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पत्नी की ड्यूटी में न आए बाधा, इसलिए बेटे को अंबाला से लेकर सफीदों आ गया व्यक्ति
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अपने डेढ़ साल के बेटे के साथ अनु और सुशील।
- फोटो : Jind
कोरोना महामारी से लड़ने में कोई अड़चन न आए इसलिए लोग इस समय केवल और केवल देश को ही महत्व दे रहे हैं। सफीदों निवासी एक व्यक्ति ने पत्नी की ड्यूटी में कोई बाधा न पहुंचे, इसके लिए अपने डेढ़ वर्ष के बेटे को लेकर पत्नी से दूर हो गया। व्यक्ति का कहना है कि यदि वह अपनी पत्नी के पास रहता तो बच्चे के कारण उसकी पत्नी पूरी तन्मयता से ड्यूटी नहीं कर पाती। इसलिए बच्चे को को लेकर उससे दूर रहने का फैसला लिया।
सफीदों की गीता कॉलोनी निवासी सुशील लाड़वाल ने बताया कि उसकी पत्नी अनु अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में स्टाफ नर्स है। उनका एक डेढ़ वर्ष का बेटा अदृत भी है। वह नागरिक अस्पताल की कॉलोनी में ही रहते हैं। कोरोना के चलते उसकी पत्नी अनु की ड्यूटी आइसोलेशन वार्ड में लगी है। डेढ़ वर्ष के बच्चे के कारण उसकी पत्नी की ड्यूटी प्रभावित होने लगी तो दोनों ने मिलकर अलग रहने का फैसला लिया, ताकि कोरोना की जंग में उसकी पत्नी पूरी तन्मयता से अपना दायित्व निभा सके। सुशील ने कहा कि वह मूलरूप से सफीदों की गीता कॉलोनी का रहने वाला है। वह अपने डेढ़ वर्ष के बेटे को लेकर सफीदों आ गया, ताकि उसकी पत्नी की ड्यूटी प्रभावित न हो।
सुशील ने कहा कि यह देश के लिए संकट की घड़ी है। इसमें वह लोग जितना योगदान दे सकें, वह कम ही है। जब तक कोरोना का संकट खत्म नहीं हो जाता, वह अपने बेटे की देखभाल करेगा। उसकी पत्नी रात को एक बार वीडियो कॉल करके अपने बेटे से लाड़ लड़ा लेती है।
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सफीदों की गीता कॉलोनी निवासी सुशील लाड़वाल ने बताया कि उसकी पत्नी अनु अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में स्टाफ नर्स है। उनका एक डेढ़ वर्ष का बेटा अदृत भी है। वह नागरिक अस्पताल की कॉलोनी में ही रहते हैं। कोरोना के चलते उसकी पत्नी अनु की ड्यूटी आइसोलेशन वार्ड में लगी है। डेढ़ वर्ष के बच्चे के कारण उसकी पत्नी की ड्यूटी प्रभावित होने लगी तो दोनों ने मिलकर अलग रहने का फैसला लिया, ताकि कोरोना की जंग में उसकी पत्नी पूरी तन्मयता से अपना दायित्व निभा सके। सुशील ने कहा कि वह मूलरूप से सफीदों की गीता कॉलोनी का रहने वाला है। वह अपने डेढ़ वर्ष के बेटे को लेकर सफीदों आ गया, ताकि उसकी पत्नी की ड्यूटी प्रभावित न हो।
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सुशील ने कहा कि यह देश के लिए संकट की घड़ी है। इसमें वह लोग जितना योगदान दे सकें, वह कम ही है। जब तक कोरोना का संकट खत्म नहीं हो जाता, वह अपने बेटे की देखभाल करेगा। उसकी पत्नी रात को एक बार वीडियो कॉल करके अपने बेटे से लाड़ लड़ा लेती है।

अंबाला में ड्यूटी पर अनु।- फोटो : Jind
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