{"_id":"612a7bac8ebc3e6ed2137e83","slug":"vikas-rana-reached-international-level-fighting-financial-crisis-jind-news-rtk6222980118","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्थिक तंगी से लड़ अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची विकास राणा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आर्थिक तंगी से लड़ अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची विकास राणा
विज्ञापन
स्कीइंग खिलाड़ी विकास राणा। संवाद
- फोटो : Jind
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐसे लोग विरले ही होते हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को साबित करने का हौसला रखते हैं। ऐसी ही हैं सुदकैन कलां गांव की रहने वाली स्कीइंग खिलाड़ी विकास राणा। प्रदेश की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी 28 वर्षीय विकास राणा पिछले दस साल से स्कीइंग खेल रही हैं।
विकास के पिता किसान हैं और वे पांच एकड़ भूमि पर खेती करते हैं। घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के बावजूद पिछले 10 साल से विकास राणा खुद को अगले साल होने वाले विंटर ओलंपिक के लिए तैयार कर रही हैं। हरियाणा के ज्यादातर लोगों को स्कीइंग खेल के बारे में भी पता नहीं है। लेकिन विकास ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद संघर्ष किया। इसके लिए माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तापमान में तैयारी करनी पड़ती है। विपरीत हालात से लड़कर चैंपियन बनने वाली विकास का सपना 4 से 20 फरवरी 2022 तक होने वाले विंटर ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश के लिए पदक लाना है। विकास राणा बताती हैं कि उनके फूफा सेना में अधिकारी थे। उन्होंने ही इस खेल में उन्हें भेजा, लेकिन आज हरियाणा सरकार स्कीइंग को मान्यता नहीं दे रही है। उनके ओलंपिक में जाने पर भी संशय बना हुआ है।
सात चोटियों को फतेह कर चुकी हैं विकास
विकास राणा अब तक सात पहाड़ी चोटियां फतेह कर चुकी हैं। इनमें से दो चोटियां विदेशों में स्थित हैं। 2018 में उन्होंने ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर्वत पर 5642 मीटर की ऊंचाई से स्कीइंग करते हुए नीचे आई। यह साहसिक कारनामा करने वाली वह देश की पहली खिलाड़ी है जिन्होेंने इंडिया बुक रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुकी है। 2017 में जापान में हुए विंटर एशियन खेलों में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया। 2016 में हुए राष्ट्रीय खेलों में चौथा स्थान प्राप्त किया।
विज्ञापन
सरकार से मिले मदद
मेरे पिता किसान हैं। स्कीइंग का अभ्यास बर्फ पर होता है। ऐसे क्षेत्रों में रहना ही बहुत महंगा होता है। अब मैं लद्दाख में अभ्यास कर रही हूं। प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये रहने व खाने का खर्च है। सरकार से मदद नहीं मिल रही। लेकिन परिवार की मदद से मैं अभी भी मैदान में डटी हूं। अभ्यास के लिए दूसरे देशों में भी जाना पड़ता है। ऐसे में सरकार इसमें सहयोग दे।
विज्ञापन
विकास के पिता किसान हैं और वे पांच एकड़ भूमि पर खेती करते हैं। घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के बावजूद पिछले 10 साल से विकास राणा खुद को अगले साल होने वाले विंटर ओलंपिक के लिए तैयार कर रही हैं। हरियाणा के ज्यादातर लोगों को स्कीइंग खेल के बारे में भी पता नहीं है। लेकिन विकास ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद संघर्ष किया। इसके लिए माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तापमान में तैयारी करनी पड़ती है। विपरीत हालात से लड़कर चैंपियन बनने वाली विकास का सपना 4 से 20 फरवरी 2022 तक होने वाले विंटर ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश के लिए पदक लाना है। विकास राणा बताती हैं कि उनके फूफा सेना में अधिकारी थे। उन्होंने ही इस खेल में उन्हें भेजा, लेकिन आज हरियाणा सरकार स्कीइंग को मान्यता नहीं दे रही है। उनके ओलंपिक में जाने पर भी संशय बना हुआ है।
विज्ञापन
सात चोटियों को फतेह कर चुकी हैं विकास
विकास राणा अब तक सात पहाड़ी चोटियां फतेह कर चुकी हैं। इनमें से दो चोटियां विदेशों में स्थित हैं। 2018 में उन्होंने ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर्वत पर 5642 मीटर की ऊंचाई से स्कीइंग करते हुए नीचे आई। यह साहसिक कारनामा करने वाली वह देश की पहली खिलाड़ी है जिन्होेंने इंडिया बुक रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुकी है। 2017 में जापान में हुए विंटर एशियन खेलों में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया। 2016 में हुए राष्ट्रीय खेलों में चौथा स्थान प्राप्त किया।
विज्ञापन
सरकार से मिले मदद
मेरे पिता किसान हैं। स्कीइंग का अभ्यास बर्फ पर होता है। ऐसे क्षेत्रों में रहना ही बहुत महंगा होता है। अब मैं लद्दाख में अभ्यास कर रही हूं। प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये रहने व खाने का खर्च है। सरकार से मदद नहीं मिल रही। लेकिन परिवार की मदद से मैं अभी भी मैदान में डटी हूं। अभ्यास के लिए दूसरे देशों में भी जाना पड़ता है। ऐसे में सरकार इसमें सहयोग दे।