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युनिवर्सिटी एज ए साइट ऑफ रेसिस्टेंटस नामक पुस्तक पर व्याख्यान आयोजित
Updated Sun, 02 Dec 2018 12:27 AM IST
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वर्तमान भारतीय व्यवस्था में विश्वविद्यालयों की प्रासंगिकता एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला
यूनिवर्सिटी एज ए साइट ऑफ रेसिस्टेंट्स नामक पुस्तक पर व्याख्यान आयोजित
फोटो नंबर-16
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग एवं राजनीतिक शास्त्र विभाग की ओर से यूनिवर्सिटी एज ए साइट ऑफ रेसिस्टेंट्स नामक पुस्तक पर व्याख्यान आयोजित किया गया। जो वाशिंगटन डीसी विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्राध्यापक प्रोफेसर गौरव पठानियां ने लिखी है। इसमें वर्तमान भारतीय व्यवस्था में विश्वविद्यालयों की प्रासंगिकता एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया हैं।
उन्होंने विचार व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय स्तर पर ही छात्र एवं प्रध्यापकगण संवेदनशील, जनतांत्रिक व विचारशील समाज का आधार तैयार कर सकते हैं। उन्होंने पिछले कुछ समय में विभिन्न विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रतिरोध एवं संघर्षों का वर्णन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालय एक ऐसे संस्थान के रूप में उभरे जहां पूर्वाग्रह रहित विचार मंथन, एवं समाज के वंचित वर्गों की मानवीय गरिमा स्थापित करने वाले बने। प्रोफेसर एलएम मदान ने भारत-पाक विभाजन एवं शरणार्थी समस्या से उत्पन्न मानसिक यंत्रणा पर प्रकाश डाला। डा राजबीर पाराशर ने कहा कि वर्तमान में विचारों की टकराव व कड़वाहट की वजह दरअसल समाज के बौद्धिक तबके में लंबे समय से भिन्न विचारधारा व पक्ष को पर्याप्त जगह न देना भी है। इस अवसर पर प्रो सीमा, प्रो जयबीर धारीवाल, प्रो. अनिल नरूला, प्रो. विकास भारद्वाज, प्रोफेसर श्री ओम, डॉ. अशोक अत्रि, प्रो. अंजली, प्रो. सुरेंद्र, प्रोफेसर मंजूला, प्रो. कुलदीप उपस्थित रहे।
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यूनिवर्सिटी एज ए साइट ऑफ रेसिस्टेंट्स नामक पुस्तक पर व्याख्यान आयोजित
फोटो नंबर-16
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग एवं राजनीतिक शास्त्र विभाग की ओर से यूनिवर्सिटी एज ए साइट ऑफ रेसिस्टेंट्स नामक पुस्तक पर व्याख्यान आयोजित किया गया। जो वाशिंगटन डीसी विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्राध्यापक प्रोफेसर गौरव पठानियां ने लिखी है। इसमें वर्तमान भारतीय व्यवस्था में विश्वविद्यालयों की प्रासंगिकता एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया हैं।
उन्होंने विचार व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय स्तर पर ही छात्र एवं प्रध्यापकगण संवेदनशील, जनतांत्रिक व विचारशील समाज का आधार तैयार कर सकते हैं। उन्होंने पिछले कुछ समय में विभिन्न विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रतिरोध एवं संघर्षों का वर्णन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालय एक ऐसे संस्थान के रूप में उभरे जहां पूर्वाग्रह रहित विचार मंथन, एवं समाज के वंचित वर्गों की मानवीय गरिमा स्थापित करने वाले बने। प्रोफेसर एलएम मदान ने भारत-पाक विभाजन एवं शरणार्थी समस्या से उत्पन्न मानसिक यंत्रणा पर प्रकाश डाला। डा राजबीर पाराशर ने कहा कि वर्तमान में विचारों की टकराव व कड़वाहट की वजह दरअसल समाज के बौद्धिक तबके में लंबे समय से भिन्न विचारधारा व पक्ष को पर्याप्त जगह न देना भी है। इस अवसर पर प्रो सीमा, प्रो जयबीर धारीवाल, प्रो. अनिल नरूला, प्रो. विकास भारद्वाज, प्रोफेसर श्री ओम, डॉ. अशोक अत्रि, प्रो. अंजली, प्रो. सुरेंद्र, प्रोफेसर मंजूला, प्रो. कुलदीप उपस्थित रहे।
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