{"_id":"6570ca2673438f1cff0131d9","slug":"two-day-language-program-festival-begins-in-crsu-jind-news-c-199-1-sroh1006-9811-2023-12-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: सीआरएसयू में दो दिवसीय भाषा कार्यक्रम उत्सव शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: सीआरएसयू में दो दिवसीय भाषा कार्यक्रम उत्सव शुरू
Thu, 07 Dec 2023 12:53 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 07 Dec 2023 12:53 AM IST
विज्ञापन
06जेएनडी39-सीआरएसयू में आयोजित समारोह में मुख्यातिथि को सम्मानित करते हुए। विज्ञप्ति
जींद। सीआरएस विश्वविद्यालय में बुधवार को दो दिवसीय भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन हुआ। इसमें मुख्य रूप से कुलपति डॉ. रणपाल सिंह ने हिस्सा लिया।
उन्होंने कहा कि भारत और प्रांतीय सरकार के योजना अनुरूप अंग्रेजी, हिंदी और साथ जुड़े अन्य विभाग यह उत्सव मना रहे हैं। इस आयोजन में क्षेत्रीय भाषाओं के रचनाकारों और कलाकारों ने हिस्सा लिया। यह भारतीय भाषा उत्सव भाषाओं को महत्व देते हुए उनके आधार और अधिक पुष्ट करेगा तथा युवाओं में अपनी मातृभाषा पर महारत हासिल करने के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं को भी सीखने के प्रति उत्साह को जागृत करेगा। अपने यहां कहावत भी है कि बंदा रोटी पाणी से नहीं बल्कि बोली बाणी से पलता है।
कुलसचिव डॉ. लवलीन मोहन ने बताया कि युवा वर्ग नई तकनीकों के साथ एक से अधिक भाषाएं कैसे सीखे। यह ज्ञान भी बहुत जरूरी है। यह सीख समाज में बड़े स्तर पर सांस्कृतिक जागरूकता और समावेशी चिंतन को बढ़ावा देगी। यह भारतीय भाषाओं में प्रौद्योगिकी के अनुकूलन को बढ़ावा देगा। इससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अधिक से अधिक भारतीय भाषाओं का उपयोग करने के शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गति के द्वार खुलेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि भारत और प्रांतीय सरकार के योजना अनुरूप अंग्रेजी, हिंदी और साथ जुड़े अन्य विभाग यह उत्सव मना रहे हैं। इस आयोजन में क्षेत्रीय भाषाओं के रचनाकारों और कलाकारों ने हिस्सा लिया। यह भारतीय भाषा उत्सव भाषाओं को महत्व देते हुए उनके आधार और अधिक पुष्ट करेगा तथा युवाओं में अपनी मातृभाषा पर महारत हासिल करने के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं को भी सीखने के प्रति उत्साह को जागृत करेगा। अपने यहां कहावत भी है कि बंदा रोटी पाणी से नहीं बल्कि बोली बाणी से पलता है।
कुलसचिव डॉ. लवलीन मोहन ने बताया कि युवा वर्ग नई तकनीकों के साथ एक से अधिक भाषाएं कैसे सीखे। यह ज्ञान भी बहुत जरूरी है। यह सीख समाज में बड़े स्तर पर सांस्कृतिक जागरूकता और समावेशी चिंतन को बढ़ावा देगी। यह भारतीय भाषाओं में प्रौद्योगिकी के अनुकूलन को बढ़ावा देगा। इससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अधिक से अधिक भारतीय भाषाओं का उपयोग करने के शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गति के द्वार खुलेंगे।
विज्ञापन