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रूस की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने वाले को सरकार से मदद की दरकार
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:11 AM IST
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रूस की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने वाले को सरकार से मदद की दरकार
अमर उजाला ब्यूरो
पाई। पाई के विक्रम पांचाल ने रूस की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराकर पाई का नाम रोशन किया है। अभी उसे वहां नकद राशि की जरूरत है। ताकि वह साउथ अफ्रीका की चोटी पर तिरंगा लहरा सके। उसे सहायता नहीं मिली तो वापस लौटना पड़ेगा।
विक्रम के भाई प्रदीप पांचाल ने बताया कि रूस की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने में उनकी तीन सदस्यीय टीम थी। जिसमें जम्मू कश्मीर से महिला सोमिय घौसा, राजस्थान से रतना हुड्डा शामिल थी। उनकी टीम द्वारा रूस की सबसे ऊंची चोटी माउंट इलबुरेश के लिये 28 जुलाई को चढ़ाई शुरू की थी। वे एक अगस्त को सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचे और तिरंगा लहराया। अब वे वहां से नीचे उतर कर आ गये। अब उनकी टीम साउथ अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी तनजानिया में देश की तिरंगा लहराना चाहती है। उसने बताया कि विक्रम के पास जो राशि थी, वह समाप्त हो गई है और उसको सरकार की तरफ से अभी तक कुछ भी सहायता नहीं मिली है। जबकि उसके साथ गई दो साथियों को जम्मू कश्मीर व राजस्थान सरकार के द्वारा हर प्रकार से सहायता की जा रही है। जिसके कारण वे दोनों तिरंगा लहराने के लिये आगे साउथ अफ्रीका जाएंगे और विक्रम को वापस भारत आना पड़ेगा। उसने भी सहायता की अपील की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पाई। पाई के विक्रम पांचाल ने रूस की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराकर पाई का नाम रोशन किया है। अभी उसे वहां नकद राशि की जरूरत है। ताकि वह साउथ अफ्रीका की चोटी पर तिरंगा लहरा सके। उसे सहायता नहीं मिली तो वापस लौटना पड़ेगा।
विक्रम के भाई प्रदीप पांचाल ने बताया कि रूस की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने में उनकी तीन सदस्यीय टीम थी। जिसमें जम्मू कश्मीर से महिला सोमिय घौसा, राजस्थान से रतना हुड्डा शामिल थी। उनकी टीम द्वारा रूस की सबसे ऊंची चोटी माउंट इलबुरेश के लिये 28 जुलाई को चढ़ाई शुरू की थी। वे एक अगस्त को सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचे और तिरंगा लहराया। अब वे वहां से नीचे उतर कर आ गये। अब उनकी टीम साउथ अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी तनजानिया में देश की तिरंगा लहराना चाहती है। उसने बताया कि विक्रम के पास जो राशि थी, वह समाप्त हो गई है और उसको सरकार की तरफ से अभी तक कुछ भी सहायता नहीं मिली है। जबकि उसके साथ गई दो साथियों को जम्मू कश्मीर व राजस्थान सरकार के द्वारा हर प्रकार से सहायता की जा रही है। जिसके कारण वे दोनों तिरंगा लहराने के लिये आगे साउथ अफ्रीका जाएंगे और विक्रम को वापस भारत आना पड़ेगा। उसने भी सहायता की अपील की है।
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