत में जाति का विवरण दिया जाना है। एक विभाग के सभी कर्मचारियों की जानकारी के बाद संबंधित विभाग के मुखिया द्वारा यह जानकारी विभाग मुख्यालय में प्रेषित की जानी है।
उप-जाति व गोत्र तक की जानकारी ली जा रही है
एक अधिकारी ने बताया कि सरकार के अनुसार जो निर्देश हैं, उसमें केवल जाति ही नहीं बल्कि संबंधित कर्मचारी या अधिकारी की जाति के आगे उप-जाति के साथ-साथ उसका गोत्र क्या है। इसकी जानकारी भी मांगी है। उदाहरण के लिए यदि ब्राह्मण जाति हैं तो इसमें आगे उप-जाति या गोत्र भारद्वाज है या फिर कौशिक है। इस तरह की तमाम जानकारी दी जा रही है। जानकारी के साथ ही संबंधित कर्मचारी को खुद के हस्ताक्षर कर सत्यापित करना है कि उसने पूरी जानकारी सही दी है।
जिले में 90 से अधिक विभागों को आदेश जारी
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 90 से अधिक विभागों में विभागाध्यक्षों को ये आदेश जारी किए गए हैं। जिसमें शीघ्रता से उन्हें अपने विभाग की जानकारी लेकर सरकार को भेजनी है।
फैसले के विरोध व पक्ष में दिए जा रहे हैं तर्क
सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले के विरोध व पक्ष में तर्क दिए जा रहे हैं। विरोधी खेमे का कहना है कि सरकार को जाति-पाति में नहीं पड़ना चाहिए। वहीं इसका पक्ष ले रहे लोगों का कहना है कि इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि कौन सी जाति के लोग ज्यादा सरकारी नौकरी में हैं और कौन सी जाति सरकारी नौकरियों से ज्यादा वंचित है।
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सॉफ्टवेयर के माध्यम से कर्मचारियों की जातीय गणना
सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश
सॉफ्टवेयर में कर्मचारी का नाम, पद व जाति भरें
90 विभागों के कर्मचारियों का जिले में जुटाया जाना है डाटा सरकार के आदेशानुसार जातीय गणना करवा रहा है प्रशासन
नसीब सैनी
कैथल।
सरकार के निर्देशानुसार एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रदेश के कर्मचारियों की जाति की गणना की जा रही है। शीघ्र ही यह रिपोर्ट फाइनल होकर सरकार को भेज दी जाएगी। जिले के 90 विभागों के विभागाध्यक्षों को इस सॉफ्टवेयर में अपने कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों का ब्यौरा देने को कहा है। जिसमें न केवल जाति बल्कि उप-जाति व गोत्र तक की जानकारी देने को कहा गया है। पिछले तीन दिनों में जिले के अधिकतर विभागों ने यह जानकारी भेज दी है।
सरकार ने किया था कर्मचारियों की जाति अनुसार गणना का एलान
सरकार ने पिछले दिनों एलान किया था कि प्रदेश में कर्मचारियों की जाति की गणना की जाएगी। ताकि पता चल सके कि किस जाति के कितने कर्मचारी व अधिकारी कार्यरत हैं। इस फैसले का कुछ लोग जहां विरोध कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इस फैसले का स्वागत भी कर रहे हैं।
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सॉफ्टवेयर में करवाया जा रहा है अपडेट
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सरकार ने एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बनाया है। जिसमें विभागानुसार व्यवस्था करते हुए उसमें जाति संबंधी जानकारी अपडेट करने के लिए कहा गया है। बताया जा रहा है कि 10 अक्टूबर तक यह जानकारी मांगी गई थी। जिसे अधिकतर विभागों ने अपलोड कर दिया है।
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ऐसे दी जा रही है जानकारी
कंप्यूटर में बनाए गए इस परफॉर्मा में सबसे पहले कर्मचारी का नाम, फिर पद, फिर विभाग एवं अंत में जाति का विवरण दिया जाना है। एक विभाग के सभी कर्मचारियों की जानकारी के बाद संबंधित विभाग के मुखिया द्वारा यह जानकारी विभाग मुख्यालय में प्रेषित की जानी है।
उप-जाति व गोत्र तक की जानकारी ली जा रही है
एक अधिकारी ने बताया कि सरकार के अनुसार जो निर्देश हैं, उसमें केवल जाति ही नहीं बल्कि संबंधित कर्मचारी या अधिकारी की जाति के आगे उप-जाति के साथ-साथ उसका गोत्र क्या है। इसकी जानकारी भी मांगी है। उदाहरण के लिए यदि ब्राह्मण जाति हैं तो इसमें आगे उप-जाति या गोत्र भारद्वाज है या फिर कौशिक है। इस तरह की तमाम जानकारी दी जा रही है। जानकारी के साथ ही संबंधित कर्मचारी को खुद के हस्ताक्षर कर सत्यापित करना है कि उसने पूरी जानकारी सही दी है।
जिले में 90 से अधिक विभागों को आदेश जारी
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 90 से अधिक विभागों में विभागाध्यक्षों को ये आदेश जारी किए गए हैं। जिसमें शीघ्रता से उन्हें अपने विभाग की जानकारी लेकर सरकार को भेजनी है।
फैसले के विरोध व पक्ष में दिए जा रहे हैं तर्क
सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले के विरोध व पक्ष में तर्क दिए जा रहे हैं। विरोधी खेमे का कहना है कि सरकार को जाति-पाति में नहीं पड़ना चाहिए। वहीं इसका पक्ष ले रहे लोगों का कहना है कि इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि कौन सी जाति के लोग ज्यादा सरकारी नौकरी में हैं और कौन सी जाति सरकारी नौकरियों से ज्यादा वंचित है।