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Jind News: फिर बोतल से बाहर आया सफीदों को जिला बनाने का जिन्न
Wed, 26 Jun 2024 01:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 26 Jun 2024 01:26 AM IST
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25जेएनडी31: सफीदों के मध्य में विद्यमान महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर मंदिर। संवाद
सफीदों। असंध, गोहाना, हांसी, डबवाली व मानेसर को जिला बनाए जाने की बात उठने के बाद एक बार फिर से सफीदों को जिला बनाने का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। हर कोई इसको लेकर अपनी-अपनी बातें लिख रहे हैं और सबका लब्बोलुआब एक ही कि सफीदों को किसी नए बनने वाले में जिले में शामिल करने के बजाय इसे ही जिला बनाया जाए। इसके लिए विभिन्न प्रकार के तर्क व आंकड़े भी दिए जा रहें हैं। लोग इस मामले में सामूहिक संघर्ष एवं प्रयास करने की बातें कह रहे हैं।
सफीदों के लोगों का इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उन्हें जींद से निकालकर नए बनने वाले जिले गोहाना में शामिल ना कर दिया जाए। यह मामला कोई नया नहीं है। सन 2009 में भी सफीदों को गोहाना में शामिल होने की बात सामने आई थी। जिसको लेकर लोगों ने पूर्व पालिका प्रधान मनोज दीवान के नेतृत्व में जिला बनाओ संघर्ष संघर्ष समिति का भी गठन किया था। लोगों ने अनेक प्रकार से धरने-प्रदर्शन करके अनेक ज्ञापन अधिकारियों व राजनेताओं को सौंपे गए थे।
लोग क्या देते हैं तर्क
सफीदों एक ऐतिहासिक नगरी है तथा इसका महाभारतकालीन सभ्यता में विस्तृत वर्णन है। यहां पर ऐतिहासिक महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर व मंदिर आज भी विद्यमान है जोकि सफीदों क्षेत्र की पौराणिकता को दर्शाता है। लोगों कहना है कि सफीदों में डाक सेवा 1885 में ब्रिटिश सरकार से संधि करके शुरू की गई थी। सन 1889 में यहां पहला अपर प्राइमरी स्कूल बन गया था। 1914 में यहां कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी शुरू हो गई थी। जींद-पानीपत रेलसेवा सन 1916 में शुरू हुई तथा सफीदों में रेलवे स्टेशन का निर्माण 1931 में हो गया था। यहां पर एलोपैथिक डिस्पेंसरी 1918 में प्रारंभ हो गई थी और 1971 में इसे अस्पताल का दर्जा मिला था। सफीदों में अनाज मंडी की स्थापना 1920 में हो गई थी तथा यहां नगरपालिका 1938 में बन गई थी। सन 1952 में सफीदों विधानसभा क्षेत्र बना था और सन 1968 में सफीदों तहसील बन गई थी। सन 1975 में यहां न्यायालय की स्थापना हो गई और सन 1980 में सफीदों सबडिवीजन बन गया था। लोगों का कहना है कि जब रियासतों को समाप्त करके उनका विलय भारत में किया गया तो रियासत जींद को सबसे पहले 15 जुलाई 1948 को भारत के एक नए राज्य पेप्सू में मिला दिया गया। तब संगरूर जिला बना तथा सफीदों इस जिले में शामिल था। एक नवंबर 1966 को जब हरियाणा अस्तित्व में आया तब जींद, सफीदों एवं दादरी तो हरियाणा में आ गए मगर संगरूर पंजाब में ही रह गया था। उस समय जिला जींद बन गया तथा सफीदों को तहसील बना दिया गया था। इस तरह सफीदों की उत्पत्ति एवं अस्तित्व बहुत पौराणिक है। ऐसे में जिला बनाए जाने का पहला हक गोहाना से पहले सफीदों का बनता है।
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तत्कालीन जिला बनाओ संघर्ष समिति के प्रधान मनोज दीवान ने कहा कि इस मामले में क्षेत्र के मौजिज लोगों की बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में कोई आगामी फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सफीदों के पौराणिक महत्व को देखते हुए इसे जल्द से जल्द जिला बनाया जाए।
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सफीदों के लोगों का इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उन्हें जींद से निकालकर नए बनने वाले जिले गोहाना में शामिल ना कर दिया जाए। यह मामला कोई नया नहीं है। सन 2009 में भी सफीदों को गोहाना में शामिल होने की बात सामने आई थी। जिसको लेकर लोगों ने पूर्व पालिका प्रधान मनोज दीवान के नेतृत्व में जिला बनाओ संघर्ष संघर्ष समिति का भी गठन किया था। लोगों ने अनेक प्रकार से धरने-प्रदर्शन करके अनेक ज्ञापन अधिकारियों व राजनेताओं को सौंपे गए थे।
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लोग क्या देते हैं तर्क
सफीदों एक ऐतिहासिक नगरी है तथा इसका महाभारतकालीन सभ्यता में विस्तृत वर्णन है। यहां पर ऐतिहासिक महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर व मंदिर आज भी विद्यमान है जोकि सफीदों क्षेत्र की पौराणिकता को दर्शाता है। लोगों कहना है कि सफीदों में डाक सेवा 1885 में ब्रिटिश सरकार से संधि करके शुरू की गई थी। सन 1889 में यहां पहला अपर प्राइमरी स्कूल बन गया था। 1914 में यहां कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी शुरू हो गई थी। जींद-पानीपत रेलसेवा सन 1916 में शुरू हुई तथा सफीदों में रेलवे स्टेशन का निर्माण 1931 में हो गया था। यहां पर एलोपैथिक डिस्पेंसरी 1918 में प्रारंभ हो गई थी और 1971 में इसे अस्पताल का दर्जा मिला था। सफीदों में अनाज मंडी की स्थापना 1920 में हो गई थी तथा यहां नगरपालिका 1938 में बन गई थी। सन 1952 में सफीदों विधानसभा क्षेत्र बना था और सन 1968 में सफीदों तहसील बन गई थी। सन 1975 में यहां न्यायालय की स्थापना हो गई और सन 1980 में सफीदों सबडिवीजन बन गया था। लोगों का कहना है कि जब रियासतों को समाप्त करके उनका विलय भारत में किया गया तो रियासत जींद को सबसे पहले 15 जुलाई 1948 को भारत के एक नए राज्य पेप्सू में मिला दिया गया। तब संगरूर जिला बना तथा सफीदों इस जिले में शामिल था। एक नवंबर 1966 को जब हरियाणा अस्तित्व में आया तब जींद, सफीदों एवं दादरी तो हरियाणा में आ गए मगर संगरूर पंजाब में ही रह गया था। उस समय जिला जींद बन गया तथा सफीदों को तहसील बना दिया गया था। इस तरह सफीदों की उत्पत्ति एवं अस्तित्व बहुत पौराणिक है। ऐसे में जिला बनाए जाने का पहला हक गोहाना से पहले सफीदों का बनता है।
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तत्कालीन जिला बनाओ संघर्ष समिति के प्रधान मनोज दीवान ने कहा कि इस मामले में क्षेत्र के मौजिज लोगों की बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में कोई आगामी फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सफीदों के पौराणिक महत्व को देखते हुए इसे जल्द से जल्द जिला बनाया जाए।

25जेएनडी31: सफीदों के मध्य में विद्यमान महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर मंदिर। संवाद

25जेएनडी31: सफीदों के मध्य में विद्यमान महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर मंदिर। संवाद