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‘कोई ये तो बता दो एक मां के कलेजे को ठंड कैसे पड़े’
Updated Tue, 05 Jun 2018 11:44 PM IST
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‘कोई ये तो बता दो एक मां के कलेजे को ठंड कैसे पड़े’
कमाई के लिए विदेश गया था बेटा, नौ महीने बाद आई थी लाश वापिस अपने बेटे के मौत के कारणों को जानने के लिए भटक रहा है रत्ताखेड़ा का परिवार
फोटो संख्या-40
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। गुहला के गांव रत्ताखेड़ा लुकमान का नौजवान शेर सिंह कमाई करने के लिए जार्जिया गया था पर नौ महीने बाद ताबूत में बंद लाश बनकर वापिस लौटा था। घरवालों को आज तक उसकी मौत के सही कारण का पता नहीं चल पाया। शेर सिंह की मां हर रोज अपने बेटे के लिए रो देती है। उसे नहीं मालूम कि उसके तड़पते कलेजे को ठंड कैसे पड़ेगी। लड़के को विदेश भेजने वाले एजेंट ने जरूर बताया था कि शेर सिंह अपने दो अन्य साथियों के साथ रात को कमरे में हीटर चलाकर सोया था और इस कारण बनी गैस के कारण उसकी मौत हो गई। शेर सिंह के मां बाप को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। एजेंट ने कहा कि मौत की जांच की सरकारी रिपोर्ट आ जाएगी तब तो भरोसा करेंगे। दो साल बीत गए वह जांच रिपोर्ट भी नहीं आई। अपना जवान बेटा खो देने वाला परिवार आज उस तथा कथित जांच रिपोर्ट हासिल करने के लिए यहां वहां ठोकरें खा रहा है। शेर सिंह के पिता अंग्रेज सिंह कहते हैं कि बेटे की जिंदगी तो वापिस नहीं ला सकते पर उसके मौत के कारणों को तलाशकर अपने आपको तसल्ली तो दे ही सकते हैं।
गुहला के घग्गर पार के गांव रत्ताखेड़ा लुकमान के एक गरीब किसान परिवार का इकलौता बेटा शेर सिंह फरवरी 2016 में टूटे रूस के देश जार्जिया गया था। शेर सिंह की मां रणजीत कौर बताती हैं कि मेरा शेर बहुत जल्दी में था। अभी 19 साल का ही हुआ था कि विदेश जाने की तैयारी कर ली। परिवार की कुल मिल्कियत सवा एकड़ जमीन को गिरवी रखकर पैसा जुटाया और पटियाला के एक एजेंट के माध्यम से जार्जिया भेज दिया।
रणजीत कौर बताती हैं कि 25 नवंबर 2016 की आधी रात को जब शेर सिंह फोन पर यहां अपने ताऊ के लड़के बिंदर से बात कर रहा था तो बीच में उसका फोन कट गया। हरविंदर ने नेटवर्क प्राब्लम सोचकर दोबारा फोन भी नहीं मिलाया। सुबह हुई तो यह खबर मिली कि शेर सिंह की आधी रात को कमरे में सोते हुए अपने दो अन्य साथियों के साथ दम घुटने से मौत हो गई है।
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मरा नहीं किसी ने मारा है मेरा बेटा : मां
शेर सिंह की मां रणजीत कौर का कहना है कि उसका बेटा अपने आप नहीं मरा किसी ने उसकी हत्या की है। रणजीत कौर ने कहा शायद यही कारण है कि ‘कोई’ शेर सिंह की मौत की जांच रिपोर्ट उन तक नहीं पहुंचने दे रहा। रणजीत कौर ने कहा कि शेर सिंह बताता था कि एक कमरे में वे चार लड़के रहते हैं लेकिन कमरे में हीटर की गैस से मरने वालों की संख्या तीन बताई गई। ये चौथा लड़का उस रात वहां नहीं था तो कहां चला गया था। रणजीत कौर ने कहा कि शेर सिंह का मोबाइल फोन व अन्य सामान जो उसकी मौत के कारणों की तरफ कोई संकेत कर सकता था वह भी उसके शव के साथ नहीं आया।
किसी ने नहीं सुनी
शेर सिंह के पिता अंग्रेज सिंह को इस बात को लेकर भारी दुख है कि जार्जिया स्थित भारतीय दूतावास ने उनका फोन तो रिसीव किया मगर शेर सिंह की मौत की जांच रिपोर्ट को लेकर कोई सहयोग नहीं किया। अंग्रेज सिंह बताते हैं कि उन्होंने इस सिलसिले में अनेकों बार विदेश मंत्रालय में पत्र लिखे हैं लेकिन कभी कोई जवाब नहीं आया।
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कमाई के लिए विदेश गया था बेटा, नौ महीने बाद आई थी लाश वापिस अपने बेटे के मौत के कारणों को जानने के लिए भटक रहा है रत्ताखेड़ा का परिवार
फोटो संख्या-40
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। गुहला के गांव रत्ताखेड़ा लुकमान का नौजवान शेर सिंह कमाई करने के लिए जार्जिया गया था पर नौ महीने बाद ताबूत में बंद लाश बनकर वापिस लौटा था। घरवालों को आज तक उसकी मौत के सही कारण का पता नहीं चल पाया। शेर सिंह की मां हर रोज अपने बेटे के लिए रो देती है। उसे नहीं मालूम कि उसके तड़पते कलेजे को ठंड कैसे पड़ेगी। लड़के को विदेश भेजने वाले एजेंट ने जरूर बताया था कि शेर सिंह अपने दो अन्य साथियों के साथ रात को कमरे में हीटर चलाकर सोया था और इस कारण बनी गैस के कारण उसकी मौत हो गई। शेर सिंह के मां बाप को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। एजेंट ने कहा कि मौत की जांच की सरकारी रिपोर्ट आ जाएगी तब तो भरोसा करेंगे। दो साल बीत गए वह जांच रिपोर्ट भी नहीं आई। अपना जवान बेटा खो देने वाला परिवार आज उस तथा कथित जांच रिपोर्ट हासिल करने के लिए यहां वहां ठोकरें खा रहा है। शेर सिंह के पिता अंग्रेज सिंह कहते हैं कि बेटे की जिंदगी तो वापिस नहीं ला सकते पर उसके मौत के कारणों को तलाशकर अपने आपको तसल्ली तो दे ही सकते हैं।
गुहला के घग्गर पार के गांव रत्ताखेड़ा लुकमान के एक गरीब किसान परिवार का इकलौता बेटा शेर सिंह फरवरी 2016 में टूटे रूस के देश जार्जिया गया था। शेर सिंह की मां रणजीत कौर बताती हैं कि मेरा शेर बहुत जल्दी में था। अभी 19 साल का ही हुआ था कि विदेश जाने की तैयारी कर ली। परिवार की कुल मिल्कियत सवा एकड़ जमीन को गिरवी रखकर पैसा जुटाया और पटियाला के एक एजेंट के माध्यम से जार्जिया भेज दिया।
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रणजीत कौर बताती हैं कि 25 नवंबर 2016 की आधी रात को जब शेर सिंह फोन पर यहां अपने ताऊ के लड़के बिंदर से बात कर रहा था तो बीच में उसका फोन कट गया। हरविंदर ने नेटवर्क प्राब्लम सोचकर दोबारा फोन भी नहीं मिलाया। सुबह हुई तो यह खबर मिली कि शेर सिंह की आधी रात को कमरे में सोते हुए अपने दो अन्य साथियों के साथ दम घुटने से मौत हो गई है।
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मरा नहीं किसी ने मारा है मेरा बेटा : मां
शेर सिंह की मां रणजीत कौर का कहना है कि उसका बेटा अपने आप नहीं मरा किसी ने उसकी हत्या की है। रणजीत कौर ने कहा शायद यही कारण है कि ‘कोई’ शेर सिंह की मौत की जांच रिपोर्ट उन तक नहीं पहुंचने दे रहा। रणजीत कौर ने कहा कि शेर सिंह बताता था कि एक कमरे में वे चार लड़के रहते हैं लेकिन कमरे में हीटर की गैस से मरने वालों की संख्या तीन बताई गई। ये चौथा लड़का उस रात वहां नहीं था तो कहां चला गया था। रणजीत कौर ने कहा कि शेर सिंह का मोबाइल फोन व अन्य सामान जो उसकी मौत के कारणों की तरफ कोई संकेत कर सकता था वह भी उसके शव के साथ नहीं आया।
किसी ने नहीं सुनी
शेर सिंह के पिता अंग्रेज सिंह को इस बात को लेकर भारी दुख है कि जार्जिया स्थित भारतीय दूतावास ने उनका फोन तो रिसीव किया मगर शेर सिंह की मौत की जांच रिपोर्ट को लेकर कोई सहयोग नहीं किया। अंग्रेज सिंह बताते हैं कि उन्होंने इस सिलसिले में अनेकों बार विदेश मंत्रालय में पत्र लिखे हैं लेकिन कभी कोई जवाब नहीं आया।