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Jind News: टीबी मुक्त अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 64 गांवों के नाम भेजे राज्य टीम के पास
Tue, 11 Mar 2025 01:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 11 Mar 2025 01:21 AM IST
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10जेएनडी14-जिला क्षय रोग केंद्र का फोटो। संवाद
जींद। स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत राज्य टीम को जिले की 64 पंचायतों के नाम भेजे गए हैं। इन पंचायतों की अब राज्य की टीम की ओर से जांच की जाएगी। राज्य टीम के मानक पूरे करने वाली पंचायतों को ही टीबी मुक्त घोषित किया जाएगा। पिछले साल 19 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायतों को जागरूक करने में जुटा हुआ है। विभाग की टीम अब प्रत्येक गांव में जाकर टीबी के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं। टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों की पुष्टि के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कुछ मानक तय किए हैं। इसमें टीबी मुक्त प्रमाण पत्र के लिए ग्राम पंचायत में एक या एक से कम मरीज होने चाहिए। ग्राम पंचायत में एक हजार लोगों में कम से कम 30 लोगों की बलगम की जांच अनिवार्य है। डीबीटी के तहत पोषण योजना का लाभ टीबी मरीजों को मिलना अनिवार्य है। इन सभी मानकों को पूरा करने वाली पंचायतों को टीबी मुक्त पंचायत के लिए घोषित किया जाएगा। इस समय जिले में 1091 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। टीबी के मरीज को इस समय एक हजार रुपये खुराक भत्ता के रूप में दी जाती है। माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु के कारण ये संक्रमण होता है। बैक्टीरिया आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसके अलावा इसका दुष्प्रभाव किडनी, रीढ़ और मस्तिष्क पर भी देखा जा सकता है। टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों की बीमारी मानी जाती है। इसके लक्षण सांस की समस्याओं और फेफ ड़ों की अन्य दिक्कतों से संबंधित होते हैं। मरीजों की आमतौर पर छह महीने तक इलाज चलता है।
बॉक्स
64 पंचायतों के भेजे नाम
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत राज्य टीम को जिले की 64 पंचायतों के नाम भेजे गए हैं। इन पंचायतों की अब राज्य की टीम की ओर से जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि जिले को टीबी मुक्त किया जा सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है।
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-- डॉ. पालेराम कटारिया, डिप्टी सिविल सर्जन।
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फिलहाल स्वास्थ्य विभाग टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायतों को जागरूक करने में जुटा हुआ है। विभाग की टीम अब प्रत्येक गांव में जाकर टीबी के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं। टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों की पुष्टि के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कुछ मानक तय किए हैं। इसमें टीबी मुक्त प्रमाण पत्र के लिए ग्राम पंचायत में एक या एक से कम मरीज होने चाहिए। ग्राम पंचायत में एक हजार लोगों में कम से कम 30 लोगों की बलगम की जांच अनिवार्य है। डीबीटी के तहत पोषण योजना का लाभ टीबी मरीजों को मिलना अनिवार्य है। इन सभी मानकों को पूरा करने वाली पंचायतों को टीबी मुक्त पंचायत के लिए घोषित किया जाएगा। इस समय जिले में 1091 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। टीबी के मरीज को इस समय एक हजार रुपये खुराक भत्ता के रूप में दी जाती है। माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु के कारण ये संक्रमण होता है। बैक्टीरिया आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसके अलावा इसका दुष्प्रभाव किडनी, रीढ़ और मस्तिष्क पर भी देखा जा सकता है। टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों की बीमारी मानी जाती है। इसके लक्षण सांस की समस्याओं और फेफ ड़ों की अन्य दिक्कतों से संबंधित होते हैं। मरीजों की आमतौर पर छह महीने तक इलाज चलता है।
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64 पंचायतों के भेजे नाम
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत राज्य टीम को जिले की 64 पंचायतों के नाम भेजे गए हैं। इन पंचायतों की अब राज्य की टीम की ओर से जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि जिले को टीबी मुक्त किया जा सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है।
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