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युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं : प्रो. राम पाल
Thu, 19 Feb 2026 12:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 19 Feb 2026 12:00 AM IST
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18जेएनडी15: सम्मेलन के ब्रोशर के लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी को आमंत्रित करते हुए कुलपति डॉ. रामप
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय की तरफ से युवाओं में बढ़ती डोपिंग और नशीली दवाओं के दुरुपयोग जैसी चुनौती पर प्रहार करने के लिए पहल की गई है। 27 फरवरी को विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय बहु विषयी सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के आधिकारिक ब्रोशर का विमोचन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. रामपाल सैनी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य खेल जगत में प्रदर्शन बढ़ाने वाली प्रतिबंधित दवाओं (डोपिंग) और समाज में फैलते नशे के जाल के खिलाफ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी विमर्श तैयार करना है।
डोपिंग न केवल खेल की नैतिकता और अनुशासन को चोट पहुंचाती है बल्कि युवाओं के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। यह सम्मेलन शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, खेल प्रशिक्षकों और नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा ताकि इस समस्या का वैज्ञानिक और सामाजिक समाधान खोजा जा सके।
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कुलपति प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने कहा यदि हम युवाओं को नशे की गर्त से नहीं बचा पाए, तो विकसित भारत का सपना अधूरा रह जाएगा। शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल डिग्री देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवन शैली और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना भी है। कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने कहा कि नशे के खिलाफ कठोर नीतियों के साथ-साथ सामाजिक सहयोग की भी अत्यंत आवश्यकता है।
वहीं एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नवीन लाडवाल ने विश्वास जताया कि नशा मुक्ति को जन-आंदोलन बनाकर ही समाज में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह सम्मेलन शोध पत्रों, चर्चाओं और सामूहिक संकल्प के माध्यम से एक ऐसी रणनीति तैयार करेगा जिससे युवाओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक नशामुक्त और सशक्त युवा वर्ग ही प्रगतिशील समाज का निर्माण कर सकता है।
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इस कार्यक्रम के आधिकारिक ब्रोशर का विमोचन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. रामपाल सैनी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य खेल जगत में प्रदर्शन बढ़ाने वाली प्रतिबंधित दवाओं (डोपिंग) और समाज में फैलते नशे के जाल के खिलाफ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी विमर्श तैयार करना है।
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डोपिंग न केवल खेल की नैतिकता और अनुशासन को चोट पहुंचाती है बल्कि युवाओं के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। यह सम्मेलन शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, खेल प्रशिक्षकों और नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा ताकि इस समस्या का वैज्ञानिक और सामाजिक समाधान खोजा जा सके।
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कुलपति प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने कहा यदि हम युवाओं को नशे की गर्त से नहीं बचा पाए, तो विकसित भारत का सपना अधूरा रह जाएगा। शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल डिग्री देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवन शैली और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना भी है। कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने कहा कि नशे के खिलाफ कठोर नीतियों के साथ-साथ सामाजिक सहयोग की भी अत्यंत आवश्यकता है।
वहीं एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नवीन लाडवाल ने विश्वास जताया कि नशा मुक्ति को जन-आंदोलन बनाकर ही समाज में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह सम्मेलन शोध पत्रों, चर्चाओं और सामूहिक संकल्प के माध्यम से एक ऐसी रणनीति तैयार करेगा जिससे युवाओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक नशामुक्त और सशक्त युवा वर्ग ही प्रगतिशील समाज का निर्माण कर सकता है।