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चीका से उठी आवाज से जागी हरियाणा सरकार
Updated Thu, 19 Apr 2018 12:48 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। आठवीं क्लास की पांचवीं की पंजाबी की पुस्तक में गुरु तेग बहादुर साहिब की जीवनी फिर शामिल हो गई है। मौलिक शिक्षा विभाग हरियाणा ने 2016-17 के सेशन में गुरू जी के जीवन संबंधी पाठ को इस किताब से हटा दिया था। गुहला के एक सरकारी अध्यापक ने इसके खिलाफ संघर्ष शुरू किया तो शुरू में किसी ने भी नोटिस नहीं लिया। पर वक्त बीतते बीतते एक अकेली आवाज इतनी बुलंद हो गई कि सरकार को गलती का अहसास हो गया और उसने नए सत्र से गुरू साहिब का हटाया गया पाठ दोबारा किताब में शामिल करने के आदेश दे दिए। आठवीं के बच्चे इस साल से 24 वें पाठ के रूप में हिंद की चादर गुरू तेग बहादुर का जीवन परिचय पढ़ेंगे।
गुहला के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पंजाबी पढ़ाने वाले लफटैन सिंह ने बताया कि 2016 में जब पंजाबी की नई किताबें आई तो यह देखकर वे सन्न रह गए कि किताब से परिवर्तन के नाम पर बहुत से महत्वपूर्ण चैप्टर हटा दिए गए हैं। हटाए गए पाठों में गुरु तेग बहादुर साहिब की जीवनी भी शामिल थी। लफटैन सिंह ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले पंजाबी अध्यापकों के अपने संगठन की प्रदेश कार्यकारिणी से चर्चा की कि अगर विद्यार्थी पंजाबी में ही गुरु साहिबान की जीवनियां नहीं पढ़ेंगे तो फिर कौन से विषय के तहत पढ़ पाएंगे। लफटैन सिंह ने कहा कि अध्यापक संगठन की तरफ से जब कोई सहयोग नहीं मिला तो उन्होंने रोष स्वरूप अपने संगठन के प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दे दिया और अकेले ही लड़ाई लड़ने की ठान ली।
पंजाबी शिक्षक लफटैन सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले पहल तो सीएम हरियाणा तथा शिक्षा मंत्री हरियाणा को पत्र लिखे। एसजीपीसी अमृतसर से भी संपर्क साधा और हरियाणा सिख गुरुद्वारा मेनेजमेंट के प्रमुख जगदीश सिंह झींडा व कार्यकारिणी सदस्य अवतार सिंह चक्कू से भी सहयोग मांगा। लफटैन सिंह ने बताया कि उन्होंने भाजपा विधायक कुलवंत बाजीगर को भी ज्ञापन सौंपा और पिहोवा से इनेलो के सिख विधायक जसविंद्र सिंह बिल्ला से भी इस मामले को विधान सभा में उठाने की अपील की। लफटैन सिंह ने बताया कि पंजाब के अकाली नेता प्रेम सिंह चंदुमाजरा खुद सीएम मनोहर लाल से मिलकर आए तो पंजाबी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह विर्क ने भी सरकार में अनेक स्तरों पर गुरू तेग बहादुर की जीवनी आठवीं क्लास के सलेबस में पुन: शामिल करने की मांग उठाई।
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लफटैन सिंह बताया कि एक साल के संघर्ष के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब राष्ट्रीय सिख संगत जैसे संगठन स्वयं स्फूर्त ढंग से इस मांग को उठाने लगे। राष्ट्रीय सिख संगत के हरजीत सिंह मोंगा, जसबीर सिंह, प्रो. कर्णदीप सिंह, सरबजीत सिंह आदि की अगुवाई में कई बार जत्थे सीएम मनोहर लाल खट्टर से मिले और इस बात को पुरजोर शब्दों में उठाया कि गुरू तेग बहादुर व अन्य सिख गुरूओं की जीवनियां पंजाबी की पाठ्य पुस्तकों में शामिल की जाएं।
लफटैन सिंह ने पंजाबी की नई पाठ्य पुस्तक उड़ान को लेकर चीका चौक स्थित गुरूद्वारा श्री गुरू तेग बहादुर शहीदी मार्ग साहिब में माथा टेका व संशोधित पुस्तक उड़ान गुरूद्वारा साहिब के ग्रंथी को भेंट की। लफटैन सिंह ने कहा कि कहा कि बेशक किसी को पाठ का हटना और शामिल होना एक साधारण बात लगती तो पर एक पंजाबी शिक्षक होने के नाते उन्हें यह सम्मान और अस्मिता की रक्षा की लड़ाई लगती थी जो कि प्रभु कृपा से सफल भी हो गई।
चीका से उठी आवाज से जागी हरियाणा सरकार
आखिर आठवीं की किताब में शामिल हो गई गुरु की जीवनी
मौलिक शिक्षा विभाग ने 2016 में पंजाबी की पुस्तक से निकाल दिया था गुरु तेग बहादुर से संबंधित पाठ
फोटो संख्या-1
गुहला-चीका। आठवीं क्लास की पांचवीं की पंजाबी की पुस्तक में गुरु तेग बहादुर साहिब की जीवनी फिर शामिल हो गई है। मौलिक शिक्षा विभाग हरियाणा ने 2016-17 के सेशन में गुरू जी के जीवन संबंधी पाठ को इस किताब से हटा दिया था। गुहला के एक सरकारी अध्यापक ने इसके खिलाफ संघर्ष शुरू किया तो शुरू में किसी ने भी नोटिस नहीं लिया। पर वक्त बीतते बीतते एक अकेली आवाज इतनी बुलंद हो गई कि सरकार को गलती का अहसास हो गया और उसने नए सत्र से गुरू साहिब का हटाया गया पाठ दोबारा किताब में शामिल करने के आदेश दे दिए। आठवीं के बच्चे इस साल से 24 वें पाठ के रूप में हिंद की चादर गुरू तेग बहादुर का जीवन परिचय पढ़ेंगे।
गुहला के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पंजाबी पढ़ाने वाले लफटैन सिंह ने बताया कि 2016 में जब पंजाबी की नई किताबें आई तो यह देखकर वे सन्न रह गए कि किताब से परिवर्तन के नाम पर बहुत से महत्वपूर्ण चैप्टर हटा दिए गए हैं। हटाए गए पाठों में गुरु तेग बहादुर साहिब की जीवनी भी शामिल थी। लफटैन सिंह ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले पंजाबी अध्यापकों के अपने संगठन की प्रदेश कार्यकारिणी से चर्चा की कि अगर विद्यार्थी पंजाबी में ही गुरु साहिबान की जीवनियां नहीं पढ़ेंगे तो फिर कौन से विषय के तहत पढ़ पाएंगे। लफटैन सिंह ने कहा कि अध्यापक संगठन की तरफ से जब कोई सहयोग नहीं मिला तो उन्होंने रोष स्वरूप अपने संगठन के प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दे दिया और अकेले ही लड़ाई लड़ने की ठान ली।
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पंजाबी शिक्षक लफटैन सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले पहल तो सीएम हरियाणा तथा शिक्षा मंत्री हरियाणा को पत्र लिखे। एसजीपीसी अमृतसर से भी संपर्क साधा और हरियाणा सिख गुरुद्वारा मेनेजमेंट के प्रमुख जगदीश सिंह झींडा व कार्यकारिणी सदस्य अवतार सिंह चक्कू से भी सहयोग मांगा। लफटैन सिंह ने बताया कि उन्होंने भाजपा विधायक कुलवंत बाजीगर को भी ज्ञापन सौंपा और पिहोवा से इनेलो के सिख विधायक जसविंद्र सिंह बिल्ला से भी इस मामले को विधान सभा में उठाने की अपील की। लफटैन सिंह ने बताया कि पंजाब के अकाली नेता प्रेम सिंह चंदुमाजरा खुद सीएम मनोहर लाल से मिलकर आए तो पंजाबी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह विर्क ने भी सरकार में अनेक स्तरों पर गुरू तेग बहादुर की जीवनी आठवीं क्लास के सलेबस में पुन: शामिल करने की मांग उठाई।
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लफटैन सिंह बताया कि एक साल के संघर्ष के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब राष्ट्रीय सिख संगत जैसे संगठन स्वयं स्फूर्त ढंग से इस मांग को उठाने लगे। राष्ट्रीय सिख संगत के हरजीत सिंह मोंगा, जसबीर सिंह, प्रो. कर्णदीप सिंह, सरबजीत सिंह आदि की अगुवाई में कई बार जत्थे सीएम मनोहर लाल खट्टर से मिले और इस बात को पुरजोर शब्दों में उठाया कि गुरू तेग बहादुर व अन्य सिख गुरूओं की जीवनियां पंजाबी की पाठ्य पुस्तकों में शामिल की जाएं।
लफटैन सिंह ने पंजाबी की नई पाठ्य पुस्तक उड़ान को लेकर चीका चौक स्थित गुरूद्वारा श्री गुरू तेग बहादुर शहीदी मार्ग साहिब में माथा टेका व संशोधित पुस्तक उड़ान गुरूद्वारा साहिब के ग्रंथी को भेंट की। लफटैन सिंह ने कहा कि कहा कि बेशक किसी को पाठ का हटना और शामिल होना एक साधारण बात लगती तो पर एक पंजाबी शिक्षक होने के नाते उन्हें यह सम्मान और अस्मिता की रक्षा की लड़ाई लगती थी जो कि प्रभु कृपा से सफल भी हो गई।
चीका से उठी आवाज से जागी हरियाणा सरकार
आखिर आठवीं की किताब में शामिल हो गई गुरु की जीवनी
मौलिक शिक्षा विभाग ने 2016 में पंजाबी की पुस्तक से निकाल दिया था गुरु तेग बहादुर से संबंधित पाठ
फोटो संख्या-1