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Jind News: 10 साल में 250 दुकानों तक पहुंचा जूतों का कारोबार
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13जेएनडी04 : शहर में एक दुकान पर जूते खरीदते हुए ग्राहक। संवाद
रेखा रानी
जींद। शहर में जूतों के बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 10 साल पहले शहर में 100 जूतों की दुकानें थीं जहां आमतौर पर 100 रुपये से 150 रुपये में चप्पलें आसानी से मिल जाती थीं। अब शहर में जूतों की दुकानों की संख्या बढ़कर 250 तक पहुंच गई हैं।
बाजार में केवल साधारण दुकानें ही नहीं बल्कि नामी-कंपनियों के शोरूम भी खुल गए हैं। शोरूम खुलने से शहर के फुटवियर बाजार को नई पहचान मिली है। आधुनिक डिजाइन, बेहतर क्वालिटी और ब्रांडेड जूते मिलने लगे हैं, जिससे ग्राहकों को एक ही जगह पर ज्यादा विकल्प मिल रहे हैं और बाजार की प्रतिष्ठा और आकर्षण बढ़ गया है।
अब शहर में ग्राहकों के पास बहुत सारे विकल्प हैं। बाजार में साधारण उपयोग के लिए सस्ते जूते और चप्पलें उपलब्ध हैं वहीं दूसरी ओर ब्रांडेड और फैशनेबल जूतों की भी खूब मांग बढ़ी है। इन शोरूमों में 4000 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक के जूते बिक रहे हैं। -निकुंज
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पहले ग्राहक कीमत को ही सबसे बड़ा मापदंड मानते थे लेकिन अब गुणवत्ता, ब्रांड और डिजाइन को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इससे न सिर्फ कारोबार बढ़ा है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। नए शोरूम और दुकानों के खुलने से कई युवाओं को काम मिला है। -राधे श्याम
पहले ग्राहक कम खर्चे में सस्ते जूते को प्राथमिकता देते थे लेकिन आज के समय में ग्राहकों के पास बहुत सारे विकल्प हैं और लोग फैशन और ट्रेंड वाले जूते खरीदते हैं। वहीं, बाजार में महिलाओं के लिए अलग से फुटवियर है। -दीपक सिंह
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जींद। शहर में जूतों के बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 10 साल पहले शहर में 100 जूतों की दुकानें थीं जहां आमतौर पर 100 रुपये से 150 रुपये में चप्पलें आसानी से मिल जाती थीं। अब शहर में जूतों की दुकानों की संख्या बढ़कर 250 तक पहुंच गई हैं।
बाजार में केवल साधारण दुकानें ही नहीं बल्कि नामी-कंपनियों के शोरूम भी खुल गए हैं। शोरूम खुलने से शहर के फुटवियर बाजार को नई पहचान मिली है। आधुनिक डिजाइन, बेहतर क्वालिटी और ब्रांडेड जूते मिलने लगे हैं, जिससे ग्राहकों को एक ही जगह पर ज्यादा विकल्प मिल रहे हैं और बाजार की प्रतिष्ठा और आकर्षण बढ़ गया है।
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अब शहर में ग्राहकों के पास बहुत सारे विकल्प हैं। बाजार में साधारण उपयोग के लिए सस्ते जूते और चप्पलें उपलब्ध हैं वहीं दूसरी ओर ब्रांडेड और फैशनेबल जूतों की भी खूब मांग बढ़ी है। इन शोरूमों में 4000 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक के जूते बिक रहे हैं। -निकुंज
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पहले ग्राहक कीमत को ही सबसे बड़ा मापदंड मानते थे लेकिन अब गुणवत्ता, ब्रांड और डिजाइन को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इससे न सिर्फ कारोबार बढ़ा है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। नए शोरूम और दुकानों के खुलने से कई युवाओं को काम मिला है। -राधे श्याम
पहले ग्राहक कम खर्चे में सस्ते जूते को प्राथमिकता देते थे लेकिन आज के समय में ग्राहकों के पास बहुत सारे विकल्प हैं और लोग फैशन और ट्रेंड वाले जूते खरीदते हैं। वहीं, बाजार में महिलाओं के लिए अलग से फुटवियर है। -दीपक सिंह

13जेएनडी04 : शहर में एक दुकान पर जूते खरीदते हुए ग्राहक। संवाद

13जेएनडी04 : शहर में एक दुकान पर जूते खरीदते हुए ग्राहक। संवाद

13जेएनडी04 : शहर में एक दुकान पर जूते खरीदते हुए ग्राहक। संवाद