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बारिश में भीगने से नरवाना की मंडी में खराब हुआ गेहूं, आढ़तियों ने जताया रोष
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बारिश में भीगने से खराब हुआ गेहूं।
- फोटो : Jind
बारिश से खराब हुए गेहूं को गोदामों में नहीं लेने पर आढ़तियों ने रोष जताया है। उनका कहना है कि यह गेहूं गोदाम में जाने से पहले अधिकारी जांच करते हैं और इसके उठान के लिए पैसे की मांगा जाता है। बुधवार को आढ़ती समस्या को लेकर मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे।
अनाज मंडी के प्रधान जयदेव बंसल ने कहा कि ट्रकों में भरकर जब गेहूं गोदामों में जाता है तो वहां पर परकी मारकर गेहूं को वापस भेज दिया जाता है। बंसल ने आरोप लगाए कि आढ़तियों से पैसे की मांग की जाती है। जब पैसे नहीं देते तो गेहूं को खराब बताकर वापस भेज दिया जाता है। बंसल ने कहा कि पिछले एक माह से गेहूं की बोरियां अनाज मंडी में पड़ी हुई हैं। सरकार 72 घंटे में उठान का दावा करती है, लेकिन उठान बिल्कुल धीमी गति से हो रहा है। अधिकारियों से बात करने के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों है। उन्होंने कहा कि आढ़तियों को भुगतान में भी ढील बरती जा रही है।
आढ़ती नरेश जैन ने कहा कि कोई भी कर्मचारी व अधिकारी अनाज मंडी में नहीं आता। जिस कारण बारिश के बाद मंडी के हालात बदतर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था बिल्कुल ठप है और बारिश के पानी की निकासी का भी कोई प्रबंध नहीं है। बारिश के कारण आढ़तियों का 25 प्रतिशत गेहूं खराब हो चुका है। आढ़तियों ने जल्द उठान करवाने और खराब गेहूं का भुगतान सरकार द्वारा करने की मांग की।
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मार्केट कमेटी सचिव जोगिंद्र सिंह ने कहा कि नरवाना की मंडी में दो एजेंसियों द्वारा खरीद की गई थी, जिनका उठान का कार्य चल रहा है। बारिश में भीगी बोरियों को ही गोदामों से वापस भेजा गया था। जिसके बाद आढ़ती एजेंसियों से नाराज हो गए। इस बारे में अधिकारियों से बात की जा रही है।
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अनाज मंडी के प्रधान जयदेव बंसल ने कहा कि ट्रकों में भरकर जब गेहूं गोदामों में जाता है तो वहां पर परकी मारकर गेहूं को वापस भेज दिया जाता है। बंसल ने आरोप लगाए कि आढ़तियों से पैसे की मांग की जाती है। जब पैसे नहीं देते तो गेहूं को खराब बताकर वापस भेज दिया जाता है। बंसल ने कहा कि पिछले एक माह से गेहूं की बोरियां अनाज मंडी में पड़ी हुई हैं। सरकार 72 घंटे में उठान का दावा करती है, लेकिन उठान बिल्कुल धीमी गति से हो रहा है। अधिकारियों से बात करने के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों है। उन्होंने कहा कि आढ़तियों को भुगतान में भी ढील बरती जा रही है।
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आढ़ती नरेश जैन ने कहा कि कोई भी कर्मचारी व अधिकारी अनाज मंडी में नहीं आता। जिस कारण बारिश के बाद मंडी के हालात बदतर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था बिल्कुल ठप है और बारिश के पानी की निकासी का भी कोई प्रबंध नहीं है। बारिश के कारण आढ़तियों का 25 प्रतिशत गेहूं खराब हो चुका है। आढ़तियों ने जल्द उठान करवाने और खराब गेहूं का भुगतान सरकार द्वारा करने की मांग की।
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मार्केट कमेटी सचिव जोगिंद्र सिंह ने कहा कि नरवाना की मंडी में दो एजेंसियों द्वारा खरीद की गई थी, जिनका उठान का कार्य चल रहा है। बारिश में भीगी बोरियों को ही गोदामों से वापस भेजा गया था। जिसके बाद आढ़ती एजेंसियों से नाराज हो गए। इस बारे में अधिकारियों से बात की जा रही है।