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दोबारा शुरू होगी शहर से निकलने वाले कचरे से खाद बनाने की परियोजना
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गुरुद्वारा के पास बनाया गया स्वच्छता पार्क। संवाद
- फोटो : Jind
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नगर परिषद द्वारा चार साल पहले शहर से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाने का शुरू किया गया काम अब दोबारा से शुरू होगा। इससे नगर परिषद अपनी आमदनी बढ़ाएगा। हालांकि दो साल से यह परियोजना बंद पड़ी है। गुरुद्वारा के पास बनने वाली इस कंपोस्ट खाद की एनडीआरआई करनाल से जांच भी करवाई गई थी। इस खाद की गुणवत्ता बहुत ही उत्तम बताई गई थी। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता व कोरोना के चलते यह परियोजना अब ठप पड़ी है।
दरअसल शहर के वार्ड नंबर छह व सात से निकलने वाले कचरे से खाद बनाने का यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। करीब दो साल तक यह परियोजना चली और इसे दो और जगह बनाने की भी योजना थी, लेकिन तभी प्रशासनिक व्यवस्थाएं बदलने से यह परियोजना बीच में ही दम तोड़ गई। शहर के दो वार्डों से प्रतिदिन करीब एक टन कचरा निकलता था। इसे गुरुद्वारा के पास बनाए गए स्वच्छता पार्क में एकत्रित किया जाता था। यहां बनाई गई विशेष जगह पर गोबर व कुछ अन्य ऑर्गेनिक तत्व मिलाकर खाद तैयार की गई थी। हालांकि नगर परिषद इस खाद को बेच नहीं पाया और यह परियोजना इससे पहले ही बंद हो गई।
एक दिन के कचरे से तैयार होती है 400 किलोग्राम खाद
नगर परिषद पहले दो ही वार्डों का गीला कचरा स्वच्छता पार्क में खाद बनाने के लिए प्रयोग करता था। यहां प्रतिदिन करीब एक हजार किलोग्राम कचरा आता था, जिससे करीब 400 किलोग्राम खाद बनती थी। मार्केट में इस खाद को 20 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेचा जा सकता है।
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कॉलोनी में बांटी गई खाद
उस समय लोगों को गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से दोनों वार्डों की कॉलोनियों में घर-घर खाद बांटी गई थी। इसके अलावा नगर परिषद ने अपने पार्कों में भी खाद का प्रयोग किया था।
शहर से प्रतिदिन निकलता है 100 टन कचरा
शहर में प्रतिदिन करीब 100 टन कचरा निकलता है। इसमें से 60 प्रतिशत कचरा रसोई का होता है। इसमें फल व सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना शामिल होता है। इससे जल्द व अच्छी खाद बनती है। साथ ही कूड़ा निस्तारण की समस्या का भी समाधान हो जाता है।
दोबारा शुरू करेंगे परियोजना
मैंने यह परियोजना देखी है। इसका काफी अच्छा रुझान था, लेकिन अब यह बंद है। इसके लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। बजट की मांग की गई है। इसको दोबारा शुरू किया जाएगा। प्रयास रहेगा कि शहर के अधिक से अधिक कचरे को इसमें शामिल किया जाए। -संजय बिश्नोई, डीएमसी।
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दरअसल शहर के वार्ड नंबर छह व सात से निकलने वाले कचरे से खाद बनाने का यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। करीब दो साल तक यह परियोजना चली और इसे दो और जगह बनाने की भी योजना थी, लेकिन तभी प्रशासनिक व्यवस्थाएं बदलने से यह परियोजना बीच में ही दम तोड़ गई। शहर के दो वार्डों से प्रतिदिन करीब एक टन कचरा निकलता था। इसे गुरुद्वारा के पास बनाए गए स्वच्छता पार्क में एकत्रित किया जाता था। यहां बनाई गई विशेष जगह पर गोबर व कुछ अन्य ऑर्गेनिक तत्व मिलाकर खाद तैयार की गई थी। हालांकि नगर परिषद इस खाद को बेच नहीं पाया और यह परियोजना इससे पहले ही बंद हो गई।
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एक दिन के कचरे से तैयार होती है 400 किलोग्राम खाद
नगर परिषद पहले दो ही वार्डों का गीला कचरा स्वच्छता पार्क में खाद बनाने के लिए प्रयोग करता था। यहां प्रतिदिन करीब एक हजार किलोग्राम कचरा आता था, जिससे करीब 400 किलोग्राम खाद बनती थी। मार्केट में इस खाद को 20 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेचा जा सकता है।
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कॉलोनी में बांटी गई खाद
उस समय लोगों को गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से दोनों वार्डों की कॉलोनियों में घर-घर खाद बांटी गई थी। इसके अलावा नगर परिषद ने अपने पार्कों में भी खाद का प्रयोग किया था।
शहर से प्रतिदिन निकलता है 100 टन कचरा
शहर में प्रतिदिन करीब 100 टन कचरा निकलता है। इसमें से 60 प्रतिशत कचरा रसोई का होता है। इसमें फल व सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना शामिल होता है। इससे जल्द व अच्छी खाद बनती है। साथ ही कूड़ा निस्तारण की समस्या का भी समाधान हो जाता है।
दोबारा शुरू करेंगे परियोजना
मैंने यह परियोजना देखी है। इसका काफी अच्छा रुझान था, लेकिन अब यह बंद है। इसके लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। बजट की मांग की गई है। इसको दोबारा शुरू किया जाएगा। प्रयास रहेगा कि शहर के अधिक से अधिक कचरे को इसमें शामिल किया जाए। -संजय बिश्नोई, डीएमसी।