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Jind News: धर्म और सत्य की मूर्ति भाई मतीदास छिब्बर को दी श्रद्धांजलि

Mon, 10 Nov 2025 12:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Mon, 10 Nov 2025 12:02 AM IST
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Tribute paid to Bhai Matidas Chhibber, the epitome of religion and truth
09जेएनडी30 : गुरू के सम्मुख नतमस्तक होते हुए श्रद्धालु। स्रोत श्रद्धालु
जींद। धर्म को बचाने के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले भाई मती दास छिब्बर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि के लिए रविवार को रेलवे रोड पर सुखमनी साहब पाठ का आयोजन किया गया।
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कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने गुरू के सम्मुख नतमस्तक होकर गुरूओं की शहादत को याद किया। इस दौरान लंगर का भी आयोजन किया गया। जिसमें लोगों ने प्रसाद चखा।
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अशोक छिब्बर ने बताया कि सबसे पहले सुखमनी साहिब के पाठ का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। उन्होंने बताया कि भाई मती दास 11 नवंबर 1675 को दिल्ली के चांदनी चौक में शहीद हुए थे।
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उन्हें औरंगजेब के आदेश पर आरी से चीर कर मारा गया था। क्योंकि उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इस्लाम न स्वीकार करने पर औरंगजेब के आदेश से उन्हें यातनाएं दी गई जिसमें उन्हें आरी से दो टुकड़ों में काट दिया गया।

उसी दिन उनके छोटे भाई भाई सती दास और भाई दयाल दास भी शहीद हुए थे। भाई मति दास जी सिख धर्म के महान शहीदों में से एक थे। जिन्होंने गुरु तेग बहादुर के साथ धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका बलिदान सिख इतिहास में एक अविस्मरणीय उदाहरण है। जो आज भी साहस, निष्ठा और धर्म के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरणा देता है।
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