{"_id":"692b379d457f518424095089","slug":"two-thousand-years-old-heritage-became-the-center-of-attraction-in-geeta-festival-jind-news-c-199-1-sroh1006-144633-2025-11-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: गीता समारोह में आकर्षण का केंद्र बनी दो हजार साल पुरानी धरोहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: गीता समारोह में आकर्षण का केंद्र बनी दो हजार साल पुरानी धरोहर
विज्ञापन
29जेएनडी10-गीता जयंती समारोह में लगे स्टॉल में लोगों को धरोहर के बारे में जानकारी देते हुए गुलश
जींद। शहर के गुलशन भारद्वाज (77) अपने अंदर दो हजार साल पुरानी धरोहर समेटे हुए हैं। उनके पास ऐसी-ऐसी चीज हैं जिनको आज की पीढ़ी जानती भी नहीं है। उनका यह शौक वर्ष 1964 के बाद पैदा हुआ जब वह सोने-चांदी का व्यापार करते थे। उन्होंने अपनी धरोहर का प्रदर्शन शनिवार को रंगशाला में आयोजित गीता जयंती समारोह में स्टॉल लाकर किया।
गुलशन भारद्वाज ने वर्ष 1964 में सोने-चांदी की दुकान शुरू की थी। वह दिल्ली से सोने की मोहरें भी लाते थे। फिर उन्हें पुराने सिक्कों, प्राचीन आभूषणों और दुर्लभ धातु सामग्री के प्रति स्वाभाविक लगाव होने लगा। धीरे-धीरे यह रुचि एक शौक बन गई। आज स्थिति यह है कि दूर-दूर से लोग प्राचीन चीजें देखने के लिए आते हैं।
उनके पास प्राचीन काल के सोने-चांदी के सिक्के, अलग-अलग साम्राज्यों में इस्तेमाल की गई मुद्राएं, तांबे की पुरानी मूर्तियां, दुर्लभ आभूषण व मिट्टी के बर्तन रखे हुए हैं। गुलशन भारद्वाज के अनुसार उनके पास दो साल पुराना मिट्टी का शंख भी है जो काफी आवाज करता है।
विज्ञापन
इसके अलावा कुछ वस्तुएं गुप्त साम्राज्य के समय की भी हैं जिनकी उम्र लगभग दो हजार वर्ष मानी जाती है। उन्होंने कई राज्यों की यात्रा की और समय-समय पर विभिन्न पुरातात्विक मेलों, प्रदर्शनियों और धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर संग्रह बढ़ाया। उनका हर साल जींद में आयोजित होने वाले गीता जयंती समारोह में स्टॉल खास आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
बॉक्स
इतिहास से जोड़ने का लक्ष्य
गुलशन भारद्वाज का कहना है कि उनका उद्देश्य इन धरोहरों को बेचने का नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक इतिहास को सही रूप में पहुंचाने का है। वे चाहते हैं कि बच्चे इन वस्तुओं को देखकर इतिहास से जुड़ें।
विज्ञापन
गुलशन भारद्वाज ने वर्ष 1964 में सोने-चांदी की दुकान शुरू की थी। वह दिल्ली से सोने की मोहरें भी लाते थे। फिर उन्हें पुराने सिक्कों, प्राचीन आभूषणों और दुर्लभ धातु सामग्री के प्रति स्वाभाविक लगाव होने लगा। धीरे-धीरे यह रुचि एक शौक बन गई। आज स्थिति यह है कि दूर-दूर से लोग प्राचीन चीजें देखने के लिए आते हैं।
विज्ञापन
उनके पास प्राचीन काल के सोने-चांदी के सिक्के, अलग-अलग साम्राज्यों में इस्तेमाल की गई मुद्राएं, तांबे की पुरानी मूर्तियां, दुर्लभ आभूषण व मिट्टी के बर्तन रखे हुए हैं। गुलशन भारद्वाज के अनुसार उनके पास दो साल पुराना मिट्टी का शंख भी है जो काफी आवाज करता है।
विज्ञापन
इसके अलावा कुछ वस्तुएं गुप्त साम्राज्य के समय की भी हैं जिनकी उम्र लगभग दो हजार वर्ष मानी जाती है। उन्होंने कई राज्यों की यात्रा की और समय-समय पर विभिन्न पुरातात्विक मेलों, प्रदर्शनियों और धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर संग्रह बढ़ाया। उनका हर साल जींद में आयोजित होने वाले गीता जयंती समारोह में स्टॉल खास आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
बॉक्स
इतिहास से जोड़ने का लक्ष्य
गुलशन भारद्वाज का कहना है कि उनका उद्देश्य इन धरोहरों को बेचने का नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक इतिहास को सही रूप में पहुंचाने का है। वे चाहते हैं कि बच्चे इन वस्तुओं को देखकर इतिहास से जुड़ें।

29जेएनडी10-गीता जयंती समारोह में लगे स्टॉल में लोगों को धरोहर के बारे में जानकारी देते हुए गुलश