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Jind News: कोरोना काल की त्रासदी ने बदली सोच, अंतिमा भारद्वाज ने लगाए 1500 पौधे
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26 जुलाना 01: जुलाना रेस्ट हाउस के पास पौधारोपण करते हुए अंतिमा भारद्वाज। संवाद
जुलाना। कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी से लोगों को दम तोड़ते देख गतौली गांव निवासी अंतिमा भारद्वाज ने पौधे लगाने का संकल्प लिया जो आज पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन गया है।
साल 2020 में कोरोना काल के दौरान जब देशभर में ऑक्सीजन की कमी से हालात गंभीर थे उसी समय अंतिमा भारद्वाज ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें संरक्षित करने का निर्णय लिया। अपने इस संकल्प को उन्होंने निरंतर मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ाया है।
अब तक वह लगभग 1500 पौधे लगा चुकी हैं। वह इन पौधों की नियमित देखभाल भी स्वयं करती हैं। अंतिमा का मानना है कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उसे बड़ा होने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
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इसी सोच के साथ वह प्रतिदिन सुबह अपने पति राजबीर भारद्वाज के साथ सैर पर निकलती हैं। वह अपने साथ पानी का बर्तन भी रखती हैं और रास्ते में मिले उन पौधों को पानी देती हैं जिन्हें देखभाल की आवश्यकता होती है।
अंतिमा बताती हैं कि जहां भी उन्हें खाली जगह मिलती है, वह वहां पौधा लगाने का प्रयास करती हैं। हर पौधे को एक बच्चे की तरह संभालना चाहिए। उनका कहना है कि वर्तमान समय में बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए पौधारोपण सबसे प्रभावी उपाय है।
अंतिमा भारद्वाज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी पूरी जिम्मेदारी भी निभाएं। यदि हर नागरिक एक-एक पौधे को पेड़ बनने तक संभाल ले तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरा भरा वातावरण मिल सकता है।
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साल 2020 में कोरोना काल के दौरान जब देशभर में ऑक्सीजन की कमी से हालात गंभीर थे उसी समय अंतिमा भारद्वाज ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें संरक्षित करने का निर्णय लिया। अपने इस संकल्प को उन्होंने निरंतर मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ाया है।
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अब तक वह लगभग 1500 पौधे लगा चुकी हैं। वह इन पौधों की नियमित देखभाल भी स्वयं करती हैं। अंतिमा का मानना है कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उसे बड़ा होने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
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इसी सोच के साथ वह प्रतिदिन सुबह अपने पति राजबीर भारद्वाज के साथ सैर पर निकलती हैं। वह अपने साथ पानी का बर्तन भी रखती हैं और रास्ते में मिले उन पौधों को पानी देती हैं जिन्हें देखभाल की आवश्यकता होती है।
अंतिमा बताती हैं कि जहां भी उन्हें खाली जगह मिलती है, वह वहां पौधा लगाने का प्रयास करती हैं। हर पौधे को एक बच्चे की तरह संभालना चाहिए। उनका कहना है कि वर्तमान समय में बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए पौधारोपण सबसे प्रभावी उपाय है।
अंतिमा भारद्वाज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी पूरी जिम्मेदारी भी निभाएं। यदि हर नागरिक एक-एक पौधे को पेड़ बनने तक संभाल ले तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरा भरा वातावरण मिल सकता है।