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Jind News: बंदर और लावारिस पशु से मिलेगी निजात, पहले दिन 10 बंदर पकड़े
Fri, 26 Apr 2024 04:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 26 Apr 2024 04:30 AM IST
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25जेएनडी39-शहर से पकड़े हुए बंदर। संवाद
जींद/नरवाना। नगर परिषद ने वीरवार से शहर में बंदर पकड़ो अभियान शुरू कर दिया। इसको लेकर कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में बंदरों को पकड़ने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इनमें नगर परिषद उपप्रधान शशिकांत शर्मा व पार्षदों में विपुल नैन, नवीन शर्मा और सतीश गोयल शामिल हैं। गठित कमेटी जांच करके रिपोर्ट देगी और बंदरों के पकड़े जाने का सत्यापन करेगी।
शहर में बंदरों, लावारिस गोवंशों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बंदरों ने तो नागरिक अस्पताल, नेहरू पार्क, रेलवे स्टेशन, पटेल नगर, रेलवे रोड के साथ-साथ नगर परिषद कार्यालय में ही आतंक मचाया हुआ है। नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी काट रहे हैं। इससे मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। नेहरू पार्क में शाम और सुबह के समय काफी संख्या में लोग सैर करने के लिए आते हैं, लेकिन वहां पर मौजूद बंदर उन पर हमला कर देते हैं या कोशिश करते हैं। वहीं दूसरी तरफ शहर में बेसहारा गोवंश घूम रहे हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो सांड़ आपस में भिड़ जाते हैं, जिससे रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों को भी खतरा रहता है। वे वाहनों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। वीरवार को दस बंदरों को पकड़ा गया।
15 अप्रैल को टेंडर किया गया था, लेकिन ठेकेदार के निजी कारण से कार्य शुरू नहीं हो पाया था, जो अब शुरू हो गया है। एक बंदर को पकड़ने के लिए 17000 और गोवंश को पकड़ने के लिए 1300 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। जल्द ही शहर को लावारिस पशुओं से निजात मिल जाएगी। -विशाल मिर्धा, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद नरवाना
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शहर में बंदरों, लावारिस गोवंशों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बंदरों ने तो नागरिक अस्पताल, नेहरू पार्क, रेलवे स्टेशन, पटेल नगर, रेलवे रोड के साथ-साथ नगर परिषद कार्यालय में ही आतंक मचाया हुआ है। नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी काट रहे हैं। इससे मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। नेहरू पार्क में शाम और सुबह के समय काफी संख्या में लोग सैर करने के लिए आते हैं, लेकिन वहां पर मौजूद बंदर उन पर हमला कर देते हैं या कोशिश करते हैं। वहीं दूसरी तरफ शहर में बेसहारा गोवंश घूम रहे हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो सांड़ आपस में भिड़ जाते हैं, जिससे रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों को भी खतरा रहता है। वे वाहनों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। वीरवार को दस बंदरों को पकड़ा गया।
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15 अप्रैल को टेंडर किया गया था, लेकिन ठेकेदार के निजी कारण से कार्य शुरू नहीं हो पाया था, जो अब शुरू हो गया है। एक बंदर को पकड़ने के लिए 17000 और गोवंश को पकड़ने के लिए 1300 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। जल्द ही शहर को लावारिस पशुओं से निजात मिल जाएगी। -विशाल मिर्धा, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद नरवाना

25जेएनडी39-शहर से पकड़े हुए बंदर। संवाद
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